रामनगर/ 5-6 सितंबर 2026 को प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने रामनगर, उत्तराखंड में अपना दो दिवसीय चैथा सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। सम्मेलन में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुड़गांव से प्रमएके की विभिन्न इकाइयों के लगभग 120 प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।
दो दिनों में सम्मेलन ने तीसरे सम्मेलन से चैथे सम्मेलन के बीच देश और दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय परिस्थिति पर रिपोर्ट पारित की। दोनों रिपोर्टों में सम्मेलन ने चर्चा की कि पूरी दुनिया में साम्राज्यवादी ताकतों की आपसी कलह विध्वंसकारी युद्धों को जन्म दे रही है जिसका कहर आम जनता पर टूट रहा है। पूरी दुनिया के मजदूर-मेहनतकश अवाम का जीवन हर तरीके से संकट में आ रहा है और ऐसे में पूंजीपति वर्ग मुनाफे को बढ़ाए रखने के लिए और जनता के संघर्षों को रोकने के लिए फासीवादी ताकतों को प्रश्रय दे रहा है जो नफरत की राजनीति फैला रहे हैं।
पूरी दुनिया की तरह भारत में भी मोदी सरकार पूंजीपति वर्ग की सेवा में आम मजदूर मेहनतकश आबादी पर महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य के संकट का बोझ दिनों दिन बढ़ा रही है। दूसरी तरफ संघ और उसके आनुषंगिक संगठन देश में नफरत की राजनीति फैला रहे हैं। पूरे देश में जनवादी अधिकारों का तेजी से हनन हो रहा है।
महिला स्थिति पर पारित अपनी रिपोर्ट में सम्मेलन ने चर्चा की कि मजदूर वर्ग के एक हिस्से के बतौर महिलाओं के श्रम का पूंजीपति वर्ग द्वारा तीखा शोषण हो रहा है। महिलाओं से रात की पाली में काम करवाने से लेकर असमान वेतन तक हर तरफ मजदूर महिलाएं शोषण का शिकार हो रही हैं साथ ही महिला होने के तौर पर वे तिहरी गुलामी का शिकार हैं। एक तरफ महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है वहीं दूसरी तरफ फासीवादी ताकतें महिलाओं के जीवन के हर पहलू पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही हैं।
इन तमाम परिस्थितियों के साथ पूरी दुनिया में मजदूर-मेहनतकश आबादी संघर्ष कर रही है और अन्याय, शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा रही है।
सम्मेलन ने सांगठनिक रिपोर्ट पारित करते हुए चर्चा की कि संगठन को कार्यकर्ता निर्माण पर जोर देते हुए समाज में महिलाओं के साथ-साथ पूरे मजदूर वर्ग के संघर्षों में भागीदारी करना होगा।
सम्मेलन ने शहीदों को श्रद्धांजलि, बढ़ते हिंदू फासीवाद के खतरे, न्यायालय द्वारा महिला विरोधी फैसले, नारी शक्ति वंदन विधेयक, साम्राज्यवादी युद्धों के खिलाफ, महंगाई के विरोध में, मजदूर उभार के समर्थन में तथा छात्र-युवा उभार के समर्थन में प्रस्ताव पारित किए।
6 सितंबर को सम्मलेन के खुले सत्र में विभिन जनसंगठन, ट्रेड यूनियनों से आए प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। सम्मेलन के खुले सत्र में आए वक्ताओं ने प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के चैथे सम्मेलन के सफल समापन की बधाई देते हुए कहा कि आज जिस तरह आधी आबादी का मजदूर मेहनतकश तबका अपने जीवन के संकट को लेकर लड़ रहा है ऐसे में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र का यह कार्यभार बन जाता है कि वह इन महिलाओं के साथ समस्त मजदूर आबादी के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष खड़ा करे।
आज न सिर्फ हमारा देश बल्कि पूरी दुनिया की आम जनता महंगाई, बेरोजगारी, स्वास्थ्य के संकट से जूझ रही है और इसमें दुनिया के हर कोने में साम्राज्यवादी देशों द्वारा अपने वर्चस्व के लिए छेड़े जा रहे युद्ध स्थिति को और बदतर बना रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि जनता की इस बदहाल स्थिति का फायदा उठाते हुए दुनिया भर में फासीवादी ताकतें अपनी जड़ जमा रही हैं। पूरी दुनिया में ये ताकतें धर्म, नस्ल, राष्ट्रवाद के नाम पर नफरत की राजनीति फैला रही हैं। ये ताकतें महिलाओं को प्रमुख रूप से निशाना बना रही हैं। उनके जीवन के हर पहलू पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही हैं। इसके साथ ही ये ताकतें जनता के संघर्षों में लगी क्रांतिकारी ताकतों को भी निशाना बना रही हैं। ऐसे में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की संघर्ष को तेज करने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
खुले सत्र को श्रमिक संग्राम कमेटी से कामरेड शिल्पी, जनसंघर्ष मंच से कामरेड कविता, महिला एकता मंच से सीमा, समाजवादी लोक मंच से कमलेश, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी से प्रभात ध्यानी, देवभूमि व्यापार मंडल से मनमोहन अग्रवाल, बेलसोनिका मजदूर यूनियन से अजीत, इंकलाबी मजदूर केंद्र से खीमानंद, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन से पी पी आर्या, परिवर्तनकामी छात्र संगठन से महेंद्र, पीएसवाई से दीरा और आइवो से शिवानी गुप्ता ने संबोधित किया।
सम्मेलन द्वारा एक 20 सदस्यीय केन्द्रीय परिषद, 8 सदस्यीय केन्द्रीय कमेटी का चुनाव किया गया। सम्मेलन ने बिंदु को अध्यक्ष और नीता को महासचिव चुना।
सम्मेलन का समापन रामनगर शहर में एक जुलूस निकालते हुए किया गया।
-रामनगर संवाददाता