राजनीति

ट्रम्प का विज्ञान विरोधी प्रलाप

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बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में ऑटिज्म पर आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में अपना घोर विज्ञान विरोधी वक्तव्य दिया। ऑटिज्म पैदाइशी एक ऐसी अवस्था

लद्दाख : न्यायपूर्ण संघर्ष को कुचलती मोदी सरकार

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बीते दिनों लद्दाख की जनता एक बार फिर से अपनी न्यायपूर्ण मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी। पर जनता की हर न्यायपूर्ण मांग के लिए कानों में तेल डाले बैठी गूंगी हो चुकी मोदी सरका

नेपाल में जन विद्रोह - रास्ता किधर है?

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पूंजीवादी लोकतंत्र का लुटेरा चेहरा अधिकाधिक उजागर होता जा रहा है। ऐसे में कल यही जनता जब सुस्पष्ट क्रांतिकारी विचारधारा से लैस होकर सड़कों पर उतरेगी तो उसके निशाने पर पूंजीवादी व्यवस्था होगी। तब इस लुटेरी व्यवस्था के साथ पीछे से सक्रिय लुटेरी ताकतों का षड्यंत्र भी ध्वस्त हो जायेगा। और समाजवाद के नये सवेरे का उदय होगा। भारत के सभी पड़ोसी मुल्कों के युवा-आम मेहनतकश अपनी पहलकदमी दिखा चुके हैं। अगला नम्बर निश्चय ही भारत का होगा।

शंघाई शिखर सम्मेलन : दुनिया बढ़ती साम्राज्यवादी होड़ की ओर

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अभी 31 अगस्त और 1 सितम्बर के चीन के शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एस.सी.ओ.) का अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। शंघाई सहयोग संगठन की शुरूवात एक छोटे से क्

फ्रांस में ‘‘सब कुछ रोको आंदोलन’’

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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन की मदद करने के चक्कर में फ्रांसीसी मजदूर-मेहनतकश अवाम के ऊपर लगातार आर्थिक बोझ डालकर उनकी जिंदगी को और ज्यादा अ

130वां संविधान संशोधन और हिंदू फासीवाद

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मोदी सरकार ने अचानक 130वां संविधान संशोधन पेश किया। यह संशोधन तब पेश किया गया जबकि मोदी सरकार घरेलू और विदेशी मोर्चे पर अपनी साख गंवा रही थी। अगस्त माह में जब एक तरफ बिहा

‘‘..अहो रूपं, अहो ध्वनिः’’

11 सितम्बर को प्रधानमंत्री मोदी के नाम से देश के प्रमुख अखबारों में एक लेख छपा। लेख संघ प्रमुख मोहन भागवत के 75वें जन्मदिवस के मौके पर था। मोदी जी ने मोहन भागवत की प्रशंस

उप राष्ट्रपति का चुनाव

उपराष्ट्रपति का चुनाव सम्पन्न हो गया। सी पी राधाकृष्णन भारत के नये उपराष्ट्रपति बन गये। 
    

नस्लीय इजरायल को एज्योर नहीं

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माइक्रोसाफ्ट ने चार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिन्होंने कंपनी के इजरायल के साथ संबंधों को लेकर कंपनी परिसर में विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, जिनमें से दो ऐ

अलास्का शिखर बैठक के बाद क्या?

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अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच अलास्का में बैठक हुई। बैठक के पहले अमरीकी राष्ट्रपति पत्रकारों से बात करते हुए रूसी राष्ट्रपति को चेतावनी और धमकी

आलेख

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।