अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था बदहाल

पिछले वित्त वर्ष में संगठित रिटेल सेक्टर के कारोबार में 4 प्रतिशत की गिरावट आई

नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में अब जनता की आशाओं पर तुषारापात होने लगा है। पिछले 10 साल से सत्ता पक्ष ने अपनी गढ़ी कहानियों के जरिये लोगों में कुछ बेहतर करने की उम्मीद

हिंडनबर्ग का जिन्न और मोदी सरकार

हिंडनबर्ग का जिन्न

हिंडनबर्ग संस्था का जिन्न एक बार फिर मोदी सरकार को सताने लगा है। लगभग डेढ़ साल पहले शार्ट सेलिंग कम्पनी हिंडनबर्ग ने भारत के शीर्ष पूंजीपति अडाणी के ऊपर घोटाले का आरोप लगा

हिन्दू फासीवादी और भारतीय अर्थव्यवस्था

किसी भी पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की तरह भारतीय अर्थव्यवस्था भी अपने बुनियादी चरित्र में अराजक है। इसमें कौन कितना पैदा करेगा और कौन कितना उपभोग करेगा यह बाजार से तय होता है और बाजार में मांग और पूर्ति का राज होता है। कभी मांग पूर्ति से आगे निकलती है तो कभी पूर्ति मांग से। दोनों के बीच संतुलन यानी मांग और पूर्ति का बराबर होना यदा-कदा ही होता है। इस सबमें प्रतियोगिता निर्णायक होती है। कौन कितना बाजार हथिया लेता है, हर कोई इसी में लगा होता है। यहां तक कि मजदूर भी इस प्रतियोगिता में उतर पड़ते हैं- ज्यादा बेहतर मजदूरी और काम की शर्तों के लिए। 

योजनावीर मोदी सरकार

मोदी सरकार बीते 5 वर्षों के शासन में एक के बाद एक योजना लाने के लिए मशहूर रही है। एक योजना पेश करने के कुछ समय बाद ठण्डे बस्ते में डाल दी जाती व ताम झाम के साथ दूसरी योजन

श्रम सघन उद्योगों का घटता निर्यात : लाखों मजदूरों का जीवन दांव पर

भारत से वस्तुओं का निर्यात यद्यपि स्थिर बना हुआ है। जबकि श्रम सघन उद्योगों से निर्यात में तेज गिरावट हुई है। ये श्रम सघन उद्योग हैं कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग, जेम्स एंड ज्वे

न्यूनतम वेतनमान में मामूली बढ़ोत्तरी भी पूंजीपतियों को बर्दाश्त नहीं

उत्तराखंड में निजी क्षेत्र की फैक्टरियों, दुकानों एवं अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले मजदूरों हेतु घोषित नये न्यूनतम वेतनमान को राज्य के ज्यादातर पूंजीपति लागू करने क

पति, पत्नी और वो

‘पति, पत्नी और वो’ नाम से भारत में बम्बईया सिनेमा ने दो लोकप्रिय फिल्में बनायी। एक 1978 में और दूसरी 2019 में आई। दोनों फिल्में चलीं। लोगों का खूब मनोरंजन किया अैर फिर कौ

टी बी रोधी दवाओं की किल्लत

मोदी सरकार की घोषणा है कि 2025 तक भारत को टी बी से मुक्त कर दिया जाएगा। पहले की 2030 तक की समय सीमा को पांच वर्ष कम कर यह लक्ष्य लिया गया। लेकिन जैसा कि मोदी सरकार की आम

भारत में पढ़े-लिखे नौजवानों में बढ़ती बेरोजगारी

चुनावी साल है, ‘नये वोटर’ को रिझाने के लिए राजनीतिक दल कलाबाजियां कर रहे हैं। लेकिन इस सब के बीच देश में नौजवानों की क्या स्थिति है? पढ़ा लिखा नौजवान घर पर क्यों बैठा है?

आलेख

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

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अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।