भारतीय दूल्हा और सर्वोच्च न्यायालय
हमारा देश एक अनोखा देश है। इसकी हर चीज अनोखी है। यहां तक कि हमारे देश का अनोखापन हर जगह विराजमान है। हमारे देश के प्रधानमंत्री अनोखे हैं। हमारी संसद अनोखी है। और हमारे दे
हमारा देश एक अनोखा देश है। इसकी हर चीज अनोखी है। यहां तक कि हमारे देश का अनोखापन हर जगह विराजमान है। हमारे देश के प्रधानमंत्री अनोखे हैं। हमारी संसद अनोखी है। और हमारे दे
मोदी की महामानव की छवि बनाने में करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं। उन्हें विश्वगुरू, नान बायलॉजिकल, दुनिया में डंका बजाने वाले आदि न जाने किन-किन उपमाओं से सुशोभित करवाया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में पूरे देश में जगह-जगह ‘हिन्दू सम्मेलन’ आयोजित कर रहा है। ये ‘हिन्दू सम्मेलन’ 15 जनवरी 2026 से शुरू हुए हैं। पूरे देश में ऐसे
हाल ही में वंदे मातरम के गायन को लेकर मोदी सरकार ने नये दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं। इसके तहत वंदे मातरम को कई आधिकारिक कार्यक्रमों में गाया जाना अनिवार्य बना दिया गया
हिन्दू फासीवादियों द्वारा देश में लगातार नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। इस नफरती माहौल के कारण जब तब वहशी, वीभत्स घटनाएं सामने आ रही हैं। कहीं यूं ही बुजुर्ग मुसलमान को न
खबर है कि बिहार सरकार ने धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के पास मांस-मछली के बेचने पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। बिहार के भाजपाई उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा
उत्तराखण्ड को हिन्दुत्व की प्रयोगशाला बनाने पर उतारू संघी आजकल घबराये हुए हैं। सत्ता पर संघी मुख्यमंत्री धामी के काबिज होने, सारी शासन सत्ता अपने हाथ में होने के बावजूद य
देश में चुनाव के दौरान अक्सर ही गुस्से में आकर कई लोग कहते सुने जाते हैं कि अब उक्त पार्टी को हम वोट नहीं करेंगे। लंबे समय से यही देखा गया है कि किसी एक पार्टी की सरकार क
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।