राजनीति

गाजा नरसंहार के दो वर्ष पूरे होने पर दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन

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इजरायल द्वारा गाजा का नरसंहार शुरू किये दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस पूरी अवधि में गाजा के समर्थन में दुनिया भर में जनता की एकजुटता बढ़ती गयी है। 2 वर्ष पूरे होने पर भी जग

....और मियां ट्रम्प टापते रह गये

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डोनाल्ड ट्रम्प जब से दुबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने तब से वे ऐसे-ऐसे कारनामे कर रहे हैं कि अनायास ही वे महान स्पेनिश लेखक मिगुएल डे सर्वेंट्स के उपन्यास ‘डॉन क्विगजोट’

और अब मेडागास्कर में युवा विद्रोह - राष्ट्रपति भागे

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नेपाल के जेन-जेड युवाओं की दिखायी राह पर मेडागास्कर के युवा बढ़ चुके हैं। सितम्बर माह में बिजली व पानी की कटौती के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन का सरकार द्वारा दमन किया ग

ट्रम्प का विज्ञान विरोधी प्रलाप

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बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में ऑटिज्म पर आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में अपना घोर विज्ञान विरोधी वक्तव्य दिया। ऑटिज्म पैदाइशी एक ऐसी अवस्था

नेपाल में जन विद्रोह - रास्ता किधर है?

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पूंजीवादी लोकतंत्र का लुटेरा चेहरा अधिकाधिक उजागर होता जा रहा है। ऐसे में कल यही जनता जब सुस्पष्ट क्रांतिकारी विचारधारा से लैस होकर सड़कों पर उतरेगी तो उसके निशाने पर पूंजीवादी व्यवस्था होगी। तब इस लुटेरी व्यवस्था के साथ पीछे से सक्रिय लुटेरी ताकतों का षड्यंत्र भी ध्वस्त हो जायेगा। और समाजवाद के नये सवेरे का उदय होगा। भारत के सभी पड़ोसी मुल्कों के युवा-आम मेहनतकश अपनी पहलकदमी दिखा चुके हैं। अगला नम्बर निश्चय ही भारत का होगा।

शंघाई शिखर सम्मेलन : दुनिया बढ़ती साम्राज्यवादी होड़ की ओर

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अभी 31 अगस्त और 1 सितम्बर के चीन के शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एस.सी.ओ.) का अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। शंघाई सहयोग संगठन की शुरूवात एक छोटे से क्

फ्रांस में ‘‘सब कुछ रोको आंदोलन’’

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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन की मदद करने के चक्कर में फ्रांसीसी मजदूर-मेहनतकश अवाम के ऊपर लगातार आर्थिक बोझ डालकर उनकी जिंदगी को और ज्यादा अ

नेपाल में युवाओं का विद्रोह

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नेपाल के युवा इतिहास रच चुके हैं। दो दिन के उनके संघर्ष ने सरकार को भागने पर मजबूर कर दिया। तीनों प्रमुख पार्टियों के नेता, संसद, राष्ट्रपति भवन, अदालत कोई भी युवाओं के ग

नस्लीय इजरायल को एज्योर नहीं

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माइक्रोसाफ्ट ने चार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिन्होंने कंपनी के इजरायल के साथ संबंधों को लेकर कंपनी परिसर में विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, जिनमें से दो ऐ

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

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शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

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जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

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हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

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दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।