शोषण, दमन, उत्पीड़न के बीच संघर्षरत हैं यूपीपीसीएल के संविदा कर्मी

सरकार से मांगें पूरी कराने को विद्युत संविदा कर्मचारियों ने निकाला मशाल जुलूस

बदायूं/ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ लखनऊ द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारियों की मांगों को लेकर संघर्ष जारी है। 18000 रु. मासिक वेतन का भुगतान करने/कार्य के अनुरूप अनुबंध करने, मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस लेने, ई पी एफ घोटाले की जांच कराने, दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु मानक के अनुरूप सुरक्षा उपकरण देने, कार्य के दौरान विकलांग हुए कर्मचारियों को क्षतिपूर्ति देने की मांग पर कर्मचारी संघर्ष कर रहे हैं। इसके अलावा मैसर्स ओरियन सिक्योरिटी सलूशन प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स विद्युत मजदूर कल्याण समिति, मैसर्स टी डी एस कम्पनी, मैसर्स एस के इलैक्ट्रिकल्स, मैसर्स साधना सिक्योरिटी सलूशन प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स जनमेजय सिंह आदि द्वारा ई पी एफ में किए गए घोटाले की राशि को वसूल कर कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते में जमा कराने की भी मांग कर्मचारियों की है। आउटसोर्स कर्मचारियों को पेट्रोल व मोबाइल भत्ता देने, मृतक कर्मचारियों के परिजनों को 10 लाख रुपये दुर्घटना हित लाभ देने की भी कर्मचारी मांग कर रहे हैं। प्रबन्ध निदेशक उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड शक्ति भवन लखनऊ द्वारा दिनांक 14 अप्रैल 2023, 6 जून 2023 व दिनांक 21 सितम्बर 2023 को किये गए आदेश को निरस्त करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को 60 वर्ष की अवस्था तक कार्य करने की अनुमति देने, महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश देने, दिनांक 30 नवम्बर 2023 को बिना किसी कारण शक्ति भवन मुख्यालय से मौखिक रूप से हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस लेने आदि समस्याओं के समाधान हेतु लम्बे समय से प्रयास करने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। संघ द्वारा पावर कारपोरेशन व उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान कर्मचारियों की समस्याओं की तरफ आकृष्ट करने हेतु 11 चरणों में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया जिसके 9 वें चरण में दिनांक 24 दिसम्बर 2023 को प्रदेश के भिन्न-भिन्न जनपदों में मशाल जुलूस निकाला गया।
    
24 दिसम्बर को बदायूं जनपद में शाम 5 बजे से अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मण्डल कार्यालय उसावां रोड से ओवरब्रिज के नीचे से निकल कर स्टेशन रोड से इंदिरा चौक होते हुए गांधी ग्राउंड व लावेला चौक से होते हुए अंबेडकर पार्क (हाथी पार्क) पहुंच कर मशाल जुलूस का समापन हुआ।  कार्यक्रम में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। मशाल जुलूस के अंबेडकर पार्क पहुंचने के बाद विद्युत संविदा कर्मचारियों की समस्याओं का महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट तथा नगर पुलिस क्षेत्राधिकारी बदायूं को सौंपा गया।
    
पावर कारपोरेशन के विभिन्न विभागों में हजारों कर्मचारी रात-दिन काम करते हैं। इनकी मेहनत से ही शहरों से लेकर गांवों तक उजाला फैलता है लेकिन इनके जीवन में ही अंधेरा है। कई बार तो सुरक्षा उपकरणों के अभाव में कर्मचारियों की जीवन लीला ही समाप्त हो जाती है। कई कर्मचारी बिजली के खंभे से गिरकर शहतूत बन जाते हैं। उनके खून के धब्बे कर्मचारियों के दिलोदिमाग में अंकित हैं।
    
इतने कठिन और आवश्यक कार्य को कर्मचारी पूरी शिद्दत के साथ करते हैं लेकिन उन्हें पूरा मेहनताना भी नहीं मिलता। यहां आउट सोर्स में दो श्रेणियां हैं कर्मचारियों की। कुशल और अकुशल की। कुशल श्रमिकों को लगभग 11,000 रुपए तथा अकुशल श्रमिकों को लगभग 9000 रुपए वेतन मिलता है। 
    
कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन से भी कम वेतन मिलता है। संघर्ष की मुख्य मांग है कि समान कार्य का समान वेतन लागू किया जाए और सभी को स्थायी किया जाए। लेकिन ये सब होने के बजाए कर्मचारियों का शोषण-उत्पीड़न और भी तीव्र किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा उनके साथ लगातार अभद्र व्यवहार यहां तक कि मारपीट तक की घटनाएं होती हैं। जब भी वे अपनी मांगों को उठाते हैं तो उन्हें अनदेखा किया जाता है। मेन पावर सप्लायर कंपनियां, बड़े अधिकारी और सरकार में बैठे लोगों का एक गठजोड़ बन गया है जो मिलकर इन कर्मचारियों को लूट रहा है। यहां मजदूरों और कर्मचारियों की कोई नहीं सुनता। उल्टे संघर्ष के दौरान मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं और नौकरी से निकाल दिया जाता है। इस तरह उनकी जायज मांगों को पूरा करने के बजाए दमन किया जाता है। 
    
उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग के संविदा कर्मचारी तमाम कठिनाइयों के बावजूद संघर्ष कर रहे हैं। पूरे देश में जारी पूंजीवादी लूट और मजदूरों-कर्मचारियों के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट संघर्ष की जरूरत को महसूस किया जा रहा है। यह पूंजीवादी व्यवस्था और इसके संचालक जहां एक ओर सभी सार्वजनिक संस्थानों को पूंजीपतियों के हवाले कर रहे हैं तो दूसरी तरफ मजदूरों-कर्मचारियों को ठेका संविदा की गुलामी में धकेल रहे हैं। इससे बचने के लिए सभी को एकजुट होना होगा। 
        -बदायूं संवाददाता

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