
भाजपा 2024 लोकसभा चुनाव में बहुमत से नीचे क्या आयी, संघ की मानो जान में जान आ गयी। मोदी-शाह के आगे मातृ संगठन की दोयम होती जा रही स्थिति से मानो संघ को उबरने का मौका मिल गया। संघ प्रमुख जो भाजपा की हां में हां मिलाते-मिलाते थक चुके थे, उन्हें कुछ अलग बोलने का मौका मिल गया।
संघ प्रमुख ने चुनाव पर बातें करते हुए मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि सच्चे सेवक में अहंकार नहीं होना चाहिए। वह मर्यादा का पालन करते हुए दूसरों को नुकसान पहुंचाये बिना काम करता है। चुनावी मुकाबला झूठ पर आधरित नहीं होना चाहिए। चुनाव युद्ध की तरह लड़ा गया जो गलत था। आगे भागवत ने कहा कि विरोधी को विरोधी नहीं प्रतिपक्ष कहा जाना चाहिए।
इसके अलावा भागवत ने लगातार सुलगते मणिपर की चर्चा कर कहा कि बीते एक वर्ष में मणिपुर शांति की राह देख रहा है। इस तरह मणिपुर पर उन्होंने सरकार की नाकामी को बगैर नाम लिए चिन्हित किया।
भागवत मोदी को पटरी पर लाना चाहते हैं। वे खुद को व संघ को पाक साफ साबित करना चाहते हैं। पर वे यह भूल जाते हैं कि चाहे चुनाव का मामला हो या फिर मणिपुर का खुद संघ मौजूदा दुर्गति का कम भागीदार नहीं है। मणिपुर में कुकी-मैतेई झगड़े को साम्प्रदायिक रंग चढ़ाने में संघ की ही सर्वप्रमुख भूमिका रही है।
देखने की बात है कि मोदी के घटते कद के वक्त क्या संघ अपना वर्चस्व फिर कायम कर पायेगा या फिर बड़ी पूंजी के सहयोग से मोदी फिर संघ को अपने अधीन लाने में सफल होंगे। दो शातिर लोगों में वर्चस्व की इस लड़ाई में कोई भी जीते, जनता को तो इनकी दुष्टता ही झेलनी पड़ेगी।