राष्ट्रीय

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चाटुकारिता की हद है यह /chatukarita-ki-had-hai-yah
जीतू मुंडा का दर्द /jeetu-munda-ka-dard
मजदूरों की न्यायपूर्ण आवाज दमन से नहीं दबेगी /workers-ki-nyaypurn-awaz-daman-se-nahin-dabegi
गाजा नरसंहार में भारत सरकार की भूमिका /gaza-narasanhar-mein-bharat-sarakar-ki-bhumika
आप में फूट: भाजपा का काला कारनामा /aap-mein-phoot-bhajapa-ka-kala-karanaamaa
मानेसर में मज़दूर आंदोलनों का दमन, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां
मानेसर के मज़दूर संघर्षों में हरियाणा सरकार का दोहरा चरित्र उजागर /manesar-ke-majadoor-sangharson-mein-harayana-sarakar-ka-dohara-charitra-ujagar
एस आई आर पर सेमिनार /s-i-r-par-seminar
मजदूर आक्रोश की नई लहर : अभी तो ली अंगड़ाई है..... /majadur-aakrosha-ki-nai-lahar-abhi-to-li-angadaai-hai
मजदूरों और मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं को साजिशन फर्जी और संगीन मुकदमों (तोड़फोड़, आगजनी, हत्या का प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र इत्यादि) में फंसाने एवं मजदूर आंदोलन के दमन के विरुद्ध व्यापक एकजुटता हेतु इंकलाबी मजदूर केंद्र का आह्वान /workers-aur-workers-sangthan-ke-karyakarataon-ko-sajishana-pharji-aur

आलेख

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?