* भारत में 15 से 29 वर्ष की उम्र के नौजवानों की आबादी 36 करोड़ 70 लाख है। इनमें से 26 करोड़ 30 लाख नौजवान शिक्षा के क्षेत्र से बाहर हैं। और देश के संभावित श्रम बल का हिस्सा हैं।
* देश में तृतीयक शिक्षा (बारहवीं के बाद की शिक्षा) में भर्ती दर 28 प्रतिशत है। 1983 से 2017 के बीच इसमें ठीक ठाक वृद्धि हुई है, खास तौर पर महिलाओं के मामले में।
* 2017 से 2024 के बीच शिक्षा छोड़ने वाले नौजवानों का हिस्सा बढ़ा है। 2017 में 38 प्रतिशत नौजवान शिक्षा हासिल कर रहे थे जो कि 2024 में घटकर 34 प्रतिशत हो गया। शिक्षा छोड़ने का सबसे आम कारण पारिवारिक आय में योगदान करने की जरूरत बन गया है।
* उदारीकरण के बाद से उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या 1644 से बढ़कर 69,534 हो गयी है। 2010 में प्रति लाख नौजवानों पर 29 काॅलेज थे जो कि 2021 में 45 हो गये हैं। यद्यपि उत्तरी और पूर्वी राज्यों में यह संख्या कम है।
* 2007 से 2017 के बीच तृतीयक शिक्षा में सबसे गरीब घरों के बच्चों का हिस्सा 8 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है।
* समृद्ध घरों के नौजवानों के लिए ज्यादा संभावना होती है कि वे इंजीनियरिंग या डाक्टरी जैसे पेशागत कोर्सों में दाखिला लें। इन डिग्रियों को हासिल करने का खर्च गरीब घरों के प्रति व्यक्ति कुल खर्च से ज्यादा होता है।
* 15 से 25 साल के नौजवानों की बेरोजगारी दर 40 प्रतिशत और 25 से 29 साल के नौजवानों की बेरोजगारी दर 20 प्रतिशत है।
* 2004-05 से 2023 के बीच हर वर्ष 50 लाख नौजवान ग्रेजुएट हुए। इस दौरान प्रति वर्ष 28 लाख ग्रेजुएटों को रोजगार मिला। इसमें से सिर्फ 17 लाख ग्रेजुएटों को वेतन वाला रोजगार मिला। इसने ग्रेजुएटों की बेरोजगारी और धीमी आय वृद्धि में इजाफा किया है।
* ग्रेजुएटों में से सिर्फ 7 प्रतिशत को वर्ष भर के भीतर स्थायी वेतन वाला रोजगार मिल पाता है।
* खेती में लगने वाले श्रम बल का हिस्सा लगातार गिरता गया है। नौजवानों के मामले में यह गिरावट ज्यादा है। 1983 में 20-29 आयु वर्ग के 56 प्रतिशत पुरुष और 30-64 आयु वर्ग के 58 प्रतिशत पुरुष खेती में लगे थे। इन सालों में लगातार गिरते हुए यह 2023 में 27 और 36 प्रतिशत था। दोनों आयु वर्ग की महिलाओं में गिरावट की यह प्रवृत्ति 2017 के बाद से उलट गयी है। 1983 में इन दोनों आयु वर्ग में खेती के श्रम बल की हिस्सेदारी 75-75 प्रतिशत थी जो कि 2017 में घटकर क्रमशः 44 और 56 हो गयी। 2023 में यह पुनः बढ़कर 49 और 63 हो गयी।
* पलायन करने वाले कामगारों में नौजवानों का हिस्सा 40 प्रतिशत है। देश के गरीब और कम औसत आयु वाले राज्यों से देश के समृद्ध और अधिक औसत आयु वाले राज्यों की तरफ पलायन की आम दिशा है। बिहार और उत्तर प्रदेश से पलायन हुआ है तो पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की तरफ पलायन हुआ है।
(स्रोतः स्टेट आफ वर्किंग इंडिया, 2026)