मरम्मत से काम बनता नहीं -विजय गौड़ (16 मई 1968-21 नवम्बर 2024)

/marammat-se-kaam-banataa-nahin-vijay-gaud-16-may-1968-21-november-2024

आपके साथ जो हुआ वह 
निश्चित ही अन्याय है पर, 
आपके बेटे की क्या गलती
जो बेशक बहुत अव्वल नहीं 
लेकिन जिसके लिए किसी विद्यालय में 
पढ़ने का अवसर नहीं 

आपके भाई का गुस्सा एक दम वाजिब है 
वर्षों से जमी जिसकी दुकान को म्यूनिस्पैलिटी के ड्रोजरों ने
सड़क चौड़ाकरण अभियान में 
पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया 

आपकी बहन को भी गलत तो नहीं कहा जा सकता 
नर्स की नौकरी ने जिसे इस कदर पेशेवर बना दिया 
रात-बे-रात आना जिसके लिए बहुत मामूली बात हुआ 
और उसका ही फायदा उठा
कम्बख्त हवस के अंधेरेपन ने लपेट लिया

आप खुद जानते हैं जनाब 
आपके साथ जो घटा, 
उसके लिए कसूरवार कौन ? 
वैसे जल्द ढूंढ न पायेंगे

मैं तो एक पेंटर हूं 
पेशे के तजुर्बे से कहूं तो कसूरवार बहुत अदृश्य भी नहीं है

खैर, बहुत खराब पड़ी चीज को नयी नकोर बनाना आसान नहीं
और आप हैं कि मरम्मत से भी कांप जाते हैं
मेरा क्या, मैं तो रंग रोगन कर पकड़ा दूंगा 
लेकिन मात्र रगड़-पट्टी और ठोका-पीटी से काम बनता नहीं 
पायेंगे कि जो पहले कुछ दबा ढका था सब उघाड़ दिया मैंने

मैं तो एक साधारण दस्तकार हूं 
आप चाहेंगे जैसा, कर दूंगा 

पर तजुर्बे की बात है यह,
पुरानी-धुरानी, जो बेहद बेकार हो जाती ही चीजें 

मरम्मत भर से भी, 
कुछ काम बनता नहीं।
 

आलेख

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

/amerika-aur-china-thyuusidaidsa-phaans

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

/hindu-fascist-chunav-aayog-and-vidhansabha-chunaav

हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

/imperialism-and-abhijat-workers-class

दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।