अर्जेण्टीना में विभिन्न क्षेत्रों के मजदूरों-कर्मचारियों की हड़ताल
अर्जेण्टीना में राष्ट्रपति जेवियर मेलेई की नीतियों के खिलाफ आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। जनवरी में आम हड़ताल के बाद फरवरी में विभिन्न क्षेत्रों के मजदूर-कर्मचारी 24-24 घंटे की
अर्जेण्टीना में राष्ट्रपति जेवियर मेलेई की नीतियों के खिलाफ आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। जनवरी में आम हड़ताल के बाद फरवरी में विभिन्न क्षेत्रों के मजदूर-कर्मचारी 24-24 घंटे की
मिश्र के गजल अल-महल्ला के 7 हजार मजदूर 22 फरवरी से हड़ताल पर चले गये। ये मजदूर बेहतर वेतन और बोनस की मांग कर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की इस विशाल कम्पनी में कताई, टेक्सट
8 दिसम्बर से कनाडा के क्यूबेक प्रांत के लाखों कर्मचारी एक सप्ताह की हड़ताल पर हैं। इनमें अध्यापक, स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारी के अतिरिक्त अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मच
बांग्लादेश में रेडीमेड गारमेंट बनाने वाले मजदूरों ने बीते एक माह से अधिक लम्बे संघर्ष से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। बांग्लादेश में रेडीमेड गारमेंट क्षेत्र में लगभग 44 ल
अमेरिका में लम्बे समय से चल रही आटो मजदूरों की हड़ताल को यूनियन नेतृत्व क्रमशः समाप्त करने की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी आटो मजदूरां का ट्रेड यूनियन केन्द्र यूनाइटेड आटो वर्कर्
अमेरिका में 15 सितम्बर से शुरू हुई ऑटो मजदूरों की हड़ताल जारी है। वाल्वो के स्वामित्व वाली कम्पनी मैक ट्रक के पेन्सिलवेनिया, मेरीलैंड और फ्लोरिडा के 4000 मजदूर भी 9 अक्टूब
15 सितम्बर को अमेरिका की तीन बड़ी कंपनियों जनरल मोटर्स, फोर्ड और स्टेलेन्टिस (पूर्व में क्रिसलर) के 13,000 मजदूर अपनी यूनियन यूनाइटेड आटो वर्कर (यू ए डब्ल्यू) के नेतृत्व म
ब्राजील की राजधानी साओ पाउलो में 11 अगस्त को छात्रों और अध्यापकों ने लूला सरकार द्वारा शिक्षा बजट में की गयी कटौती के खिलाफ प्रदर्शन किया। लूला सरकार ने जुलाई के अंत में
ओ ई सी डी द्वारा हाल में रोजगार संदर्भी रिपोर्ट जारी की गयी। इस रिपोर्ट ने बढ़ती महंगाई के पीछे बढ़ती मजदूरी का तर्क देने वाले पूंजीवादी अर्थशास्त्रियों की बोलती बंद कर दी
13 जुलाई से ब्रिटिश जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को न माने जाने के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है। डॉक्टरों की मांग तनख्वाह में 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि की है जबकि प्रधानम
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?