दो साल संघर्ष के बाद मजदूरों की कार्यबहाली

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हरिद्वार/ सिडकुल (हरिद्वार) में स्थित सी एंड एस इलेक्ट्रिक लिमिटेड (स्विच, बिजली बोर्ड, पैनल आदि) हेवी पावर सप्लाई के प्रोडक्ट बनाती है। 2006 में सी एंड एस का एक बीटी प्लांट लगा था और बाद में एल डब्लू, एमसीबी, बीडी नाम से तीन प्लांट और लगे। इन चारों प्लाटों में लगभग 2000 मजदूर कार्यरत हैं। 10 प्रतिशत स्थायी मजदूर हैं बाकी मजदूर एफटी, नीम ट्रेनी व ठेके आदि पर रखे गये हैं। स्थायी मजदूरों को न्यूनतम वेतन से थोड़ा ज्यादा वेतन व बोनस, छुट्टियां वगैरह मिलती हैं बाकी अस्थायी मजदूरों को न्यूनतम वेतन ही मिलता है। 
    
सी एंड एस इलेक्ट्रिक लिमिटेड को जब मार्च 2021 में जर्मन कम्पनी सीमेंस ग्रुप ने खरीद लिया तब मजदूरों को मैनेजमेंट ने ख्वाब दिखाया कि अब तुम्हारी सैलरी बढ़ जायेगी और उसके बाद ओवरटाइम बंद कर 8 घंटे की शिफ्ट कर दी गई। कुछ महीने बाद बीटी प्लांट के मजदूर वेतन वृद्धि को लेकर मैनेजमेंट से संघर्ष करने लगे। और एक लिखित मांग पत्र मजदूरों से हस्ताक्षर कराकर कम्पनी मैनेजमेंट को सौंपा। मैनेजमेंट मजदूरों की बातों को अनसुना करता रहा और बाद में तो एक-एक मजदूर को बुलाकर नौकरी से निकालने की धमकी देना और तरह-तरह से उत्पीड़न शुरू कर दिया। मजदूर संघर्ष करने के लिए ठान चुके थे। 
    
3-4 महीने बाद फिर एक सामूहिक वेतन वृद्धि के लिए पत्र कम्पनी के उच्च अधिकारियों को भेजा गया लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच वेतन में नाममात्र की बढ़ोत्तरी कर मैनेजमेंट शांत बैठ गया। इतनी कम तनख्वाह में परिवार चलाना मुश्किल हो जा रहा था। मजदूरों में असंतोष बढ़ता जा रहा था। एक बार फिर मजदूरों ने 9 सूत्रीय मांगों के साथ श्रम विभाग में अपना मांग पत्र लगाया तो कम्पनी मैनेजमेंट ने बौखला कर कमेटी के 6 मजदूरों में से 2 को निष्कासित कर दिया और 4 मजदूरों को दूसरे राज्य में साईटों पर भेज दिया तो मजदूरों ने जाने से मना कर दिया और मजदूरों ने हाईकोर्ट का रुख किया। मजदूरों की जीत हुई जो चार मजदूर स्थानान्तरित हुए थे, वे काम पर वापस ले लिए गये। लेकिन मैनेजमेंट एकता को तोड़ने के लिए तरह-तरह की चाल चलने लगा। दो स्थायी मजदूरों को लालच और धमकी देकर सुपरवाइजर बना दिया और नये बने एक सुपरवाइजर को भाड़े के गुंड़ों से पिटवाया और इसका इलजाम संघर्षरत मजदूरों पर डाला गया। प्लांट के अंदर पुलिस आ कर 11 मजदूरों को उठाती है और ले जा कर थाने में बंद कर देती है। 
    
उस दौरान इंकलाबी मजदूर केंद्र व संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के नेताओं को घटना के बारे जानकारी मिलते ही थाने पर जा कर पुलिस की इस घृणित कार्यवाही के खिलाफ संघर्ष करने पर मजदूरों को छोड़ दिया जाता है। एक हफ्ते के बाद फिर पुलिस आती है एक मजदूर को फिर उठाकर सिडकुल थाने में 8-9 घंटे लॉकअप में बंद कर उस पर जुर्म कुबूल करने के लिए दबाव बनाया जाता है लेकिन मजदूर संगठनों को खबर लगते ही फिर थाने जा कर मजदूर को छुड़ा लिया जाता है। मैनेजमेंट व पुलिस द्वारा मजदूरों का उत्पीड़न जारी रहता है और 4 मजदूरों को फिर से दूसरे राज्यों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसे लेकर श्रम विभाग में एक मांग पत्र लगाने के बाद कई बार वार्ता होती है लेकिन मैनेजमेंट हठधर्मिता पर अड़ा रहता है। 
    
इसी बीच सीमेंस वर्कर्स यूनियन फेडरेशन से मजदूर जुड़कर सदस्य बन जाते हैं और उसके बाद 6 मजदूरों सहित 112 मजदूरों का केस श्रम न्यायालय हल्द्वानी में चलने लगता है। सीमेंस वर्कर्स यूनियन मुम्बई से नेता आकर मीटिंग करते रहे। अलग-अलग मौकों पर मजदूरों की मांगों को उठाने का काम शुरू कर दिया गया और इस दौरान सिडकुल की अन्य फैक्टरियों के मजदूरों के संघर्ष व धरना-प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों में अपनी मांगें उठाते रहे। सीमेंस वर्कर्स यूनियन कम्पनी के उच्च अधिकारियों से वार्ता कर दबाव बनाने व संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा, हरिद्वार स्थानीय शासन-प्रशासन के सामने धरना-प्रदर्शनों में लगातार इन मजदूरों की मांगों को लेकर संघर्षरत रहा। 
    
अंततः सी एंड एस इलेक्ट्रिक लिमिटेड के मैनेजमेंट की सीमेंस वर्कर्स यूनियन से वार्ता हुई। 4 मजदूरों को 2 साल के लंबे संघर्ष के बाद काम पर वापस लेना पड़ा। एक मजदूर की 58 उम्र होने पर उसे सम्मानजनक हिसाब देकर रिटायर करना पड़ा। और एक मजदूर जो कमेटी के अध्यक्ष हैं उनका अभी श्रम न्यायालय हल्द्वानी में मामला चल रहा है। थोड़े से स्थायी मजदूर होने के बावजूद मजदूर हौंसले के साथ संघर्ष करते रहे। आगे सी एंड एस इलेक्ट्रिक लिमिटेड (सीमेंस) कम्पनी के मजदूरों को व्यापक एकता बनानी होगी। मजदूरों का शोषण-उत्पीड़न करने के लिए सिडकुल के सारे पूंजीपति एक हैं। मजदूरों को भी मजबूत जुझारू एकता बनानी होगी।  तब जाकर अपने अधिकारों व नौकरी को बचा पायेंगे। 
        
-हरिद्वार संवाददाता

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