विविध

दिल्ली की मजदूर बस्तियों में चला सरकार का बुलडोजर

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देश में हो रहे तथाकथित ‘‘विकास’’ की सबसे बड़ी कीमत देश के मजदूरों-मेहनतकशों को चुकानी पड़ती है। दिल्ली में फरवरी 2025 में बीजेपी की सरकार बनी उसके बाद दिल्ली में डबल इंजन क

यह ‘युद्ध विराम’ नहीं, नये युद्धों की तैयारी है

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लम्बे समय से ईरान के ऊपर हमले की तैयारी में लगे जियनवादी फासीवादी, इजरायली शासकों ने सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को धता बताते हुए 13 जून को उस पर भीषण हमला बोल दिया था। इस

अमेरिकी साम्राज्यवाद व उसके पिट्ठू इजराइल का पुतला दहन

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फरीदाबाद/ 17 जून 2025 को लखानी चौक पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा अमेरिका व इजरायल के युद्ध परस्त गठजोड़ द्वारा ईरान पर हमले के खिलाफ उनका पुतला दहन किया

अमरीकी और चीनी प्रतिद्वन्द्विता तीव्र होने की ओर

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अमरीकी साम्राज्यवादी चीन को अपना प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी मानते हैं। वे इसके लिए दुनिया भर में व्यूह रचना कर रहे हैं। चीन की बढ़ती आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक ताकत ने पुराने व

अमेरिका में ट्रंप की तानाशाही के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

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14 जून, 2025 को लाखों लोगों ने अमेरिका में 2,000 से अधिक स्थानों और 50 राज्यों में से प्रत्येक में ट्रम्प प्रशासन की दक्षिणपंथी नीतियों और तानाशाही तरीकों के खिलाफ विरोध

वनाधिकार कानून के बावजूद जारी है जनता के वनाधिकार हनन

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पिछले दिनों उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश भर से अतिक्रमण हटाने के नाम पर जंगलों, गांव, खत्तों, बस्तियों के लोगों को आतंकित किया। जिसके खिलाफ लोगों के आंदोलनों-प्रदर्शनों के ब

उ.प्र. में 5 हजार स्कूलों का विलय

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हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के करीब 5 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों को मर्ज (विलय) करने की तैयारी कर दी है। कहीं-कहीं यह संख्या 27 हजार के आस-प

जब राष्ट्रवाद बस अंधराष्ट्रवाद बन कर रह जाये!

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राष्ट्रवाद एक ऐतिहासिक परिघटना है जिसका पहले प्रगतिशील पहलू प्रधान था, अब प्रतिक्रियावादी पहलू प्रधान है। समाज की गति में इसकी जड़ें थीं- पूंजीवाद की उत्पत्ति और विकास में। प्रगतिशील राष्ट्रवाद ने समाज को आगे ले जाने का काम किया। अब प्रतिक्रियावादी राष्ट्रवाद समाज को आगे जाने में बाधा बन रहा है। और पूंजीपति वर्ग अंधराष्ट्रवाद के रूप में इसका इस्तेमाल कर रहा है।

आंध्र प्रदेश : काम के घण्टे 10 करने का फरमान

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आंध्र प्रदेश की चंद्र बाबू नायडू सरकार प्रदेश में निवेश जुटाने और पूंजीपतियों को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसी कड़ी में उसने प्राइवेट सेक्टर में मजदू

आलेख

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जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

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ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

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लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

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इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि