वेनेजुएला पर अमेरिकी साम्राज्यवादियों के हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

Published
Fri, 01/16/2026 - 15:50
/venejuela-par-ameriki-imperialist-ke-attack-ke-khilaf-protest

वेनेजुएला के समयानुसार 3 जनवरी तड़के लगभग 2.00 बजे (भारतीय समय के अनुसार सुबह 11ः30 बजे) अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस सहित चार शहरों पर जनसंहारक भयंकर बमबारी कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया एडेला का अपहरण कर लिया। गाजा में जनसंहार कराने वाले और दुनिया भर में हथियारों की सप्लाई कर जनसंहारक युद्धों के लिए जिम्मेदार साम्राज्यवादी अमेरिका के शासकों का सरगना ट्रम्प कहता है कि वेनेजुएला की निकोलस मादुरो सरकार अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी, वहां से अमेरिका के खिलाफ साजिशें हो रही थीं। वेनेजुएला उनके देश में कोकीन और फेंटेनाइल जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी का बड़ा रास्ता बन चुका था। ट्रम्प का आरोप है कि मादुरो सरकार की नीतियों से लाखों वेनेजुएलाई लोगों को देश छोड़ अमेरिका भागना पड़ा। उन्होंने जेल और मानसिक अस्पताल से अपराधियों को अमेरिका भेजा। इसलिए मादुरो को सत्ता से बेदखल करना जरूरी था।
    
सनकी ट्रंप द्वारा बताई गई उपरोक्त वजहें बहाना मात्र हैं। दरअसल अमेरिका लंबे समय से वेनेजुएला के तेल भंडार पर निगाहें लगाए हुए था। वेनेजुएला के पास बड़ा तेल भंडार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में किये गये इस साम्राज्यवादी आतंकवादी हमले का विरोध पूरी दुनिया में हो रहा है। भारत में भी क्रांतिकारी-प्रगतिशील एवं अन्य वामपंथी संगठनों व ट्रेड यूनियनों ने भी इसका भारी विरोध किया। 

हल्द्वानी/ प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, मानव अधिकार रक्षा अभियान के कार्यकर्ताओं ने बुद्ध पार्क में वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला करने का विरोध करते हुए अमेरिकी साम्राज्यवाद और उसके मुखिया राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला दहन किया।

गुड़गांव/ 6 जनवरी 2026 को ट्रेड यूनियनों, मजदूर संगठनों द्वारा सुबह 12 बजे, लघु सचिवालय गुड़गांव में, वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के विरोध में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया गया।
    
इस विरोध प्रदर्शन में AITUC, AIUTUC, इंकलाबी मजदूर केंद्र, CSTU, मुंजाल शोवा यूनियन, परफेटी यूनियन, बेलसोनिका यूनियन इत्यादि यूनियनों ने भाग लिया।

हरिद्वार/ हरिद्वार में इंकलाबी मजदूर केंद्र और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के द्वारा चिन्मय डिग्री कालेज के पास चौराहे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की खुली गुंडागर्दी के विरोध में प्रदर्शन कर अमेरिकी झंडे को आग के हवाले किया गया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी स्वतंत्र राष्ट्र व उसकी चुनी हुई सरकार के मुखिया का इस तरह अपहरण करना खुली गुंडागर्दी व आतंकी कार्यवाही में आता है। इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर महाभियोग प्रस्ताव लाकर कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए।

दिल्ली/ 4 जनवरी को अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर विध्वंसक हमले के विरोध में जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। वामपंथी संगठनों द्वारा बुलाए गए जंतर-मंतर के प्रदर्शन में सीपीआई, सीपीएम, भाकपा माले, भाकपा माले (मास लाइन), भाकपा माले (क्लास स्ट्रगल), के वाई एस, इंकलाबी मजदूर केंद्र, सीजीपीआई, डीपीएफ, लोकपक्ष सहित दर्जनों संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
    
प्रदर्शन में वक्ताओं ने बताया कि आज अमेरिका ‘‘मुनरो सिद्धांत’’ की जगह ‘‘डोनरो सिद्धांत’’ पेश कर दुनिया की बंदरबांट का नक्शा पेश कर अपने वर्चस्व को कायम करना चाहता है। 
    
इंकलाबी मजदूर केन्द्र की फरीदाबाद इकाई द्वारा 4 जनवरी 2025 को खूनी, आतंकी, कब्जाकारी अमेरिकी साम्राज्यवाद व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पुतला दहन किया गया। 
    
04 जनवरी 2026 को बरेली में आटो टेम्पो चालक वेलफेयर एसोसिएशन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी साम्राज्यवाद का पुतला फूंका।
    
मऊ में 5 जनवरी को, वेनेजुएला पर डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा किए गए हमले के खिलाफ कलेक्ट्रेट पर साझा प्रदर्शन के पश्चात राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।
    
प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, भाकपा, किसान सभा (भाकपा), माकपा, भाकपा माले (लिबरेशन), एक्टू, एम.सी.पी.आई.(यू.), राष्ट्रवादी जनवादी मंच ने हिस्सा लिया।
    
बलिया में ग्राम सभा बहादुरपुर कारी व इनामीपुर में अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के विरोध में जुलूस प्रदर्शन किया व नारे लगाये गये। -विशेष संवाददाता

आलेख

/capital-dwara-shram-par-kiya-gaya-sabase-bhishan-hamala

मजदूर-कर्मचारी की परिभाषा में विभ्रम पैदा करने एवं प्रशिक्षुओं व कम आय वाले सुपरवाइजरों को मजदूर न माने जाने; साथ ही, फिक्स्ड टर्म एम्प्लायमेंट (FTE) के तहत नये अधिकार विहीन मजदूरों की भर्ती का सीधा असर ट्रेड यूनियनों के आधार पर पड़ेगा, जो कि अब बेहद सीमित हो जायेगा। इस तरह यह संहिता सचेतन ट्रेड यूनियनों के आधार पर हमला करती है। 

/barbad-gulistan-karane-ko-bas-ek-hi-ullu-kaafi-hai

सजायाफ्ता लंपट ने ईरान पर हमला कर सारी दुनिया की जनता के लिए स्पष्ट कर दिया कि देशों की संप्रभुता शासकों के लिए सुविधा की चीज है और यह कि आज शासक और मजदूर-मेहनतकश जनता अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। 

/amerika-izrayal-ka-iran-ke-viruddha-yuddh

अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।