भारत की अत्यन्त गंभीर बेरोजगारी की समस्या पर पानी के छींटे मारने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 2024 के बजट में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना लेकर आई थी। इस योजना का घोषित मकसद देश के युवा को ‘रोजगार के लिए ज्यादा योग्य’ बनाना था। यह कहा गया कि इस योजना के तहत अगले 5 वर्ष में देश के एक करोड़ नौजवानों को भारत की 500 शीर्ष कंपनियों में इंटर्नशिप करवाई जायेगी। 12 माह की इंटर्नशिप के लिए कम से कम 10वीं पास 21 से 24 साल के नौजवान पात्र होते हैं। इंटर्नशिप करने वालों को 5000 रुपये प्रति माह भत्ता मिलना है जिसमें से 4500 रुपये सरकार देगी।
इस योजना के पहले चरण की शुरूआत पिछले वर्ष अक्टूबर माह में हुई। इस चरण में 280 कंपनियों ने 1 लाख 27 हजार इंटर्नशिप के लिए विज्ञप्ति निकाली। इस वर्ष जनवरी माह से शुरू हुए दूसरे चरण में 327 कंपनियों ने 1 लाख 18 हजार इंटर्नशिप के लिए विज्ञप्ति निकाली।
कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के वेबसाइट और सोशल मीडिया एकाउंट पर इस कार्यक्रम को पूरा करने वाले इंटर्नों के मुस्कराते फोटो और वीडियो डाले गये हैं। इन छोटे वीडियो में कुछ इंटर्न बात कर रहे हैं कि यह इंटर्नशिप कितना फायदेमंद रहा है और इस अवसर के लिए वे सरकार के प्रति कितना शुक्रगुजार हैं। लेकिन इस प्रचार के बरक्स इस योजना के आंकड़े उलटी तस्वीर पेश करते हैं।
योजना के पहले चरण में विज्ञापित 1 लाख 27 हजार स्थानों के लिए 1 लाख 81 हजार लोगों ने आवेदन किया। इनमें से 60 हजार को चुना गया। लेकिन, सिर्फ 8,700 लोगों ने इंटर्नशिप में प्रवेश लिया। इसी तरह दूसरे चरण में 2 लाख 14 हजार आवेदकों में से 72,000 चुने गये। लेकिन, सिर्फ 23,000 ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया।
नौकरी ढूंढ रहे नौजवानों को इंटर्नशिप का झुनझुना पकड़ाने वाली यह योजना नौजवानों को कतई आकर्षित नहीं कर पा रही है। जिन लोगों ने इस उम्मीद में कि आगे बेहतर नौकरी के दरवाजे खुलेंगे, इस उम्मीद में इंटर्नशिप किया वे भी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 5000 के मामूली भत्ते पर वे जब बड़े शहरों में रह कर इंटर्नशिप करते हैं, तो उन्हें रहने-खाने आदि पर अपनी जेब से अतिरिक्त खर्च करना पड़ जाता है। इसको भी वे अपनी पढ़ाई पर अतिरिक्त निवेश मान लें अगर इस इंटर्नशिप के बाद उन्हें नौकरी मिल जाये। लेकिन वे कंपनियां भी उन्हें नौकरी पर रखने के लिए इंटर्नशिप के अनुभव का कोई लाभ देने को तैयार नहीं जहां वे इंटर्नशिप कर रहे हैं। इस योजना के तहत इंटर्नशिप कर रहे लोगों के लिए यह अवधि समय की बर्बादी महसूस हो रही है।
इस योजना के तहत इंटर्नशिप कर रहे लोगों की चुभन और बढ़ जाती है जब वे यह पाते हैं कि उन्हीं कंपनियों में दूसरे इंटर्न जो कि सरकारी योजना के तहत भर्ती नहीं हुए हैं, बेहतर भत्ते भी पा रहे हैं और नौकरी में समाहित कर लिये जाने के लिए भी ज्यादा संभावित हैं।
इस योजना के शिकंजे में ऐसे नौजवान भी फंस गए हैं जिन्होंने ऊंची तकनीकी शिक्षा की डिग्री ले रखी है। कोई आश्चर्य नहीं कि इस योजना के जाल में फंसने के लिए ढेरों नौजवान तैयार नहीं हैं। (ैबतवससण्पद के एक लेख पर आधारित)