24 जून को वेनेजुएला में दो बार तेज भूकम्प आया। इस भूकम्प में अब तक लगभग डेढ़ हजार लोगों के मारे जाने व 50 हजार से अधिक के लापता होने की खबर है। सर्वाधिक तबाही सैन सेबेस्टियन फाल्ट लाइन के समानान्तर घनी आबादी वाले तटीय गलियारे में हुई है। भूकंप के चलते एक बड़ी आबादी कंक्रीट के मलबे के नीचे दब गयी। इन हालातों में अमेरिकी साम्राज्यवादियों के हस्तक्षेप-प्रतिबंधों ने राहत कार्य को पंगु बनाकर लोगों के दुःख दर्द को और बढ़ा दिया है।
भूकम्प की भयावहता का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भूकम्प के कई दिन बाद भी लोग लोहे की छड़, कुल्हाड़ी व नंगे हाथों से कंक्रीट के मलबे को खोदने में जुटे हैं। लोगों को मलबे के नीचे से बच्चों के रोने की आवाजे आ रही हैं और लोग धीरे-धीरे इन आवाजों को बंद होते देखने को मजबूर हैं। शवों की भारी संख्या से असहनीय दुर्गन्ध फैल रही है। अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों की पहचान उनके हाथ में बंधे उस टेपर से हो रही है जिस पर उनके नाम व पते लिखे होते हैं। अस्पताल व मुर्दाघर पीड़ितों से भर चुके हैं।
राहत कार्य एकदम पटरी से उतरे हुए हैं। बचे लोगों को बिजली-पानी के बगैर जीने को मजबूर होना पड़ रहा है। बेघर हुए लोगों की राहत हेतु राज्य के प्रयास एकदम नाकाफी साबित हो रहे हैं और लोग एक-दूसरे की मदद के सहारे किसी तरह खुद को जिन्दा रखने की जद्दोजहद में जुटे हैं। जर्जर आवास, ध्वस्त स्वास्थ्य सेवायें व आपातकालीन राहत को संगठित करने में सरकार बुरी तरह विफल साबित हो रही है। इस तरह भूकम्प से कहीं ज्यादा तबाही राहत कार्यों की विफलता से जनता झेलने को मजबूर है।
6 माह पूर्व अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो का अपहरण कर वहां की सरकार को वाशिंगटन के इशारों पर चलने वाली सरकार में बदल दिया था। वहां की तेल सम्पदा पर अमेरिकी कम्पनियों का कब्जा हो गया था। इस कब्जे से पहले से वेनेजुएला पर कई आर्थिक प्रतिबंध थोपे गये थे। देश के भीतर आर्थिक तोड़-फोड़ व अन्य षड्यंत्रों में साम्राज्यवादी लगे हुए थे। अमेरिकी साम्राज्यवादियों के प्रतिबंधों-हस्तक्षेप व तोड़-फोड़ के कारनामों ने वेनेजुएला की आपातकालीन मामलों में प्रतिक्रिया की क्षमता को एकदम पंगु कर दिया था। ऊपर से मादुरो के भ्रष्ट मंत्रिमण्डल ने राज्य के संसाधनों को अपनी सेवा में लगा स्थिति और गम्भीर बना दी थी।
वेनेजुएला के भूकम्प को अवसर की तरह लेते हुए अमेरिकी साम्राज्यवादी राहत के नाम पर अपनी कब्जाकारी फौजों की तैनाती बढ़ाने में जुटे हैं। वाशिंगटन ने एक सैन्य आक्रमणकारी बल वेनेजुएला भेजा है। दो अमेरिकी युद्धपोत पहले से वेनेजुएला के जल क्षेत्र में तैनात हैं। अब बोलिवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रबंधन के काम के लिए अमेरिका ने अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। इसी तरह देश के अन्य प्रमुख स्थानों पर भी राहत के नाम पर अमेरिकी विमानों व सैन्य बलों की तैनाती बढ़ायी जा रही है। अमेरिकी साम्राज्यवादी राहत कार्यों से ज्यादा ध्यान रणनीतिक स्थानों पर कब्जे पर दे रहे हैं।
कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की सरकार अमेरिकी साम्राज्यवादियों के इशारे पर काम कर रही है। खनन क्षेत्र में अमेरिकी कम्पनियों के नियंत्रण को स्थापित करने के लिए खनिकों को हटाने काम चल रहा है। इसी तरह अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा कर अमेरिका भूकम्प का इस्तेमाल अपना कब्जा बढ़ाने के लिए कर रहा है।
वेनेजुएला के आज के हालातों के लिए जहां प्राथमिक तौर पर हस्तक्षेपकारी अमेरिकी साम्राज्यवादी दोषी हैं तो वहीं ‘21वीं सदी के समाजवाद’ के नाम पर पूंजीवादी रास्ते पर चलने वाले वेनेजुएला के पूंजीवादी शासक भी कम दोषी नहीं हैं। इन शासकों ने पेट्रोलियम की बिक्री के दम पर अपनी जेब भरने में अधिक ध्यान लगाया। इनके ही शासन में भूकंपरोधी मानकों को दरकिनार कर ऐसी इमारतें खड़ी की गयीं जो मौजूदा भूकम्प में एक झटके में ध्वस्त हो गयीं। इनके शासन काल में ही स्वास्थ्य से लेकर अन्य आवश्यक सेवायें क्रमशः पंगु बनती गयीं और शासक अपनी जेब भरते रहे।
ऐसे में वेनेजुएला की अवाम आज अपने पूंजीवादी शासकों की करतूतों व साम्राज्यवादी हस्तक्षेप दोनों का परिणाम भुगत रही है। इन दोनों दुश्मनों को निशाने पर लिए बिना वह बेहतर भविष्य की उम्मीद नहीं कर सकती है। फर्जी समाजवाद की जगह मजदूर वर्ग का असली समाजवाद ही उसे बेहतर जीवन दे सकता है।