मजदूर

भारतीय मजदूरों को मौत के मुंह में भेजने की तैयारी

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भारत में बेरोजगारी की भयावहता किसी से छिपी नहीं है। इस भारी बेरोजगारी पर जहां मोदी सरकार आंखें मूंदे बैठी है वहीं विकसित देश इस बेरोजगारी का फायदा उठाने की जुगत में लगे ह

लेबर चौक बनाम डिजिटल लेबर चौक

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लेबर चौक का नाम हर कोई जानता है। यह हर शहर में मिल जाएंगे। जहां मजदूर रोजगार की तलाश में आते हैं। यहां से मजदूरों को दिहाड़ी पर काम करने के लिए ले जाया जाता है और काम खत्म

मजदूरों के पास निरंतर संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं

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हरिद्वार/ किर्बी बिल्डिंग सिस्टम लिमिटेड, सिडकुल हरिद्वार के मजदूरों का संघर्ष जारी है। इस बीच 9-10 महीनों से लगातार संघर्ष में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। प्

न्यूजीलैण्ड में महा हड़ताल

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23 अक्टूबर को न्यूजीलैण्ड में एक महाहड़ताल का आयोजन किया गया। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के लगभग 1,10,000 लोग शामिल हुए। हड़ताली लोगों में 60 हजार शिक्षक, 30 हजार नर्सें, 5 हज

पी एफ नियमों में आशंकित करने वाले बदलाव

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने ईपीएफ में कर्मचारियों के जमा पैसों के निकासी के नियमों में कुछ ऐसे बदलाव किये हैं, जिससे करीब 7 करोड़ ईपीएफ अंशधारकों में चिंता और ब

गुजरात में 12 घंटे कार्य के प्रावधान का विधेयक पारित

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गुजरात सरकार ने दिनांक 10 सितम्बर 2025 को गुजरात विधानसभा ने कारखाना अधिनियम 1948 में संशोधन करने वाले एक विधेयक को पारित कर दिया। संशोधन किये गए विधेयक में गुजरात सरकार

गरीब होती जनता और अमीर होते जनप्रतिनिधि

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मौजूदा कुछ वर्षों में श्रीलंका, बांग्लादेश और फिर अभी नेपाल में यह देखने में आया है कि जनता का आक्रोश अपने जनप्रतिनिधियों पर बहुत तीव्र ढंग से अभिव्यक्त हुआ है। नेताओं के

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?