पूछडी में बुल्डोजर का कहर : आंदोलन जारी

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रामनगर/ उत्तराखंड में रामनगर के वन ग्राम पूछडी में 7 दिसम्बर को सरकार ने बुल्डोजर चलाकर 60 से अधिक गरीब मेहनतकशों के घरों को मटियामेट कर डाला। वन विभाग और प्रशासन के अधिकारी बाकी बचे घरों को भी खाली करने का दबाव डाल रहे हैं। बेघर हुये लोग इस कड़कडाती ठंड में खुले आकाश के नीचे आ गये हैं और जो फिलहाल बचे हैं वो आतंक के साये में जी रहे हैं। सभी बेहद आक्रोशित भी हैं। 
    
गौरतलब है कि पूछडी में समाज कल्याण विभाग की निगरानी में वन ग्राम समिति का गठन हो चुका है। इसके अलावा बहुत से लोगों की कोर्ट में सुनवाई जारी है और बहुतों को कोर्ट से स्टे भी मिला हुआ है। वैसे भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि बिना पुनर्वास किसी को न उजाड़ा जाए। इसके बावजूद धामी सरकार ने 6 दिसम्बर को भारी पुलिस फोर्स उतार कर जिले के एस एस पी की कमान में इस तरह पूछडी की नाकेबंदी कर दी मानो दुश्मन देश की सेना से लड़ाई होने जा रही हो। देर रात बिजली काट दी गई और 7 दिसम्बर को तड़के ही बुल्डोजर ने लोगों के आशियानों को ढहाना शुरू कर दिया। जब लोगों ने इसका विरोध किया तो पुलिस ने उन पर लाठियां चलाईं। महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया। बहुत से लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया। 
    
6 दिसम्बर को ही प्रशासन द्वारा सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के नेताओं-कार्यकर्ताओं को शांति भंग की आशंका के नाम पर विभिन्न धाराओं में नोटिस जारी कर डराने की भी कोशिश की गई। खुद एस एस पी मंजूनाथ टी सी द्वारा सख्ती से निपटने की बात की गई। 
    
जब सामाजिक संगठनों ने इस जुल्म अन्याय का प्रतिरोध किया तो पुलिस ने जोर जबरदस्ती अनेकों कार्यकर्ताओं, जिनमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी, मो. आसिफ व सुनील पर्नवाल, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिम्वाल व गीता आर्य, इंकलाबी मजदूर केंद्र के भुवन चंद्र, समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार, गिरीश आर्य व महेश जोशी एवं किसान संघर्ष समिति के ललित उप्रेती, इत्यादि को गिरफ्तार कर लिया और रात 8 बजे जाकर छोड़ा। 
    
बुल्डोजर राज और सरकारी दमन चक्र के विरोध में 8 दिसम्बर को संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले रामनगर में भारी विरोध प्रदर्शन किया गया। जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के अलावा पूछडी के ग्रामीणों ने भी बढ़कर भागीदारी की और सरकार को चेता दिया कि वे इस अत्याचार के समक्ष घुटने नहीं टेकेंगे और अपने अधिकारों के लिये लड़ेंगे। 
    
इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि आज पूरे देश में मेहनतकशों की बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है मानो सरकार ने गरीब जनता के खिलाफ जंग छेड़ दी हो। कहीं बांग्लादेशी घुसपैठिये तो कहीं रोहिंग्या के नाम पर, कभी डेमोग्राफिक चेंज तो कभी विकास के नाम पर सरकार का बुल्डोजर गरीबों को उजाड़ रहा है। उत्तराखंड में भी यही सब चल रहा है। यहां वनों के निवासियों को वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत मिले अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। इस दौरान एक ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया जिसमें उत्तराखंड में सभी जगहों पर बुल्डोजर कार्रवाही को तत्काल रोकने; पूछडी में जिनका घर उजाड़ा गया है उन्हें मुआवजे के साथ उनके पुनर्वास की व्यवस्था करने; जो जहां निवास कर रहा है उसे वहीं मालिकाना हक देने एवं वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत वनों के निवासियों के अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करने इत्यादि मांगें की गईं। 
    
संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा आंदोलन की आगे की रणनीति बनाने हेतु 9 दिसंबर को पूछडी के एकता चौक पर बैठक रखी गई जिसे पुलिस ने नहीं होने दिया। तब फिर व्यापार मंडल कार्यालय पर हुई बैठक में 16 दिसम्बर को जुलूस के साथ वन परिसर पर धरना प्रदर्शन की घोषणा की गई। इस दौरान पूछडी में पानी-बिजली काटे जाने के खिलाफ संबंधित विभागों पर विरोध प्रदर्शन भी किया गया। जन दबाव में पानी-बिजली दोबारा चालू हुआ। 
    
इस बीच 11 दिसम्बर को संयुक्त संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधि मंडल ने पूछडी का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से उनका हाल जाना। लोगों ने प्रतिनिधि मंडल को बताया कि पूछडी में पीढ़ियों से लोग भाईचारे के साथ रह रहे हैं लेकिन सरकार लोगों को हिंदू-मुसलमान और पहाड़ी-देसी के नाम पर बांट रही है, कि बुल्डोजर कार्रवाही में गांव का मंदिर, मस्जिद और मदरसा सभी कुछ ढहा दिया गया। जिनके घर ढहा दिये गये उन्होंने कहा कि इस कड़कडाती ठंड में वे खुले आकाश के नीचे आ गये हैं और अब घर के सामान और बच्चों को लेकर वो कहां जाये? 
    
जो घर अभी टूटने से बचे हुये हैं उन्हें खाली करने के नोटिस दिये जा रहे हैं। ऐसे ही एक घर में जाने पर सौ साल की एक बूढ़ी अम्मा भागीरथी देवी, जिनका पूरा जीवन यहीं बीत गया और जिनके बच्चे और नाती-पोते सबका यहीं जन्म हुआ, ने गुस्से और क्षोभ के साथ प्रतिनिधि मंडल से कहा कि ‘‘क्या हम देश के नागरिक नहीं हैं? अगर होते तो हमें देश में ही रहने की जगह मिलती।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘अगर हिन्दुस्तान में हमारे लिये जगह नहीं है तो पाकिस्तान भेज दो!’’ -रामनगर संवाददाता
 

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