लंपट बाबा की शरण में कांग्रेसी
खबर है कि कांग्रेस पार्टी के नेता कमलनाथ नये-नये चमके या चमकाये गये लंपट बाबा के दरबार में हाजिरी लगा आये हैं। कमलनाथ मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं
खबर है कि कांग्रेस पार्टी के नेता कमलनाथ नये-नये चमके या चमकाये गये लंपट बाबा के दरबार में हाजिरी लगा आये हैं। कमलनाथ मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं
तीन दिन तक लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस चलती रही। अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो जायेगा, इसकी खबर हर किसी को थी। फिर भी लोकसभा में आकाश-पाताल एक कर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के सेवा विस्तार पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी। 11 जुलाई को दिए अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने संजय मिश्रा के
उत्तर प्रदेश में एक चतुर्थ श्रेणी सरकारी कर्मचारी ने अपनी मेधावी पत्नी को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए इलाहाबाद (प्रयागराज) की किसी अच्छी कोचिंग में तैयारी क
राजस्थान का कोटा शहर एक बार फिर आत्महत्याओं के कारण सुर्खियों में है। इस वर्ष अभी तक 18 छात्र मौत को गले लगा चुके हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि आत्महत्याओं की संख्या व
भाजपा बहुत दिनों से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा या एनसीपी) को तोड़कर अपने खेमे में पहले तो पूरी पार्टी पर कम से कम उसके एक गुट को लाना चाहती थी। पिछले दिनों वह अप
मणिपुर में पिछले दो महीनों से जो कुछ हो रहा है वह गंभीर और चिंताजनक है। लेकिन उससे भी गंभीर और चिंताजनक है देश की सरकार का रुख।
कोरोना महामारी के वक्त लोगों को टीका लगाने के लिए सरकार ने कोविन, आरोग्य सेतु सरीखे पोर्टल तैयार किये थे। इनमें टीका लगवाने वाले 110 करोड़ लोगों के नाम, मोबाइल नम्बर, आधार कार्ड नम्बर, वोटर आई डी, ट
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।