काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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9 अगस्त, 1925 के दिन लखनऊ के निकट काकोरी में क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूट लिया था। इतिहास में यह घटना काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम से प्रसिद्ध है जिसने कि अंग्रेजों की सत्ता को सीधी चुनौती दी थी। इससे बौखलाये ब्रिटिश उपनिवेशवादियों ने भारी दमन, गिरफ्तारियों और मुकदमे के नाटक के उपरान्त इस घटना में शामिल रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिडी को दिसम्बर, 1927 में फांसी दे दी थी। 9 अगस्त, 2025 को इसी काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल पूरे होने पर क्रांतिकारी संगठनों द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर अपनी क्रांतिकारी विरासत को याद किया गया और शहीद क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
    
इस मौके पर एक व्यापक अभियान सेंटर आफ स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस (सी एस टी यू), कलेक्टिव, क्रांतिकारी नौजवान सभा और जन मुक्ति परिषद द्वारा संचालित किया गया, जिसमें मजदूर संघर्ष संगठन के साथी भी शामिल रहे। यह अभियान 1 अगस्त को भगतसिंह समाधि स्थल, भारत-पाकिस्तान सीमा हुसैनाबाद, फिरोजपुर (पंजाब) से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर व अंततः 9 अगस्त को काकोरी व लखनऊ में आकर इंकलाबी जोश के साथ सम्पन्न हुआ।
    
अभियान के दौरान शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) में अशफाक उल्ला खान की मजार पर हुई सभा में उनके पौत्र अशफाक उल्ला खान ने सुधीर विधार्थी द्वारा लिखित ‘‘काकोरी का यादनामा : साझी शहादत साझी विरासत’’ तथा ‘‘हमारी विरासत : शहीदों की कलम से कुछ नजमें’’ का लोकार्पण किया। दिल्ली में हुई संगोष्ठी में वैज्ञानिक व शायर गौहर रजा भी शामिल हुये। पूरे अभियान के दौरान अलग-अलग जगहों पर सभा-जुलूसों व गोष्ठियों में विभिन्न जन संगठनों के कार्यकर्ताओं, प्रगतिशील बुद्धिजीवियों एवं छात्रों-युवाओं व मजदूरों ने भी उत्साह के साथ भागीदारी की।
    
काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल पूरे होने पर 9 अगस्त को रुद्रपुर (उत्तराखंड) के शहीद अशफाक उल्ला खान पार्क में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के विरुद्ध भारत की जनता द्वारा लड़े गये स्वतंत्रता संग्राम में काकोरी ट्रेन एक्शन का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) एवं भाकपा (माले) के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की।
    
इस मौके पर हल्द्वानी में 9 अगस्त को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन एवं परिवर्तनकामी छात्र संगठन द्वारा प्रभात फेरी निकालकर अमर शहीदों को याद किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि आजाद भारत में आज भी जाति-धर्म के नाम पर जनता के बीच फूट डाली जाती है। बड़े पूंजीपति आज भी देश की मजदूर-मेहनतकश जनता को लूट रहे हैं।
    
काकोरी ट्रेन एक्शन की विरासत को याद करते हुये बरेली में काकोरी शहीद यादगार कमेटी द्वारा कमिश्नरी स्थित अमर शहीद स्तम्भ पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के आंदोलन के दौरान इस घटना ने आम जनता के बीच जबरदस्त उत्साह व ऊर्जा का संचार किया था। हमें काकोरी के शहीदों से प्रेरणा लेते हुये आज भी अमेरिकी साम्राज्यवादियों के नेतृत्व में जारी साम्राज्यवादी लूट-खसोट के विरुद्ध संघर्ष करने की जरूरत है। कार्यक्रम में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, पी यू सी एल, आटो-रिक्शा टेम्पो चालक वेलफेयर एसोसिएशन एवं क्रांतिकारी किसान मंच के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। काकोरी शहीद यादगार कमेटी  के तत्वाधान में 13 अगस्त को ‘कारपोरेट भारत छोड़ो’ की मांग को लेकर ‘साम्राज्यवाद विरोधी मार्च’ निकाला गया। जुलूस सेठ दामोदर स्वरूप पार्क से अय्यूब खां चौराहे तक गया। तत्पश्चात साम्राज्यवादी सरगना अमेरिकी साम्राज्यवाद के मुखिया ट्रंप का पुतला दहन किया गया।
    
इस मौके पर मऊ में इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा मजदूरों की बैठक की गई। बैठक में आजादी में क्रांतिकारियों की भूमिका और काकोरी ट्रेन एक्शन पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा बलिया में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा जुलूस निकाला गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि काकोरी के शहीद न सिर्फ साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष के प्रतीक हैं अपितु हिंदू-मुस्लिम एकता के भी प्रतीक हैं।                 -विशेष संवाददाता

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