दूध की कीमत एक सेंट बढ़ गई,
एक क्वार्ट पर एक पैसा ज्यादा,
और एक अमीर आदमी ने गर्मियों के महीनों में
अपनी सामान्य आय से पांच हजार ज्यादा कमा लिए।
उसने साल में पांच हजार ज्यादा कमाए,
और लोग उसे ‘अद्भुत वित्तपोषक’ कहने लगे।
झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चे भगवान के पास जाने लगे -
पांच हजार! इससे पूरा देश चैंक गया।
दान संस्थाओं को समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हो रहा है,
और उन्होंने इस बात की जांच शुरू की
कि आखिर किस वजह से बच्चे मुरझा रहे हैं और बेहोश हो रहे हैं
और उन्होंने इस कारण को ‘गर्मी की बीमारी’ नाम दिया।
फिर उस धनी व्यक्ति ने पाँच सौ डालर दिए,
पांच सौ डालर दिए,
गर्मी की बीमारियों के प्रकोप से राहत दिलाने के लिए,
और बच्चों की जान बचाने के लिए।
पांच सौ डालर देकर वह सूची में सबसे ऊपर था,
और लोग उसे ‘महान परोपकारी’ कहने लगे।