पिछले दस दिनों में बिहार में पुल गिरने की 5 घटनाएं हो चुकी हैं। जनता के टैक्सों से इकट्ठा सरकारी पैसे पुलों के साथ बह गये। जनता विकास की राह देखती है लेकिन सारा विकास पानी में चला जाता है। विकास के लिए तरसती जनता की आंखें नेता, अधिकारी, ठेकेदारों का ही विकास होते हुए देखती हैं। किसी सड़क, पुल, नहर आदि के निर्माण में यही भ्रष्ट नेता, अधिकारी, ठेकेदार ही मौज मारते हैं। ये अपने ओहदे, ताकत के हिसाब से अपनी तिजोरियां भरते हैं। पूंजीवाद में नेता, अधिकारी का जनता और जनता के पैसे के साथ यही सरोकार है।