पत्र

न्याय पाने में बाधा बनता पुलिस प्रशासन

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22 सितंबर 2025 की शाम को बवाना औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर 4 के डी ब्लाक के प्लाट नंबर 165 में स्थित एक फैक्टरी के मजदूर (राजेश शाह) की लिफ्ट गिरने से चोट लग जाने से मृत्य

फैक्टरी में अपंग बनते मजदूर

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कानपुर देहात के मोगनी पूरबराया के इंदिरा नगर कालोनी निवासी शीबू कुमार फरीदपुर बरेली में केसरपुर के पास स्थित एल्युमिनियम फैक्टरी में काम करते थे। शीबू कुमार ने बताया कि व

और उन्होंने कुछ नहीं खाया

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उस दिन गुड़गांव से बरेली जाने के लिए टनकपुर एक्सप्रेस का इंतजार कर रहा था। ट्रेन का टाइम रात 10 बजे का था पर ट्रेन 30 मिनट लेट है, की उद्घोषणा बार-बार होते हुए 5 घंटे बाद

जनता के पैसे से छवि चमकाते प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी धूमिल होती छवि चमकाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। पिछले साल गुजरात में भी ऐसी ही एक घटना घटी, जब 7 अक्टूबर 2024 को गुजरात सरकार ने कुछ विज्ञापन

स्पीड पोस्ट

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भीमकाय मशीनों का शोरगुल, धूल और घुटन भरी हवा। सुरक्षा के नाम पर अस्पताल में प्रयोग होने वाला नोज मास्क। शाम तक नाक के भीतर काली लोहा मिश्रित गर्द जम चुकी है। खांसने पर का

किर्बी के मजदूर नेताओं पर लगाये फर्जी मुकदमों का विरोध करो

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हम किर्बी बिल्डिंग सिस्टम्स के सिडकुल हरिद्वार में काम करने वाले श्रमिक हैं। हम फैक्टरी में पिछले लगभग 20 सालों से कार्य कर रहे हैं। हमारी फैक्टरी में स्थायी एवं अस्थायी

तम्बाकू के लती क्रांतिकारियों के नाम एक खत

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आज दिनांक 31 मई तम्बाकू निषेध दिवस है। यह हिन्दुस्तान नामक अखबार में आया है। मैं हिन्दुस्तान नामक दैनिक अखबार का पाठक हूं। इसे पढ़कर मुझे तम्बाकू के बारे में लिखने की कुछ

रिक्तता

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मोहन पूरी ताकत से प्रकाश की उंगलियां दबा रहा है। प्रकाश का हाथ बिल्कुल ढीला है और  उंगलियों में कोई प्रतिरोध नहीं है। ढीली उंगलियों का मांस और उसके भीतर मौजूद हड्डियां आप

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

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शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

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जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

/hindu-fascist-chunav-aayog-and-vidhansabha-chunaav

हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

/imperialism-and-abhijat-workers-class

दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।