लास एंजेल्स में आग, 24 लोगों की मौत

आज 21वीं सदी में ज्ञान विज्ञान व तकनीक जिस स्तर पर पहुंच गये हैं वहां किसी आग से दसियों हजार घर एक साथ जलकर खाक हो जाने की घटना हैरान करने वाली है। खासकर यह देखते हुए कि यह आग किसी तीसरी दुनिया के गरीब साधन विहीन देश में नहीं बल्कि विकसित अमेरिका के एक प्रांत में लगी हो, आश्चर्य बढ़ जाता है। पर यही सच है। 
    
अमेरिका के लास एंजेल्स में दो स्थानों ईटन और पैलिसेड्स में लगी आग तेज हवाओं के प्रभाव में सैकड़ों वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैल जाती है। यह आग कुछ ही वक्त में 12 हजार घरों को जला कर खाक कर चुकी थी। यद्यपि ज्यादातर निवासियों को वक्त रहते सुरक्षित इलाके में पहुंचाया जा चुका था पर तब भी आग बुझाने वाले और निवासियों में से अब तक 24 लोगों के मारे जाने की खबरें हैं। आग की भयावहता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि रात-दिन की मशक्कत के बाद भी दोनों स्थानों की आग को महज 15-20 प्रतिशत तक ही नियंत्रित किया जा सका है। और आने वाले दिनों में 130 किमी. प्रति घण्टा की तेज हवाओं का अनुमान कहीं अधिक तबाही ला सकता है। 
    
इस आपदा के शिकार लगभग 1.7 करोड़ लोग हुए हैं। इस आग के चलते लोग लगातार खतरनाक व जहरीली हवा में जीने को मजबूर हैं। करीब 2 लाख लोगों को घरों से विस्थापित किया गया है। लाखों लोग विद्युत सप्लाई से वंचित हो गये हैं। 
    
इस आग के विकराल रूप लेने के पीछे कैलीफोर्निया प्रांत की सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी की नीतियां जिम्मेदार रही हैं। लांस एंजेल्स की मेयर कैरेन बास ने हाल में ही अग्निशमन विभाग के बजट में 4.9 करोड़ डालर की कटौती का प्रस्ताव पेश किया था जबकि पिछले वर्ष 1.76 करोड़ डालर की कटौती की गयी थी। हालत यह है कि अग्निशमन के ज्यादातर कामों को कैदियों द्वारा कराया जाता है जिन्हें इस जान जोखिम में डालने की एवज में नाम मात्र का भुगतान किया जाता है। 
    
संघीय बाइडेन सरकार ने आपातकालीन इंतजामों मसलन मलबा हटाने, अस्थायी आश्रयों की स्थापना आदि के लिए न्यूनतम सहायता खर्च दिया है। पर यह अभी तक आग से हुई लगभग 150 अरब डालर की क्षति के आगे कुछ नहीं है। अमेरिका में जब बैंक डूबते हैं तो सरकार तत्काल उन्हें बचाने के लिए खरबों डालर आवंटित कर देती है। पर जब कामकाजी और मध्यम वर्ग ऐसी आपदाओं का सामना करते हैं तो उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है। जिन घरों में बीमा भी होते हैं उनमें वे ही लोग बीमा कम्पनी से मुआवजा वसूल पाते हैं  जिन पर कानूनी प्रक्रिया में खर्च करने लायक पैसे होते हैं। जाहिर है अमीर लोग ही पर्याप्त मुआवजा हासिल कर पाते हैं। 
    
आग की आपदा की इस घड़ी में जब लाखों लोगों के आश्रय जल कर खाक हो गये हैं। लाखों लोग बेघर हो चुके हैं तब पूंजीवादी मीडिया इस आग की भी किसी वीडियो गेम की तरह कवरेज कर मुनाफा कमाने में जुटा है। लास एंजेल्स में कई हीरो-हीरोइनों के घर भी आग का शिकार हुए हैं। मीडिया उनके जलते घरों का सीधा प्रसारण करने में जुटा है। बाकी आम लोगों की दुःख तकलीफों से उसे कोई सरोकार नहीं है। 
    
इसी लास एंजेल्स में एक ओर लाखों लोग वर्तमान समय में बेघर हैं वहीं दूसरी ओर करीब 93 हजार से ज्यादा लग्जरी घर अमीरजादों के खाली पड़े हैं। इसके अतिरिक्त 22 वर्ग मील से अधिक खाली जगहें इनके कब्जे में बेकार पड़ी हैं। आपदा के मौके पर सरकार आसानी से इन जगहों पर बेघरों को बसा सकती है। पर वह ऐसा नहीं करेगी। 
    
आग की रोकथाम के लिए सेना व पूरे देश की मशीनरी लगा जल्द काबू पाया जा सकता है पर सरकार इतने व्यापक कदमों के लिए तैयार नहीं है। लास एंजेल्स की आपदा प्रकृति जन्य नहीं है यह मानवीय जरूरतें पूरी करने में लुटेरी पूंजीवादी व्यवस्था की असफलता का प्रमाण है। 

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