बनभूलपुरा हिंसा पर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट : शासन-प्रशासन की भूमिका कटघरे में रामनगर (नैनीताल) में प्रेस वार्ता

कौमी एकता मंच द्वारा आज रामनगर के ग्रीन वैली रेस्टॉरेंट में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर बनभूलपुरा हिंसा : आखिर दोषी कौन ? शीर्षक से एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट जारी की।

इस दौरान कौमी एकता मंच की संयोजिका रजनी जोशी ने पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुये कहा कि 8 फरवरी को बनभूलपुरा में हुई हिंसा प्रदेश सरकार की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति एवं प्रशासनिक नाकामी का परिणाम थी। उन्होंने शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुये सवाल खड़े किये कि जब 3 फ़रवरी की रात ही प्रशासन द्वारा मदरसा और मस्जिद को सील कर अपने कब्जे में लिया जा चुका था तो फिर ऐसी क्या आपात स्थिति थी कि  8 फ़रवरी को भारी पुलिस बल लगाकर बुल्डोजर से सम्बन्धित निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया; आखिर जब बनभूलपुरा का पूरा मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है तो प्रशासन ने उसकी अवज्ञा क्यों की; प्रशासन ने तोड़-फोड़ की कार्यवाही करने से पहले स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों एवं धर्मगुरुओं को अपने विश्वास में क्यों नहीं लिया; आखिर क्यों प्रशासन ने ख़ुफ़िया विभाग की रिपोर्टों को नजरअंदाज कर तोड़-फोड़ की कार्यवाही सुबह के बजाय शाम को की ? 
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही है। 7 लोग मारे गये हैं और अनेकों घायल हुये हैं, जिनमें अधिकांश की प्राथमिकी तक भी दर्ज नहीं हुई है। अत: सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में पूरे प्रकरण की जांच कराई जाये, दोषी अधिकारियों को सजा दी जाये एवं पुलिस की गोलीबारी में मारे गये लोगों के परिजनों को 25 लाख रु एवं घायलों को 5 लाख रु मुआवजा दिया जाये।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी ने कहा कि कर्फ्यू के दौरान पुलिस ने बनभूलपुरा में आतंक का राज कायम किया। पुलिस दरवाजे तोड़कर स्थानीय लोगों के घरों में घुसी और उसने लड़कों, महिलाओं-बुजुर्गों सभी को लाठियों से बुरी तरह पीटा और घरों में भारी तोड़-फोड़ की। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि आखिर किसके इशारे पर कर्फ्यू के दौरान स्थानीय लोगों का इस तरह दमन किया गया ? 
इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला ने कहा कि 8 फ़रवरी की इस घटना को घटे साढ़े तीन महीने से भी अधिक समय हो चुका है, लेकिन पुलिस अभी तक भी चार्ज शीट पेश करने में असफल रही है। दूसरी ओर गिरफ्तार लोगों पर यू ए पी ए जैसी धाराएं लगाकर एक पूरे समुदाय को आतंकित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पुलिस तत्काल चार्जशीट दाखिल करे।

भाकपा (माले) से के.के बोरा ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की सत्ता पर काबिज सांप्रदायिक ताकतें प्रदेश की फिजा को बिगाड़ रही हैं, लेकिन प्रदेश की जनता इनके नापाक इरादों को कामयाब नहीं होने देगी।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन के चन्दन ने कहा कि कौमी एकता मंच ने पुलिस-प्रशासन का भी पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने समय नहीं दिया। प्रशासनिक अधिकारियों का यह व्यवहार उन्हें कटघरे में खड़ा करता है।

इसके अलावा प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की शीला शर्मा व  तुलसी छिम्वाल, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि एवं उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के आसिफ और सुनील ने भी पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया।
 

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