राजा नंगा है -रूपरेखा वर्मा
वो डरता है
बंदूकधारी सुरक्षाकर्मियों के घेरों के
बावजूद
वो डरता है
मज़बूत किले में हिफाज़त के
बावजूद
वो डरता है
झूठी डिग्रियों की सनद के
बावजूद
वो डरता है
बंदूकधारी सुरक्षाकर्मियों के घेरों के
बावजूद
वो डरता है
मज़बूत किले में हिफाज़त के
बावजूद
वो डरता है
झूठी डिग्रियों की सनद के
बावजूद
आपके साथ जो हुआ वह
निश्चित ही अन्याय है पर,
आपके बेटे की क्या गलती
जो बेशक बहुत अव्वल नहीं
लेकिन जिसके लिए किसी विद्यालय में
पढ़ने का अवसर नहीं
सुनो!
संघियो, सुनो !
मैं तुम्हारे मुंह पर कहती हूं,
तुम्हारी हर बात झूठी है
तुम्हारी धर्म की व्याख्या झूठी है,
तुम्हारा इतिहास का बखान झूठा है,
मेरी हत्या
मेरी आंखों के सामने हुयी
मैं जितना प्रतिरोध कर सकती थी,
मैंने किया।
मैंने हत्यारों को घायल किया
अपने दांत उनके हाथों में
गड़ा दिये
कोसाम के पेड़ों के सभी विस्थापित लार्वा
भोपाल के घायल बच्चे
और गाजा की मृत माताएं,
और सभी विस्थापित आदिवासी सामूहिक रूप से गाते हैं
कोई पूंजीपति अच्छा नहीं होता
(अंश)
1.
घुस आया है तेंदुआ
वे मुग्ध हैं उसके हिंसक अंदाज पर
गर्व करते हैं फूल माला से लाद देते हैं
पर लोग हैरान हैं कि यह तो तेंदुआ है!
सुबह होते ही
खुरपी और कुदाल लेकर खेतिहर
खेतों पर काम करने चले जाते हैं
हथौड़े लेकर मजदूर निर्माण कार्य में लग जाते हैं
केतली लेकर चायवाला पानी गर्म करने लगता है
1. आजादी
हम आजादी चाहते हैं
पीले हीरे की तरह
धूल तो धूल से सही
पत्थर तो पत्थर से सही
हमारे नंगे हाथों का लहू
टपकता है चट्टानों के ऊपर
अखबर बेचती लड़की
अखबार बेच रही है या खबर बेच रही है
यह मैं नहीं जानती
लेकिन मुझे पता है कि वह
रोटी के लिए अपनी आवाज बेच रही है
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?