विविध

ओसामू सुजुकी को पद्म विभूषण-मजदूरों को लाठी-गोली

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भारत सरकार ने वर्ष 2025 के लिए सात लोगों को पद्म विभूषण देने का एलान किया है। इन सात लोगों में सुजुकी मोटर कम्पनी के पूर्व चेयरमैन ओसामू सुजुकी का भी नाम है। राष्ट्रपति द

केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के बारे में दो शब्द

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सभी साथियों व पाठकों को लाल सलाम। साथियों मेरा नाम पूरन है। मैं गुड़गांव में रहता हूं। साथियो मैं बात कर रहा हूं आज के केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के बारे में। साथियो जब मैं

बिजली के निजीकरण के खिलाफ साझा विरोध प्रदर्शन

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उत्तर प्रदेश सरकार बिजली के निजीकरण के लिए लगातार प्रयासरत है। विद्युतकर्मी लगातार इसके खिलाफ जगह-जगह संघर्ष कर रहे हैं। उनके संघर्ष के समर्थन में और बिजली के निजीकरण के

आंध्र प्रदेश : काम के घण्टे 10 करने का फरमान

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आंध्र प्रदेश की चंद्र बाबू नायडू सरकार प्रदेश में निवेश जुटाने और पूंजीपतियों को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसी कड़ी में उसने प्राइवेट सेक्टर में मजदू

ऊष्मा और नमी

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एक तरफ दस फुट ऊंची दीवार, और दूसरी तरफ इस्पात फैक्टरी और एक तरफ दलित मजदूर बस्ती। नीला आसमान अक्सर शाम को धूल के बादलों से रंग बदल लेता। फैक्टरियों से निकलने वाले सीवर और

स्पेन में आंदोलनरत हजारों धातु मजदूर

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आजकल स्पेन में हजारों धातु मजदूर आंदोलनरत हैं। कहीं धातु मजदूर हड़ताल पर हैं तो कहीं हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। धातु मजदूरों की यूनियन मजदूरों के संघर्ष को रोकने,

परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों की दुर्दशा

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बरेली के परसा खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक इलेक्ट्रिकल फैक्टरी के मजदूरों से बातचीत करने पर पता चलता है कि मालिक मजदूरों के खिलाफ क्या-क्या तिकड़में करता है। 
    

सी एंड एस इलेक्ट्रिक लिमिटेड (सीमेंस ग्रुप) के मजदूरों की दशा

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हरिद्वार/ सिडकुल में स्थित सी एंड एस इलेक्ट्रिक लिमिटेड हैवी पावर प्लांट के उत्पाद (स्विच, बिजली बोर्ड, आदि) बनाती है। 2006 में सी एंड एस का एक बीटी प्ला

मारूति प्रबंधन क्या कवच बदलकर वर्ग संघर्ष को रोक पाएगा?

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गुड़गांव/ मानेसर मारूति में 18 जुलाई 2012 में हुए मारूति काण्ड के पीछे असल कारण यह था कि मारूति यूनियन ने ठेका प्रथा खत्म करने तथा सभी ठेका मजदूरों को स्थ

आलेख

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।