मुझे संदेह है

Published
Mon, 02/16/2026 - 06:00
/mujhe-sandeh-hai

तुम्हारी उस मुस्कुराहट पर
जो तुम ‘संधि-पत्र’ (ज्तमंजल) पर हस्ताक्षर करते वक्त
कैमरों को दिखा रहे थे।
इतिहास गवाह है-
व्यापारी जब भी ‘दाता’ बनकर आए हैं
वे अपने जहाजों में
मसाले नहीं, हमारी आजादी भरकर ले गए हैं।
तुम कहते हो-
यह डील मेरे खेतों को ‘स्मार्ट’ बनाएगी
पर मुझे शक है तुम्हारी परिभाषाओं पर।
कहीं ऐसा तो नहीं?
कि ‘स्मार्ट’ होने की पहली शर्त यह हो
कि मुझे अपनी ही ज़मीन पर ‘गूंगा’ होना पड़े?
तुम्हारे इन रंगीन विज्ञापनों में
हंसता हुआ जो किसान दिखता है
उसकी आंखों में चमक नहीं, एक डर है।
डर इस बात का-
कि जो बीज तुमने लेबोरेटरी में बनाया है
वह मेरे खेत की मिट्टी को पहचानता भी है?
या वह एक ‘विदेशी जासूस’ है
जो धीरे-धीरे मेरी जमीन की उर्वरता (थ्मतजपसपजल) चुरा लेगा?
मुझे शक है
कि तुम्हारी यह ‘फूड सिक्योरिटी’
असल में ‘फूड कंट्रोल’ का षड्यंत्र है।
क्योंकि जिस दिन मेरा बीज खत्म होगा
जिस दिन मेरा देसी खाद ‘अवैध’ होगा
उस दिन मेरी भूख का रिमोट
तुम्हारे वातानुकूलित दफ्तर में होगा।
यह समझौता नहीं, एक छलावा है।
इसमें लिखा है कि तुम जोखिम उठाओगे
पर बारीक अक्षरों (थ्पदम चतपदज) में यह भी लिखा है-
कि अगर प्रकृति रूठ गई
तो हरजाना तुमसे नहीं, मेरी अगली नस्लों से वसूला जाएगा।
मुझे शक है
कि तुम मेरी फसल खरीदना नहीं चाहते
तुम बस यह चाहते हो
कि मैं हार मान लूं
और अपनी जमीन तुम्हारे ‘वेयरहाउस’ के लिए छोड़ दूं।
मारे जाएंगे हम सब
अगर हमने यह नहीं पूछा-
कि सात समंदर पार बैठा वह सूट-बूट वाला आदमी
मेरे फटे जूतों की चिंता अचानक क्यों करने लगा है?
                        साभार : फेसबुक पेज किसान से

आलेख

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

/amerika-aur-china-thyuusidaidsa-phaans

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है