औरंगजेब और आधुनिक कट्टरपंथी
हिन्दू फासीवादियों के लिए औरंगजेब एक खास शख्स है। यह उनकी कल्पनाओं का ऐसा दुश्मन है जिस पर लगातार हमला करके वे आम हिन्दुओं को अपने पीछे गोलबंद करने का प्रयास करते हैं। उन
हिन्दू फासीवादियों के लिए औरंगजेब एक खास शख्स है। यह उनकी कल्पनाओं का ऐसा दुश्मन है जिस पर लगातार हमला करके वे आम हिन्दुओं को अपने पीछे गोलबंद करने का प्रयास करते हैं। उन
अक्टूबर के पहले हफ्ते के अंत में एक सुबह दिल्ली-एनसीआर समेत कई जगहों पर 40 से अधिक, अधिकतर ऐसे पत्रकारों एवं अन्य मीडियाकर्मियों के घरों पर पुलिस ने छापे मारे, उनसे घर पर
देश के पूंजीवादी लोकतंत्र ने 70 से अधिक वर्ष पूरे कर लिये। अप्रैल 1952 को पहली चुनी संसद अस्तित्व में आयी थी। इन 70 बरसों में भारतीय संसद ने खुद को रसातल में ले जाने का क
हाल ही में सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा के साथ ही इसके एजेण्डे को लेकर पूंजीवादी हलकों में तरह-तरह के अनुमान लगाये जाते रहे हैं। इसी बीच सरकार द्वारा ‘
‘‘हमारे देश में सामाजिक असमानता का एक इतिहास रहा है।...हमने अपने साथी इंसानों को सामाजिक व्यवस्था में पिछड़ा बनाये रखा। वे जानवरों की तरह रहते रहे और हमने उनकी परवाह नहीं
मोदी सरकार द्वारा भारत में बहुप्रचारित जी-20 का शिखर सम्मेलन रूसी व चीनी राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में सम्पन्न हो गया। रूस व चीन के राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में ऐसा दबाव त
हिन्दू फासीवादियों की केन्द्रीय सरकार ने भारत के आपराधिक कानूनों को बदलने की घोषणा कर दी है। भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम को बदल
अभी ज्यादा दिन नहीं बीते जब रेलवे के पुलिसकर्मी चेतन ने चलती ट्रेन में अपने अधिकारी और मुस्लिम समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी थी। तब उस पुलिसकर्मी को बचाने के लिए उसक
जी-20 का शिखर सम्मेलन 9-10 सितम्बर को दिल्ली में होना है। पर इसकी बैठकें साल भर से बीसियों शहरों में होती रही हैं। सितम्बर माह की हाई प्रोफाइल बैठकें नई दिल्ली, मुंबई, वा
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।