ब्राजील में तेल और डाक विभाग के मजदूरों-कर्मचारियों की हड़ताल

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ब्राजील में 15 दिसंबर को सरकारी तेल कम्पनी पेट्रोब्रास के मजदूरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी और उसके बाद सरकारी डाक विभाग करिओस के कर्मचारियों ने भी हड़ताल कर दी। 19 दिसंबर को दोनों क्षेत्र के मजदूर और कर्मचारियों ने एक संयुक्त रैली निकाली। तेल और डाक विभाग के मजदूरों व कर्मचारियों की ये हड़ताल लूला सरकार द्वारा किये जा रहे सरकारी कम्पनियों के निजीकरण, छंटनी और वेतन वृद्धि के समझौते को लेकर है।
    
पेट्रोब्रास सरकारी क्षेत्र की एक बड़ी तेल कम्पनी है जो 25 लाख बैरल तेल प्रतिदिन निकालती है। इसके मजदूर वास्तविक वेतन वृद्धि के लिए लड़ रहे हैं। इसके अलावा वे काम की सुरक्षित परिस्थितियों, ले ऑफ के खिलाफ और ठेके के मजदूर तथा रिटायर मजदूरों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। 
    
अगर फैक्टरी में सुरक्षा की बात की जाए तो मजदूरों की जान को खतरे में डालकर उनसे उत्पादन करवाया जा रहा है। ये इसलिए है ताकि सुरक्षा में खर्च कम किया जा सके। जब अभी हड़ताल चल ही रही है तब दो दुर्घटनाएं फैक्टरी में हो चुकी हैं। 
    
ऐसा नहीं है कि पेट्रोब्रास कम्पनी घाटे में है। हकीकत यह है कि मुनाफे का अधिकांश हिस्सा शेयर होल्डर को बांट दिया जाता है जो अधिकतर विदेशी हैं। दूसरी तरफ पेट्रोब्रास के मजदूर मात्र 9.8 प्रतिशत की वेतन वृद्धि चाहते हैं उनको कम्पनी मात्र 5.66 प्रतिशत वेतन वृद्धि देने की बात कर रही है। यह महंगाई के हिसाब से काफी कम है। कम्पनी के शेयर होल्डरों को और ज्यादा मुनाफा देने के लिए कम्पनी ने ठेके या आउटसोर्स के माध्यम से अधिकांश मजदूरों को काम पर रखा है। 50,000 मजदूर जहां कम्पनी की तरफ हैं वहीं 1 लाख मजदूर आउटसोर्स के माध्यम से रखे गये हैं।
    
वहीं डाक कम्पनी कोरिओस की बात की जाए तो इसके कर्मचारी राष्ट्रपति लूला द्वारा कम्पनी के निजीकरण करने के प्रयासों के खिलाफ संघर्षरत हैं। लूला कम्पनी की रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर कम्पनी के कर्मचारियों की छंटनी करना चाहते हैं। उनकी योजना के अनुसार 10,000 कर्मचारियों की छंटनी की जानी है जिससे 1000 पोस्ट आफिस बंद हो जाएंगे। जिसके परिणामस्वरूप ब्राजील के दूरस्थ क्षेत्रों में डाक सेवा प्रभावित होगी। साथ ही कम्पनी की रियल स्टेट सम्पत्तियों को भी बेचे जाने की योजना है। सरकार कम्पनी के घाटे में होने का रोना रोकर अपनी इस योजना को कार्यान्वित करना चाहती है। 
    
ब्राजील की इन कम्पनियों के मजदूरों का आक्रोश इस बात की वजह से भी है कि पिछली सरकार बोलसानारो के समय निजीकरण की जो नीतियां बनायी गयी थीं उन्हीं नीतियों पर लूला सरकार भी आगे बढ़ रही है जबकि लूला पहले निजीकरण का विरोध करते थे। इससे साफ पता चलता है कि लूला पहले जो समाजवाद की बातें करते थे आज वे उन सबको छोड़ चुके हैं। उनसे इस तरह की उम्मीदें करना बेमानी है।
 

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