नये लेबर कोड्स के विरुद्ध सेमिनारों का आयोजन

Published
Sun, 02/01/2026 - 07:00
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इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा 26 जनवरीः गणतंत्र दिवस के अवसर पर नये लेबर कोड्स पर दिल्ली-एनसीआर, गढ़वाल (हरिद्वार), कुमाऊं (काशीपुर) उत्तर प्रदेश (बरेली) एवं पूर्वांचल (मऊ-बलिया) स्तर पर सेमिनार आयोजित किये गये। 
    
दिल्ली-एनसीआर स्तर पर गुड़गांव में आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि इन लेबर कोड्स में स्थायी प्रकृति के कामों पर थ्ज्म् के तहत अस्थायी मजदूरों की नियुक्ति का कानूनी प्रावधान कर स्थायी रोजगार पाने का अधिकार खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा मजदूरों के ट्रेड यूनियन अधिकारों एवं हड़ताल के अधिकार पर भी भारी हमले बोले गये हैं। 
    
सेमिनार में इंकलाबी मजदूर केंद्र की फरीदाबाद, दिल्ली एवं गुड़गांव की टीमों के अलावा श्रमिक संग्राम कमेटी, हमारी सोच, जागरुक मजदूर किसान यूनियन, भगतसिंह स्टूडेंट यूथ फ्रंट, ।प्न्ज्न्ब् के प्रतिनिधियों इत्यादि ने भागीदारी की।
    
उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के हरिद्वार में आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि इन लेबर कोड्स में महिला मजदूरों का सस्ते श्रमिक के रूप में इस्तेमाल कर अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के मकसद से उनसे अब रात की पाली में भी काम कराने का अधिकार पूंजीपतियों को सौंप दिया गया है। इसके अलावा 8 घंटे कार्यदिवस के कानूनी अधिकार पर भी हमला बोला गया है। 
    
सेमिनार में संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, सीमेंस वर्कर्स यूनियन, एवेरेडी मजदूर यूनियन, किरबी श्रमिक कमेटी, फ़ूड्स श्रमिक यूनियन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन एवं एचएनबी के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
    
कुमाऊं मंडल के काशीपुर में आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि देशी-विदेशी पूंजीपतियों की मांग पर लाये गये ये लेबर कोड्स आजाद भारत में मजदूरों पर किया गया सबसे बड़ा हमला है। इनमें फैक्टरी की परिभाषा को बदलकर मजदूरों की बड़ी आबादी को श्रम कानूनों के दायरे से ही बाहर कर दिया गया है। 
    
सेमिनार में इंकलाबी मजदूर केंद्र की रामनगर और काशीपुर की टीमों के अलावा प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन एवं प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की।
    
उत्तर प्रदेश के बरेली में आयोजित सेमिनार में सर्वप्रथम विभिन्न औद्योगिक दुर्घटनाओं में शहीद हुये मजदूरों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई; तदुपरांत वक्ताओं ने कहा कि इन लेबर कोड्स के तहत उदारीकरण-निजीकरण की जनविरोधी नीतियों के तहत जारी श्रम सुधारों को एक मुकाम पर पहुंचा दिया गया है। इनमें म्ैप्ब् और च्थ् जैसी मजदूरों को हासिल सामाजिक सुरक्षाओं को भी छीनने की कोशिश की गई है। 
    
सेमिनार में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच, बरेली ट्रेड यूनियन फेडरेशन, एन ई रेलवे मेंस कांग्रेस और मजदूर मंडल के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की।
    
उत्तर प्रदेश के ही पूर्वांचल में मऊ में आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार एक ओर देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हितों को एकदम नग्न होकर साध रही है तो वहीं संघ-भाजपा समाज में सांप्रदायिक वैमनस्य को गहरा कर रही है। एक ओर घोर मजदूर लेबर कोड्स लाये गये हैं तो वहीं दूसरी ओर नफरत की राजनीति परवान चढ़ रही है और अंधराष्ट्रवादी उन्माद भड़काया जा रहा है। ऐसे में मजदूरों को आपस में बंटने के बजाय एक वर्ग के रूप में एकजुट होकर इन लेबर कोड्स का विरोध करना होगा।
    
सेमिनार में इंकलाबी मजदूर केंद्र और ग्रामीण मजदूर यूनियन की मऊ और बलिया की टीमों के अलावा एम सी पी आई, ऐक्टू, सी पी आई (एम एल), ए आई यू टी यू सी, क्रांतिकारी जनमुक्ति संगठन, सरकारीकरण आंदोलन मंच एवं सी पी आई व सी पी एम इत्यादि के प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की।      -विशेष संवाददाता
 

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