रिपोर्ट

इजरायल-अमेरिका गठजोड़ का पुतला दहन

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लालकुंआ/ दिनांक 27 अगस्त को प्रगतिशील महिला एकता केंद्र  के कार्यकर्ताओं ने गाजा पट्टी पर इजरायली हमले के विरोध में इजराइल व अमेरिका के गठजोड़ का पुतला फू

15 अगस्त के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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15 अगस्त, 1947 को भारत ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से आजाद हुआ था। इस आजादी को हासिल करने के लिये देश के मजदूरों, किसानों, आदिवासियों, नौजवानों और महिलाओं ने बेमिसाल कुर्बान

शिक्षा का अधिकार और उत्तराखंड में क्लस्टर योजना पर गोष्ठी

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हल्द्वानी/ परिवर्तनकामी छात्र संगठन के आह्वान पर उत्तराखंड में क्लस्टर योजना लागू करने पर 15 अगस्त को हल्द्वानी के दमुवाढूंगा में ‘‘शिक्षा का अधिकार और क

भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी पर आक्रोशित युवा

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दिल्ली/ एसएससी (कर्मचारी चयन आयोग) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में छात्रों-शिक्षकों का असंतोष है। यह असंतोष सड़कों पर विरोध प्रदर्

वेतन भुगतान को संघर्षरत उपनल कर्मचारी

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हल्द्वानी/ उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में पूरे पदों पर भर्तियां करने की जगह उसके विकल्प में आउअसोर्सिंग भर्तियां की जा रही हैं। स

काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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9 अगस्त, 1925 के दिन लखनऊ के निकट काकोरी में क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूट लिया था। इतिहास में यह घटना काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम से प्रसिद्ध है जिसने कि अंग्रेजों की

उधमसिंह के शहादत दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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उधमसिंह हमारे देश के अविस्मरणीय क्रांतिकारी थे जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिये सीधे तौर पर जिम्मेदार पंजाब के तत्कालीन गवर्नर जनरल ओ’डवायर को लंदन के एक सभागार

पंजाब : आदिवासी लोगों के कत्लेआम के खिलाफ प्रदर्शन

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8 अगस्त को मोगा में पंजाब के दर्जनों जनवादी जनसंगठनों द्वारा आदिवासियों और उनके हितों के लिए संघर्षरत ताकतों के क्रूर कत्लेआम के खिलाफ रोषपूर्ण रैली और प्रदर्शन करके मांग

बांग्लाभाषी मजदूरों के उत्पीड़न का विरोध

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गुड़गांव/ पिछले 15-20 दिनों से गुरुग्राम में हरियाणा पुलिस द्वारा सरेआम किसी भी बांग्लाभाषी लोगों को (जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय से हैं) बिना किसी आरोप के पकड़ा जा रहा है, धमकाया

कुरुक्षेत्र में मासा का फासीवाद विरोधी सम्मेलन

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कुरुक्षेत्र/ कुरुक्षेत्र में 23 जुलाई को राईं धर्मशाला (नजदीक छोटा रेलवे स्टेशन थानेसर) में मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा), जो कि देशभर के 14 क्रांतिक

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?