धर्मस्थला मंदिर और रसूखदार लोग

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कर्नाटक में धर्मस्थला के आस-पास कत्ल करके सैकड़ों लाशें दफनाई गई हैं। इस बात के खुलासे ने लोगों का दिल दहला दिया है। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में धर्मस्थला नामक शिव का मंदिर है जो कि नेत्रावती नदी के किनारे पर बसा हुआ है। इस मंदिर के आस-पास के इलाके में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की निगरानी में खुदाई हो रही है। इस खुदाई में यह पता लगाने की कोशिश जा रही है कि क्या वहां जमीन के भीतर कंकाल दबे हुए हैं या नहीं?
    
दरअसल इस प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल धर्मस्थला में काम करने वाले पूर्व सफाई कर्मचारी ने मजिस्ट्रेट के सामने दावा किया कि उन्होंने एक रसूखदार परिवार और उनके कर्मचारियों के कहने पर यहां पर सैकड़ों शवों को दफनाया था। उसने दावा किया कि 1998 से 2014 के बीच दफनाए गए इन शवों में महिलाएं और लड़कियां थीं, जिनको बलात्कार के बाद मार दिया गया था। कुछ पुरुषों की भी हत्या की गई थी। उसने बताया कि इन शवों को 13 से 15 अलग-अलग जगहों पर दफनाया गया था।
    
पूर्व सफाई कर्मचारी ने बताया कि वह 1995 से 2014 के बीच नेत्रावती नदी के किनारे नियमित रूप से सफाई का काम करता था। कुछ दिनों बाद उसको गंभीर अपराधों के साक्ष्य छिपाने को कहा गया। उसने कई महिला शव देखे जो बिना कपड़ों के थे और जिन पर बलात्कार और मारपीट के स्पष्ट निशान थे। उसके अनुसार जब उसने इस बारे में पुलिस को बताने की बात कही तो उसके सुपरवाइजरों ने मना कर दिया व उसे धमकियां दी गईं। कहा गया, ‘‘हम तुम्हें टुकड़ों में काट देंगे,’’ ‘‘तुम्हारा शव भी बाकी लोगों की तरह दफना दिया जाएगा,’’ और ‘‘हम तुम्हारे पूरे परिवार को मार डालेंगे।’’
    
एफआईआर में उसने दो घटनाओं का जिक्र किया है। जिसमें एक 12 से 15 साल के बीच की किशोरी रही होगी और एक 20 साल की लड़की। उनमें से एक का चेहरा तेजाब से जला था। उनके शरीर पर नाम मात्र के कपड़े थे। उनके साथ बलात्कार के स्पष्ट निशान थे। एक की गर्दन पर गला घोंटने के निशान थे। उसने बताया ‘‘मुझे कहा गया कि गड्ढा खोदकर उन्हें और उनके सामान को दफना दूं। इन घटनाओं को मैं भुला नहीं पा रहा हूं। वो दृश्य आज भी मेरी आंखों में ताजा हो जाते हैं’’।
     
पूर्व सफाई कर्मचारी ने कहा कि वह इस मानसिक दबाव को और नहीं झेल सका और अपने परिवार के साथ राज्य से बाहर चला गया। लेकिन आत्मग्लानि की वजह से वह जी नहीं पा रहा है। इसलिए यहां बताने आ गया। इतना सब बताने के बावजूद उन अपराधियों के नाम उसने नहीं बताए। केवल इतना कहा कि वे लोग बहुत प्रभावशाली हैं। विरोध करने वालों को खत्म कर सकते हैं। उसने कहा कि जैसे ही उसे और उसके परिवार को कानून के तहत सुरक्षा मिलेगी, वह सभी नाम और उनकी भूमिका सार्वजनिक करने के लिए तैयार है।
    
इसके बाद 19 जुलाई को कर्नाटक सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। इस टीम को शिकायतकर्ता की मदद से चिह्नित किए गए 13 स्थानों पर खुदाई का काम सौंपा गया है। 29 जुलाई से खुदाई शुरू हो चुकी है। उनमें से कुछ जगहों पर कुछ कंकाल मिले हैं। लेकिन पुलिस ने कहा है कि फारेंसिक जांच के बाद ही कोई अंतिम राय बनाई जा सकती है जबकि 13 वें स्थान पर अभी तक खुदाई नहीं हुई है। जिस जगह पर सबसे ज्यादा कंकाल बताए जा रहे हैं।
    
इस घटना ने धर्मस्थला को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है लेकिन इससे पहले भी इस तरह की आपराधिक घटनाएं वहां होती रही हैं।
    
सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में स्थानीय पुलिस ने बताया कि 2001 से 2011 के बीच धर्मस्थला और उसके पड़ोसी गांव उजिरे में कुल 452 अप्राकृतिक मौतें दर्ज हुईं। इन 452 मौतों का संबंध उन दफन की गई लाशों से नहीं है जिनका दावा पूर्व सफाईकर्मी ने किया था। यह वह मामले हैं जिनकी कथित रूप से पुलिस को शिकायत की गई थी लेकिन पुलिस ने जांच नहीं की। केवल दो गांवों से इतनी संख्या में अप्राकृतिक मौतें होना असामान्य है। 
    
अप्राकृतिक मौत के बारे में स्थानीय निवासियों ने बताया कि एक टीचर को जलाकर मार दिया गया था, क्योंकि उन्होंने धर्मस्थला के रसूखदार लोगों के खिलाफ अदालत का रुख किया था। एक अन्य मामला 2003 का है जब एक फर्स्ट ईयर की मेडिकल छात्रा धर्मस्थला से लापता हो गई। वह अपने दोस्तों के साथ घूमने आई थी। उसकी मां का आरोप है कि पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से भी इनकार कर दिया।
    
ऐसी ही एक घटना में अक्टूबर 2012 में एक नाबालिग लड़की का निर्वस्त्र शव मिला, जिस पर जगह-जगह चोट के निशान थे। उसकी मां ने बताया कि उसके शरीर को देखकर कोई भी बता सकता था कि उसके साथ कई लोगों ने बलात्कार किया था। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौत की जांच बहुत लापरवाही से की गई। परिवार की शिकायत में धर्मस्थला के जिन चार रसूखदार लोगों का नाम था उन्हें क्लीन चिट दे दी गयी।
    
पूर्व सफाई कर्मचारी के आरोप और बाकी मामलों में एक समानता यह है कि सभी आरोप धर्मस्थला मंदिर के उसी परिवार की ओर इशारा करते हैं, जो इस मंदिर का संचालन करता है। दोषी धर्म और भगवान की आड़ लेकर ये सब करते हैं। अब दो और गवाह इस मामले में इस गोरखधंधे को उजागर करने के लिए सामने आ गये हैं। मंदिर संचालकों ने शुरू में अदालत से मंदिर को बदनाम करने के आरोप के जरिये 8000 खबरों को वेबसाइट से हटाने का आदेश प्राप्त कर लिया था। हालांकि बाद में ऊपरी कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। पुलिस द्वारा खुदाई के काम में रुकावट पैदा करने के नाम पर कुछ लोग गिरफ्तार किये गये हैं। यह सब दिखाता है कि संचालक कितने ताकतवर व पहुंच वाले हैं। मंदिर के संचालक वीरेन्द्र हेगड़े वर्तमान में राज्यसभा में मनोनीत सांसद हैं और ये कर्नाटक रत्न पुरुस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। इनके कई इंजीनियरिंग-मेडिकल कालेज, अस्पताल चलते हैं। 2012 में सौजन्या हत्याकांड में हेगड़े से जुड़े लोगों पर हत्या का आरोप लगा था। 
    
इन सब चीजों के बाद भी खुदाई में देरी की जा रही है। आखिर क्यों? पूर्व सफाई कर्मचारी के परिवार को पुलिस सुरक्षा देकर अपराधी का नाम जान कर भी अभी तक क्यों नहीं पकड़ा गया? यह संदेह पैदा करता है कि अपराधियों को सबूत मिटाने का मौका तो नहीं दिया जा रहा? कहीं इन रसूखदार लोगों को सरकार और पुलिस का संरक्षण तो प्राप्त नहीं है?
    
यह किसी से छुपा नहीं है कि धर्म की आड़ लेकर धर्मगुरु, रसूखदार लोग इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं। आसाराम, रामरहीम, प्रज्ज्वल रेवन्ना इनके उदाहरण है। यह भी किसी से नहीं छुपा हुआ है कि ये जो भी रसूखदार लोग या बाबा होते हैं इनको सरकार और राजनीतिक पार्टियों का संरक्षण होता है।     
    
धर्मस्थला की इस घटना में भी देखना होगा कि अपराधियों को सजा होती है या किसी बहाने से रसूखदार लोगों को बचाने की कोशिश?

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