एक बार फिर लोकतंत्र और भीड़तंत्र
फासीवादी हमेशा से ही ‘महामानव’ और ‘लघु मानव’ में विश्वास करते रहे हैं। उनका नेता महामानव होता है और लघु मानवों की भीड़ को उसके पीछे चलना होता है। यदि नरेन्द्र मोदी खुद को अजैविक मानते हैं तथा उनके भक्त उन्हें अवतारी पुरुष मानते हैं तो यह अनायास नहीं है। यह फासीवादियों की आम दृष्टि के अनुरूप है।