हम युद्ध से बच गए, हम युद्ध विराम से नहीं बच सकते -सारा अवाद
पिछले रविवार को, मैं मध्य गाजा पट्टी के अल-जावेदा में अपने परिवार के तंबू से बाहर निकला और पास के ट्विक्स कैफे की ओर चल पड़ा, जो फ्रीलांसरों और छात्रों के लिए एक सह-कार्य
पिछले रविवार को, मैं मध्य गाजा पट्टी के अल-जावेदा में अपने परिवार के तंबू से बाहर निकला और पास के ट्विक्स कैफे की ओर चल पड़ा, जो फ्रीलांसरों और छात्रों के लिए एक सह-कार्य
मोदी सरकार के सामने संकट यही है कि वह रूस से मिल रहे सस्ते तेल को चुने या फिर अमेरिका के साथ प्रति वर्ष होने वाले कुल व्यापार लाभ को। अपनी फितरत के अनुसार तो भारत सरकार और भारतीय पूंजीपति यही चाहते हैं कि उनको दोनों जगह से होने वाला लाभ बदस्तूर जारी रहे। किन्तु डोनाल्ड ट्रंप इस सारे खेल में भाजपाईयों और उनके यारों का गुरू है। उसने वर्तमान और भविष्य के द्विपक्षीय व्यापार में भारत को हो रहे लाभ को अपना हथियार बनाया और अपनी वैश्विक शक्ति संतुलन की राजनीति के मोहरे सैट करके मोदी सरकार को ‘पटरी’ पर ला डाला।
वेनेजुएला की मादुरो सरकार ट्रम्प को बर्दाश्त नहीं है? क्यों?
जब समझौता लागू होने का समय आ गया और गाजापट्टी की फिलिस्तीनी आबादी जश्न मनाने के लिए जगह-जगह इकट्ठा होने लगी, तभी इजरायली हवाई हमले कई जगह हुए जिसमें कई लोग मारे गये और 70 से अधिक घायल हुए। इजरायली यहूदी नस्लवादी सत्ता समझौता लागू होते समय भी फिलिस्तीनी आबादी पर दहशत का माहौल बनाये रखने की उम्मीद में कत्लेआम कर रही है।
इजरायल द्वारा गाजा का नरसंहार शुरू किये दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस पूरी अवधि में गाजा के समर्थन में दुनिया भर में जनता की एकजुटता बढ़ती गयी है। 2 वर्ष पूरे होने पर भी जग
मिश्र के शर्म अल शेख में गाजा में कथित युद्धविराम को लेकर सम्मेलन निपट चुका है। तकरीबन 20 से ज्यादा देशों के लंपट हुक्मरान इसमें शामिल रहे हैं। जिनके बीच संघर्ष था वही इस
साम्राज्यवादी मुल्क अमेरिका और साम्राज्यवादी चीन फिर आमने-सामने आ गये हैं। इस बार मसला दुर्लभ मृदा धातुओं पर नियंत्रण का है।
इजरायल द्वारा कतर पर हमले की निंदा दुनिया भर में व्यापक पैमाने पर हुई। इजरायल दुनिया के पैमाने पर अलग-थलग पड़ गया। इसके साथ ही जिन देशों ने अब्राहम समझौता इजरायल के साथ किया था, वह अब कमजोर पड़ने लगा है। इजरायल के साथ साउदी अरब और अन्य अरब देशों की रिश्तों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया बाधित हुई।
इजरायली शासकों द्वारा फिलिस्तीन में किये जा रहे नरसंहार का विरोध दुनिया भर में बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सम
गाजा में जारी नरसंहार पर यूरोप के देशों में हो रहे प्रदर्शनों के दबाव में इन देशों की सरकारें भले ही इसराइल का विरोध करने पर मज़बूर हो रही हैं। भले ही, ये फिलिस्तीन को स्व
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।