मणिपुर हिंसा : शासकों द्वारा लगायी आग अब बेकाबू हो चुकी है !

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बीते लगभग सवा वर्ष से अधिक समय से सुलग रहे मणिपुर में नये सिरे से हिंसा भड़कने की खबरें आ रही हैं। इस बार हिंसा का केन्द्र जिरिबाम जिला बना है। ताजा सिरे से भड़की हिंसा की शुरूआत 7 नवम्बर को तब हुई जब जिरिबाम के एक गांव में मैतेई समुदाय की भीड़ ने हमला बोल दिया। गांव के ज्यादातर लोग जंगल भाग गये पर एक 38 वर्षीय हमार आदिवासी महिला पैर में गोली लगने के चलते फंस गयी। मैतेई समूह ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार कर उसे जिन्दा जला दिया। इसके साथ ही गांव के ढेरों घरों को आग लगा दी। इस हत्याकांड का आरोप मैतेई कट्टरपंथी समूह अरम्बाई टेंगोल पर लगा। 
    
इस क्रूर हत्याकाण्ड से आदिवासी कूकी-जो और हमार समूहों में गुस्सा भड़क उठा। पूरे राज्य के पहाड़ी इलाकों में प्रदर्शनों की लहर पैदा हो गयी। कुकी-जो समुदाय की महिलायें अपनी सुरक्षा की अनदेखी के लिए जगह-जगह सुरक्षा बलों व अधिकारियों को दोषी ठहराने लगीं। प्रदर्शनकारी कुकी महिला संघ अब पहाड़ी इलाकों में विधानसभा के साथ अलग केन्द्र शासित प्रदेश की मांग करने लगा। उनका गुस्सा सीआरपीएफ, असम राइफल्स के साथ स्थानीय प्रशासन के खिलाफ भी था जो उन्हें मैतेई हमलावारों से सुरक्षा दिलाने में विफल रहा था।
    
7 नवम्बर की इस घटना के एक दिन बाद विष्णुपर जिले के एक गांव पर हमला होने व कुकी-जो हथियारबंद हमलावरों के हमले में एक महिला के मारे जाने की खबर आयी। इस हमले में मारी गयी महिला के शव को स्थानीय लोगों ने बीएसएफ चौकी पर रख विरोध प्रदर्शन किया और कार्यवाही की मांग की। 
    
11 नवम्बर को 11 हमार आदिवासी लोग सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में मारे गये। जिरिबाम जिले में घटी इस घटना के मामले में सीआरपीएफ का कहना था कि उग्रवादी समूह ने एक पुलिस स्टेशन व सीआरपीएफ कैम्प पर हमला किया जहां हुई मुठभेड़ में 11 आतंकवादी मारे गये। हालांकि शीघ्र ही कुकी-जो संगठनों ने आरोप लगाया कि मारे गये लोग आतंकवादी नहीं बल्कि ग्रामीण स्वयं सेवक थे जिन्हें मैतेई समर्थक पुलिस व सुरक्षाबलों ने हमला कर मार गिराया। इस हत्याकांड के विरोध में 12 नवम्बर को दिन भर के बंद की भी घोषणा की गयी।
    
इस तरह जिरिबाम जिला हिंसा का नया केन्द्र बन चुका है। मणिपुर में बीते सवा वर्ष से जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल राज्य की भाजपा सरकार ने मणिपुर को अपनी हिन्दुत्व की राजनीति की चपेट में लाने के लिए जो कदम उठाये वे ही आज दावानल का रूप लेकर सामने आ रहे हैं। मणिपुर में इम्फाल घाटी में मैतेई समुदाय के लोग व पहाड़ी इलाकों में कुकी-जो आदिवासी रहते आये हैं। कुकी समुदाय ईसाई बहुल है। ऐसे में मैतेई लोगों में संघ-भाजपा ने हिन्दुत्व की राजनीति शुरू करते हुए उन्हें कुकी समुदाय के खिलाफ भड़काना शुरू किया। मैतेई लोगों में कट्टरपंथी संगठन पैदा किये गये। अभी तक सुरक्षा बलों की हिंसा व आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए लड़ रहे मणिपुर के समुदायों को परस्पर हिंसा की आग तक पहुंचा दिया गया। यह हिंसा शुरू हो सके इसके लिए स्थानीय घाटी पुलिस ने न केवल मैतेई संगठनों का समर्थन शुरू कर दिया बल्कि उन्हें हथियार भी मुहैय्या कराये। राज्य सरकार ने कुकी लोगों पर नशा का व्यापार का आरोप लगा उनके खिलाफ अभियान भी छेड़ दिया। परिणाम यह हुआ कि मैतेई व कुकी-जो समुदायों के बीच नफरत की खाई चौड़ी होती गयी और बीते वर्ष मई से यह एक तरह के ऐसे संघर्ष में तब्दील हो गयी जो आज तक जारी है। 
    
बीते वर्ष शुरू हुई इस हिंसा में कुकी-जो समुदाय को जहां इम्फाल घाटी छोड़ असम राइफल्स की सुरक्षा में कैम्पों में शरण लेनी पड़ी वहीं मैतेई लोगों को पहाड़ी इलाकों से पलायन करना पड़ा। आज भी 60 हजार से अधिक कुकी-जो लोग कैम्पों में रहने को अभिशप्त हैं। गत वर्ष से जारी हिंसा में लगभग 250 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें ज्यादातर कुकी-जो समुदाय के हैं। 
    
संघ-भाजपा की नीति वर्चस्व वाले मैतेई समुदाय को अपने प्रभाव में लेने व उन्हें हिन्दुत्व का कार्यकर्ता बनाने की थी। पर यह नीति इस स्थिति तक पहुंच गयी है कि राज्य के दो समुदाय एक-दूसरे से एकदम कटे इलाकों में जीने लगे हैं और एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गयी है कि कुकी-जो समुदाय अलग केन्द्र शासित राज्य की मांग करने लगा है। 
    
पर हिन्दुत्व की राजनीति में लीन संघ-भाजपा इस लगातार बढ़ती हिंसा से न केवल बेपरवाह है बल्कि इस हिंसा को और भड़काने के लिए मैतेई समूहों को और खाद-पानी मुहैय्या करा रही है। कुकी-जो आदिवासियों को आतंकियों की तरह प्रचारित कर उनका दमन कर रही है। 
    
इस हिंसा में ढेरों आदिवासी महिलायें हिन्दुत्व का पाठ पढ़े मैतेइयों के द्वारा सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई हैं। कभी असम राइफल्स के जुल्मों के खिलाफ संघर्ष करने वाले समुदाय के लोग आज स्वयं बलात्कार में लिप्त हो गये हैं। प्रधानमंत्री मोदी का मणिपुर पर मौन बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया का चक्कर काटने वाले मोदी को मणिपुर जाने का वक्त नहीं मिल रहा है।
    
मणिपुर : फासीवादी भाजपा की प्रयोगशाला में संघी सरकार द्वारा जो आग लगायी गयी है वो बेकाबू होती जा रही है। इस आग में आपस में संघर्षरत समूह आग के लिए अभी भले ही एक-दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं पर शीघ्र ही वे असली आग लगाने वालों को पहचान जायेंगे और फिर यह आग इसे लगाने वालों को ही भस्म कर डालेगी।   

 

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