मेंथा फैक्टरी में आग से सहमे ग्रामीण

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बदायूं/ दिनांक 23 मई 25 को सुबह लगभग 10 बजे जनहित सत्याग्रह मोर्चा की तीन सदस्यीय टीम ने उझानी स्थित मेंथा फैक्टरी का दौरा किया। ज्ञात हो कि 21 मई की रात में मेंथा फैक्टरी में भीषण आग लग गई थी। इस आग ने लगभग पूरी फैक्टरी को अपनी चपेट में ले लिया था। दो दिन बाद भी अभी फैक्टरी के पीछे के इलाके में आग सुलग रही थी। पूरे इलाके में धुआं था। टीम ने वहां मौजूद लोगों से बातचीत की और हालात का जायजा लिया। 
    
टीम को गांववासियों ने बताया कि रात को तेज आंधी की वजह से एक चिमनी टूट कर गिर गई जिसमें आग थी। थोड़ी देर बाद ही फैक्टरी का काफी ऊंचा बिल्डिंगनुमा हिस्सा टूट कर उस चिमनी और बायलर के ऊपर गिरा। इसमें सिलेंडर और तेल था। देखते ही देखते तेल ने आग पकड़ ली। आग की लपटों ने बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग के दौरान कई धमाके हुए जिससे आग और भी फैल गई। गांव में घूमने पर टीम को पता चला कि लोगों में अभी भी दहशत है। इलाके में फैले धुंए से लोगों को दिक्कत हो रही है। विस्फोट से उड़कर एक ड्रम फैक्टरी के करीब ही एक घर में जाकर गिरा। वहीं लोगों ने बताया कि एक घर में टीन की चादर का बड़ा हिस्सा टूट कर गिरा। 
    
रात में जिस तरह फैक्टरी में रखे सिलेंडर फट रहे थे उससे डर था कि ये आग और इससे होने वाले विस्फोटों से कोई बड़ा नुकसान आस-पास की आबादी को ना हो जाए, इसलिए गांव कुड़ा नरसिंहपुर और उझानी कस्बे तक के लोग रात में ही पलायन करने लगे। पूरे इलाके को खाली किया जाने लगा। इस दौरान कुछ अफवाहें भी फैलीं कि इलाके को खाली किया जाए। गांव वालों ने बताया कि 22 मई 25 की रात को सब लोग वापस अपने घरों पर आ गए। 
    
कई ग्रामीणों से बात करने के बाद टीम की मुलाकात फैक्टरी के एक मजदूर से हुई जो आग लगने वाले दिन फैक्टरी में ही ड्यूटी पर थे। उन्होंने बताया कि जैसे ही बिल्डिंग गिरी सभी लोग भागकर गेट पर आ गए। उनका कहना है कि जो बिल्डिंग गिरी उस पर दो या तीन लोग ही काम करते हैं। बाकी लोग अलग-अलग जगहों पर काम करते हैं। मजदूर के अनुसार बाकी लोग बाहर आ गए। एक मजदूर अंदर फंस गया जिसका अभी तक पता नहीं चल रहा है। ये मजदूर फैक्टरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर बिचोला गांव के हैं। उनके दो भाई और भी इसी फैक्टरी में काम करते हैं, जो बाहर आ गए थे। एक ट्रक ड्राइवर जो कि हरियाणा के बताए जाते हैं, वे आग लगने के बाद काफी ऊंचाई से कूदे जिस कारण उनका पैर टूट गया। इनके अलावा मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चार लोग झुलसे हुए बताए गए हैं। 
    
मजदूर ने ही बताया कि इस फैक्टरी में लगभग 200 मजदूर काम करते हैं। इसके अलावा टेक्निकल स्टाफ, सुपरवाइजर व अन्य लोग हैं। रात को लगभग 100 के आस-पास लोग मौजूद थे। फैक्टरी में 12 घंटे की शिफ्ट चलती है। टीम को यह भी पता चला कि फैक्टरी के कारण पूरे इलाके का पानी भी खराब हो रहा है। पानी पीने लायक नहीं बचा है। 
    
आजकल फैक्टरियों में आग लगने की घटनाएं काफी हो रही हैं। बड़े शहरों या औद्योगिक इलाकों में औद्योगिक दुर्घटनाओं में आग लगने से होने वाली घटनाएं काफी आम हैं। जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान आम मजदूरों का होता है। पूंजीपति को तो इंश्योरेंस या राजनीतिक पहुंच के कारण नुकसान की एक हद तक भरपाई हो जाती है। लेकिन इससे जिन मजदूरों की रोजी-रोटी छिन जाती है, जो मजदूर अपनी जान गंवा बैठते हैं उन्हें अक्सर ही उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। उन्हें कोई मुआवजा तक नहीं मिलता। कई बार तो देखने में ये भी आता है कि कारखानों में सुरक्षा उपकरणों का अभाव घटना को और भी विकराल बना देता है। कुछ मालिक तो ऐसी घटनाओं के समय फैक्टरी में मौजूद मजदूरों की वास्तविक संख्या भी नहीं बताते। 
    
जनहित सत्याग्रह मोर्चा ने मांग की कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के उचित इंतजाम किए जाएं। इस फैक्टरी में रात्रि ड्यूटी पर लगे मजदूरों की संख्या का बाहर सुरक्षित मजदूरों से मिलान किया जाए। मृतक मजदूर के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। घायलों के मुफ्त इलाज और मुआवजे का प्रबंध किया जाए। गांव वालों के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था की जाए। दौरे को गई टीम में मोर्चा के अध्यक्ष प्रेमपाल सिंह, महामंत्री चरन सिंह तथा उप महामंत्री सतीश मौजूद थे।                 -बदायूं संवाददाता

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