स्थाई श्रमिकों की छंटनी हेतु वी आर एस नोटिस

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मुंजाल शोवा कम्पनी, गुड़गांव

गुड़गांव/ दिनांक 20 अगस्त 2025 को मुन्जाल शोवा कम्पनी, मानेसर प्रबंधन ने स्थाई श्रमिकों की छंटनी करने के उद्देश्य से वी.आर.एस. का नोटिस लगाया है। आपको बता दें कि गुड़गांव में मुन्जाल शोवा कम्पनी के दो प्लांट हैं। एक प्लांट गुड़गांव के उद्योग विहार व एक प्लांट मानेसर के सैक्टर-3 में स्थित है। मुन्जाल शोवा में मुख्यतः हीरो व होण्डा बाइक के लिए शॉकर बनते हैं। आपको यह भी बता दें कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान मुन्जाल शोवा के गुड़गांव प्लांट में भी इसी तरह स्थाई श्रमिकों के लिए वी.आर.एस. नोटिस लगाया गया था और वर्ष 2021 में मुन्जाल शोवा प्रबंधन ने जबरदस्ती सभी स्थाई श्रमिकों को वी.आर.एस. दे दिया था। 

मुन्जाल शोवा मानेसर प्लांट में दिनांक 20 अगस्त 2025 को प्रबंधन वी.आर.एस. का नोटिस लगाता है। श्रमिकों से मिली जानकारी के अनुसार प्रबंधन ने यह वी.आर.एस. का नोटिस यूनियन से सहमति बनाकर लगाया है। मुन्जाल शोवा के इस प्लांट में मजदूरों ने अपनी यूनियन बनाई हुई है। यह यूनियन केन्द्रीय ट्रेड यूनियन सेन्टर, एटक से सम्बद्ध है। मुन्जाल शोवा के इस प्लांट में इस समय लगभग 450 स्थाई श्रमिक व 500-600 ठेके के श्रमिक कार्यरत हैं। श्रमिकों से मिली जानकारी के अनुसार मुन्जाल शोवा प्रबंधन ने वी.आर.एस. का नोटिस लगाने से पहले यूनियन को बताया था कि फैक्टरी में स्थाई श्रमिकों में कई श्रमिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पर हैं। प्रबंधन के इस तर्क के आगे यूनियन समर्पण कर देती है और प्रबंधन सभी श्रमिकों के लिए वी.आर.एस. का नोटिस लगा देती है। श्रमिकों से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक 100 से ऊपर स्थाई श्रमिक वी.आर.एस. लेकर जा चुके हैं। 

मुन्जाल शोवा का फर्जी दस्तावेजों के नाम पर लगाया गया यह वी.आर.एस. का नोटिस साफ तौर पर दिखा रहा है कि प्रबंधन अब थोड़े से स्थाई श्रमिकों को भी रखने के लिए तैयार नहीं है और वहीं दूसरी तरफ यूनियन भी प्रबंधन की इस छिपी छंटनी का विरोध करने के स्थान पर वर्ग सहयोग की भूमिका अदा कर वी.आर.एस. दिलवा कर प्रबंधन का सहयोग कर रही है। इन श्रमिकों को कम्पनी में कार्य करते हुए 15 वर्षों से अधिक का समय हो गया है। प्रबंधन का यह हमला दिखा रहा है कि ट्रेड यूनियनें आज मालिकों के आगे बिलकुल समर्पण कर चुकी हैं। उनको पता है कि यह वी.आर.एस. का नोटिस नहीं बल्कि प्रबंधन की सम्पूर्ण छंटनी का एलान है।

गुड़गांव में फर्जी दस्तावेजों का हवाला देकर लगभग एक दर्जन फैक्टरियों का प्रबंधन श्रमिकों की छंटनी कर चुका है। गुड़गांव में स्थाई श्रमिकों की छिपी छंटनी करने का यह तरीका काफी चर्चा में रहा है बेलसोनिका के मजदूरों ने वहां के प्रबंधन की इसी प्रकार की छंटनी का विरोध किया था। पर प्रबंधन अपने षड्यंत्र में सफल रहा था। उसके बाद कई फैक्टरियों का प्रबंधन इस प्रकार वी.आर.एस. देकर छंटनी करने में सफल रहा है। 

‘‘यूनियन तो केवल स्थाई श्रमिकों की होती है’’ यह कथन प्रायः हर ट्रेड यूनियन बोलती है। यूनियन बनाते समय तो फैक्टरी के सभी मजदूर- स्थाई, ठेका, अस्थाई इत्यादि संघर्ष करते हैं लेकिन यूनियन बनने के बाद प्रबंधन जब यूनियन प्रतिनिधियों से बात करते हैं और बोलते हैं कि ‘‘यूनियन तो स्थाई श्रमिकों की होती है’’, इसलिए आप केवल स्थाई श्रमिकों की मांगों पर बात करो। प्रबंधन का यह तर्क उसके बाद यूनियनों का कथन भी बन जाता है और कुछ समय बाद जब स्थाई श्रमिकों पर छंटनी का हमला होता है तो वह स्थाई मजदूर अपने आप को अकेला महसूस करते हैं। अपने कार्यस्थल पर अपने अस्थाई मजदूर साथी को वह यह बोलने की नैतिक हिम्मत तक नहीं कर पाता कि प्रबंधन के इस छंटनी के हमले का अपनी वर्गीय एकता से हम मिलकर प्रतिरोध करें। क्योंकि उस यूनियन ने वर्ग संघर्ष का रास्ता छोड़कर वर्ग सहयोग का रास्ता अपनाकर अपनी वर्गीय एकता को आगे बढ़ाने के रास्ते को तिलाजंलि दे दी थी। 

आज जब मजदूर वर्ग पर मोदी सरकार ने घोर मजदूर विरोधी 4 लेबर कोड्स का हमला बोला है तो केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों से लेकर ज्यादातर फैक्टरी यूनियनें आज रक्षात्मक ही नहीं बल्कि समर्पण कर रही हैं। पुराने श्रम कानूनों को बचाने के लिए भी वर्गीय एकता बनाकर ही संघर्ष लड़ा जा सकता है। वर्गीय एकता बनाकर लड़ने की वर्गीय राजनीति को बहुत लम्बे समय पहले केन्द्रीय ट्रेड यूनियनें त्याग चुकी हैं। जिसका परिणाम है कि जब मजदूरों पर लेबर कोड्स का हमला बोलकर उन्हें 100 साल पीछे की गुलामी में  धकेला जा रहा है, जब प्रबंधन छंटनी का हमला बोल रहा है तब इन ट्रेड यूनियन नेताओं के मुंह से समर्पण के यह शब्द निकल रहे हैं कि ‘‘जो मिल रहा है वह चुपचाप ले लो’’। रिपोर्ट लिखे जाने तक मुन्जाल शोवा के किसी ट्रेड यूनियन नेता ने इस वी.आर.एस. नोटिस को सार्वजनिक नहीं किया है और न ही एटक, जो इसे अपने से सम्बद्ध किये हुए है, ने इस वी.आर.एस. की छंटनी के खिलाफ कोई हो-हल्ला मचाया है। इसलिए आज जो मजदूर वी.आर.एस. लेकर जा रहा है तो वह अपने नेताओं को कोस कर जा रहा है।
ट्रेड यूनियनों की इस स्थिति को आम मजदूर आज महसूस कर रहा है कि मजदूरों को सही नेतृत्व की जरूरत है जो इस निराशा के दौर में आशा पैदा कर सके और मजदूरों पर हो रहे पूंजीपतियों के हमलों के खिलाफ मजदूरों की वर्गीय एकता बनाकर इन हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे सके। 
         -गुड़गांव संवाददाता
 

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