टी बी से लड़ते मजदूर और टी बी मुक्त भारत

1. टी बी एक गम्भीर बीमारी है
    

यह बीमारी अक्सर गरीबों व मजदूरों को होती है। गरीबों में होने का कारण यह है कि उनके पास अच्छा जीवन जीने के लिए संसाधन नहीं होते हैं। यह बात मजदूर व गरीब अपने जीवन से जुड़ी समस्याओं से अच्छी तरह जानते हैं। 
    

यह एक संक्रमित बीमारी है। यह आम तौर पर फेफड़ों को प्रभावित करती है। अगर इसका इलाज सही समय पर न किया जाये तो मरीज की मौत भी हो जाती है। 
  

 यह मुख्य रूप से तब फैलती है जब लोग एक ऐसे व्यक्ति द्वारा हवा में सांस लेते हैं जिसे सक्रिय बीमारी कहते हैं। 

2. शहर फरीदाबाद के हालात/भारत सरकार का दावा
    

आज के समय में शहर फरीदाबाद में जहां पर सरकारी अस्पताल व टी बी के डॉट सेन्टरों पर दवाइयां नहीं मिल रही हैं। ऐसे हालात में मरीज परेशान हैं। जब कोई मरीज वहां के डॉक्टरों व स्टाफ से पूछताछ करता है कि दवाइयां कब तक आ जायेंगी तब वहां के डॉक्टरों व स्टाफ का कहना होता है कि कोई पता नहीं ऊपर कम्पलेंट कर दी है। जब आ जायेंगी तब मिल जायेंगी। 
    

ऐसे में यह सवाल बनता है कि एक तरफ वहां के डाक्टरों व स्टाफ का कहना है कि टी बी की दवा में किसी एक दिन का भी गैप नहीं होना चाहिए। 
    

जब यह सवाल कोई मरीज वहां के डॉक्टरों से करता है तो वे यह हवाला देते हैं कि जब तक दवाईयां नहीं आ रही हैं तब तक बाहर से ले लो। यह दिक्कत मरीजों के लिए कोई पहली बार नहीं हुई है। आज से लगभग 3 या 4 महीने पहले भी हुई थी। उस समय डॉक्टरों व मरीजों का कहना है कि 2 से 3 महीने में दवाईयां उपलब्ध हुई थीं इससे यह भी कहा जा सकता है कि एक तरफ गरीबों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं वहीं दूसरी तरफ भारत सरकार यह दावा करती है कि टी बी मुक्त भारत। यह भी कह सकते हैं कि ‘जीतेगा भारत हारेगा टी बी’ का भी दावा करती है। मगर हालात कुछ और ही हैं। 

3. फरीदाबाद में ईएसआईसी अस्पताल की स्थिति
    

यहां ईएसआईसी अस्पताल की स्थिति यह है कि जब भी कोई टी बी का मरीज जाता है तो वह यह उम्मीद लेकर जाता है कि हमारा इलाज यहां अच्छे से हो जायेगा लेकिन उसका उलटा होता है। वहां के डॉक्टर यह कहकर कि इसका इलाज सरकारी अस्पताल में होता है और वह उस मरीज की किसी नजदीकी सरकारी अस्पताल में रेफर कर देते हैं और वह अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। 
  

पर जिस उम्मीद में मरीज वहां जाता है कि उसकी सैलरी मिलने से पहले उसका ईएसआईसी का पैसा काट लिया जाता है। पर वहां जाने से उसे पता चलता है कि उसकी वो भी उम्मीद खत्म हो जाती है। 
    

यह हालात हैं फरीदाबाद ईएसआईसी अस्पताल के अब ऐसे में मरीज करें तो क्या करें। 
 

4. फरीदाबाद के मजदूरों की स्थिति
  

आज के समय में फरीदाबाद के मजदूरों के हालात यह हैं कि यहां के मजदूरों को जो हरियाणा सरकार का न्यूनतम ग्रेड 10,500 रु. है वह तक नहीं मिल रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि देश के स्तर पर बढ़ती बेरोजगारी है व सरकारों ने कम्पनी मालिकों को छूट दे दी है। कि रखो और निकालो। अब ऐसे में जो दिहाड़ी मजदूरों की संख्या बढ़ती जा रही है। उन्हें भी हर रोज काम नहीं मिल रहा है। अब ऐसे में यह सवाल बनता है कि दिहाड़ी मजदूर दिन में 400 या 500 प्रतिदिन कमाने वाला कैसे इन घातक बीमारियों से लड़ सकता है। दवाइयां न मिलने पर डॉक्टर कहते कि प्राइवेट से लेना जब कि प्राइवेट दवाइयां तक सप्ताह की लगभग 2000 रुपये की मिलती हैं। अब इन मजदूरों के लिए एक ही सवाल बनता है कि संगठित होकर इन सरकारों व इस व्यवस्था से लड़ा जाये और मजदूर राज समाजवाद स्थापित किया जाये। 
        -रवी कुमार, फरीदाबाद 

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