जारी है मजदूर संघर्षों की लहर

Published
Tue, 06/16/2026 - 10:53
/jari-hai-majadoor-sangharson-ki-lahar

वेतनवृद्धि की मांग को लेकर सोसाइटी कर्मचारियों की हड़ताल

गाजियाबाद/ 11 जून को गाजियाबाद, गुलशान भारती एनएच-9 स्थित महागुनपुरम सोसाइटी के कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने वेतन बढ़ाने, बीमा योजना का लाभ देने की मांग को लेकर हड़ताल कर दी और मेंटिनेंस कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
    
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें योगी सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा। कम वेतन में गुजारा करना भी मुश्किल हो रहा है। सोसाइटी की मेंटिनेंस कंपनी के तहत सुरक्षाकर्मी, हाउसकीपिंग कर्मचारी, प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन समेत 100 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यह सभी कर्मचारी 11 जून, गुरुवार की सुबह से ही हड़ताल पर चले गए। सुबह से लेकर शाम चार बजे तक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इससे सोसाइटी की सफाई से लेकर सभी व्यवस्थाएं चरमरा गईं। सोसाइटी में न तो सफाई हुई और न ही कूड़ा उठाया गया।
    
हड़ताली कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से काफी कम भुगतान किया जा रहा है। हाउसकीपिंग स्टाफ के पुरुष कर्मियों को 9 हजार रुपये तथा महिलाओं को 8,700 रुपये वेतन दे रहे हैं। सुरक्षाकर्मियों को सिर्फ 11 हजार रुपये देकर बिना छुट्टी दिए 12-12 घंटे तक की ड्यूटी कराई जा रही है। ओवर टाईम का भुगतान नहीं होता। प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन को कुशल श्रेणी का कर्मचारी होने के बावजूद निर्धारित से कम केवल 13,700 रुपये वेतन मिलता है। 
    
कर्मचारियों ने मेंटिनेंस कंपनी पर वेतन भुगतान में भी गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी दो-दो कर्मचारियों को एक चेक से वेतन का भुगतान कर रही है, जबकि सभी को अलग-अलग वेतन दिया जाना चाहिए। यह नियमों का उल्लंघन है। इसकी जांच होनी चाहिए।
    
सोसाइटी कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर करीब एक सप्ताह पहले भी हड़ताल कर चुके हैं। श्रम विभाग की अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों से बातचीत की थी। लेकिन उसके बावजूद भी उनके साथ अन्याय हो रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपना हक मांग रहे हैं जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

डेल्ट्रान कान्टिनेंटल डिवाइसेज, चंडीगढ़ के मजदूरों की आंशिक जीत के बाद हड़ताल समाप्त

चंडीगढ़/ पिछले शनिवार को डेल्ट्रान कान्टिनेंटल डिवाइसेज, चंडीगढ़ के मजदूर पूर्ण रूप से हड़ताल पर उतर आए। वेतन वृद्धि, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, वेतन सहित छुट्टियां और बेहतर भोजन की मांग को लेकर यह संघर्ष शुरू किया गया था। ये केवल डेल्ट्रान के मजदूरों की ही नहीं, बल्कि चंडीगढ़ औद्योगिक क्षेत्र के अधिकांश मजदूरों की आम मांगें हैं। कई जगहों पर मजदूर इससे भी बदतर परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर हैं। इसके बावजूद डेल्ट्रान के मजदूरों ने इन मांगों को उठाया और आंशिक जीत हासिल की।
    
इस स्वतः स्फूर्त रूप से शुरू हुई हड़ताल का असर कंपनी की मोहाली इकाई तक भी पहुंचा, जहां मजदूरों ने एक दिन की हड़ताल की। अन्य मजदूर संघर्षों की तरह कंपनी प्रबंधन ने हड़ताल को तोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन मजदूर अपने संघर्ष पर डटे रहे। अंततः प्रबंधन को ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, वेतन में आंशिक वृद्धि, वेतन सहित एक छुट्टी तथा बेहतर भोजन उपलब्ध कराने की मांगों पर सहमत होना पड़ा।
    
मजदूरों ने बताया कि इस संघर्ष के दौरान उनके बीच गहरी एकता विकसित हुई है। उनका कहना है कि इसी एकता के बल पर वे भविष्य में एक यूनियन का निर्माण करेंगे और अपने अधिकारों के लिए अधिक संगठित ढंग से संघर्ष करेंगे।
    
मजदूरों की प्रमुख मांगें जिन पर जीत हासिल हुई 
1. वेतन में आंशिक (1500 रुपये) वृद्धि।
2. ओवरटाइम का दोगुना भुगतान लागू करने पर जीत।
3. एक वेतन सहित (पेड) छुट्टी।
4. बेहतर भोजन उपलब्ध कराने पर जीत।
        साभार: मुक्ति संग्राम
 

आलेख

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?