हल्द्वानी हिंसा के पीड़ितों की मदद के लिए आगे आयें !

8 फरवरी को उत्तराखण्ड के हल्द्वानी शहर के बनभूलपुरा इलाके में हुई हिंसा की असलियत क्रमशः परत दर परत खुलकर सामने आ रही है। जिससे यह साफ नजर आ रहा है कि 8 फरवरी की घटना के लिए शासन-प्रशासन की मनमाने ढंग से बगैर तैयारी अतिक्रमण हटाने की कवायद, नगर निगम अधिकारी की साम्प्रदायिक बयानबाजी ने टकराव की स्थिति पैदा की। ऐसे में देखते ही गोली मारने के आदेश ने आग में घी का काम किया और कई लोग मारे गये। 60-70 हजार की आबादी वाले बनभूलपुरा को अगले 15 दिन कर्फ्यू में कैद कर दिया गया। 
    
बनभूलपुरा की बड़ी आबादी जो रोज कमाने रोज खाने वाली है, के लिए यह कर्फ्यू भुखमरी के हालात पैदा करने वाला बन गया। रही सही कसर अगले हफ्ते भर चले पुलिसिया दमन चक्र ने पूरी कर दी। बगैर ठोस सबूतों के किसी भी घर में घुस जाना, महिलाओं-बच्चों-पुरुषों को बेरहमी से पीटना, घर का टी वी, फ्रिज हर सामान तोड़ डालना, पुरुषों को उठा कर ले जाना यह सब बनभूलपुरा के सैकड़ों घरों में पुलिस द्वारा की गयी बर्बरता को दिखलाते हैं। 80 से अधिक लोगों को गम्भीर धाराओं में जेल में ठूंसा जा चुका है। 
    
इस पर भी प्रदेश के मुखिया से लेकर स्थानीय प्रशासन-मीडिया तक हिंसा के लिए सारा दोष बनभूलपुरा के मुस्लिम अल्पसंख्यकों के मत्थे मढ़ने में जुटे रहे हैं। तरह-तरह से मुस्लिम समुदाय को कोसने के शासन-प्रशासन के अभियान का परिणाम जहां एक ओर साम्प्रदायिक वैमनस्य को पैदा कर रहा है वहीं दूसरी ओर मुस्लिम मेहनतकशों को भय व असुरक्षा-दहशत में धकेल रहा है। जगह-जगह मुस्लिम किरायेदारों को संघी लम्पटों द्वारा मकान-दुकान खाली करने को धमकाया जा रहा है। 
    
प्रदेश की धामी सरकार उत्तराखण्ड के परस्पर सौहार्दपूर्ण वातावरण को अपने कारनामों से साम्प्रदायिक वैमनस्य की आग में धकेलने को उतारू है। उसके मनमाने अतिक्रमण हटाओ अभियान की लपेट में अगर आज हल्द्वानी के बनभूलपुरा के लोग आये हैं तो कल को तमाम दूसरे लोग जो सालों से यहां बसे हुए हैं, भी निशाने पर आयेंगे। 
    
ऐसे में हल्द्वानी हिंसा के बहाने प्रदेश में साम्प्रदायिक उन्माद का वातावरण बनाने की सरकार और भाजपा की कोशिशों के खिलाफ खड़े होना वक्त की जरूरत है। उत्तराखण्ड में विभिन्न जाति-धर्मों के लोग वर्षों से मेलजोल से रहते आये हैं। इस मेलजोल, सौहार्द को बनाये रखने, मजबूत बनाने की जरूरत है। 
    
आज बनभूलपुरा के गरीब मेहनतकश पुलिसिया बर्बरता-गिरफ्तारी के साथ रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं। जरूरत है कि सभी अमन पसंद, न्यायप्रिय लोग उनकी मदद के लिए आगे आयें। हमारी मदद भी परस्पर सौहार्दपूर्ण वातावरण कायम करने का जरिया बनेगी। 
    
नागरिक ‘पाक्षिक’ सभी पाठकों-शुभेच्छुओं-इंसाफपसंद लोगों का आह्वान करता है कि बनभूलपुरा के पीड़ित लोगों की मदद के लिए आगे आयें। मदद हेतु धनराशि नीचे दिये खाते में जमा कर सकते हैं। 

नामः नागरिक अधिकारों को समर्पित
बैंक का नाम - पंजाब नेशनल बैंक
खाता सं. - 13121012000048
शाखा- हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज (नैनीताल) उत्तराखण्ड
IFSC-PUNB0131210   
    
खाते में राशि जमा कराने वाले साथी इसकी सूचना मो.न. 7500714375 पर भी भेज दें। 
    
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
सम्पादक
नागरिक अधिकारों को समर्पित (पाक्षिक)

आलेख

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

/amerika-aur-china-thyuusidaidsa-phaans

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

/hindu-fascist-chunav-aayog-and-vidhansabha-chunaav

हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

/imperialism-and-abhijat-workers-class

दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।