हरियाणा प्रदेश के सभी 22 जिलों में लिपिकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

5 जुलाई 2023 से हरियाणा प्रदेश के सभी 22 जिलों के लगभग सभी लिपिक अपने-अपने जिला मुख्यालयों में राज्य स्तरीय अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ चुके हैं। यहां हड़ताल लिपिकों ने अचानक नहीं की है। पिछले करीब ढाई साल से क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी हरियाणा (ब्।ॅै) जो भारतीय मजदूर संघ से संबंध है, अलग-अलग रूपों में संघर्ष कर रही है। लगभग सभी मंत्रियों-मुख्यमंत्री को कई ज्ञापन दिए जा चुके हैं। 
    
18 मई 2023 रविवार के दिन सीएम सिटी करनाल में एक बड़ा प्रदर्शन किया गया जिसमें राज्य सरकार ने 4 जुलाई तक का समय मांगा या यूं कहिए कि सरकार को 4 जुलाई तक का समय दिया गया कि वह लिपिकों की मांग पर गंभीरता से विचार करे अन्यथा 5 जुलाई 2023 से सभी लिपिक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे, यह अल्टीमेटम सरकार को पहले ही दिया जा चुका था। लिपिक कर्मचारियों की मुख्य मांग बेसिक वेतन 35,400 रुपए करने की है। अभी तक लिपिकों का ग्रुप सी के कर्मचारियों में बेसिक वेतन सबसे कम 19,900 रुपए है और काम का बोझ बहुत अधिक है। लगभग सरकार की सभी योजनाओं को व्यवहार में लागू करने में उन्होंने काफी मेहनत की है इसलिए वे मेहनताने की सही रकम के हकदार हैं जो लिपिकों को मिलनी चाहिए।
    
लिपिकों का कहना है कि डच्भ्क्, श्रठज्, जूनियर इंजीनियर और डिप्टी रेंजर सभी का 2016 से बेसिक वेतन 35,400 रुपए हो चुका है सिर्फ लिपिकों का ही बेसिक वेतन नहीं बढ़ा है। हरियाणा प्रदेश को डिजिटलाइजेशन और पीपीपी आईडी कार्ड हरियाणा प्रदेश में सबसे पहले लागू हुआ है जिससे लिपिकों का काम तो बड़ा है पर बेसिक वेतन नहीं।
    
5 जुलाई 2023 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठने के बाद दो चक्र की वार्ताएं (पहली 13 जुलाई व दूसरी 21 जुलाई को) हो चुकी हैं। 21 जुलाई की वार्ता के बाद लिपिकों ने अपने संघर्ष को थोड़ा बढ़ाया और प्रतिदिन 5 लिपिक जिला मुख्यालय पर क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे, यह निर्णय लिया गया। दोनों ही पक्षों का कहना है कि अभी तक की चली वार्तायें लगभग ठीक-ठाक रहीं। एक-दूसरे को समझने और मांगों को ढंग से पहचानने की रहीं। उम्मीद लगाई जा रही थी कि तीसरे चक्र की वार्ता जो बुधवार 26 जुलाई को होनी थी, में कोई सकारात्मक हल निकले।
    
तीसरे चक्र की वार्ता के बाद सरकार का रुख साफ हो गया कि वह लिपिकों की मांग मानने को तैयार नहीं है। सरकार ने 21,700 रुपये बेसिक वेतन करने की बात की और साथ में अपनी तारीफ करते हुए यह कहा कि हम दिल्ली से, पंजाब से, हिमाचल से लिपिकों को अधिक वेतन दे रहे हैं। सिर्फ यूपी में ही लिपिकों को 21,700 रुपये बेसिक वेतन दिया जा रहा है, हम भी 21,700  रुपये बेसिक वेतन देने को तैयार हैं अन्यथा अभी भी लिपिक संघ अगर नहीं माना तो सरकार को मजबूरन कार्रवाई करनी होगी। सरकार ने सभी जिला आयुक्तों से लिपिकों के हड़ताल पर जाने से हुए नुकसान की रिपोर्ट देने को कहा है और साथ में सभी लिपिकों को नो वर्क नो पेमेंट की धमकी भी दे डाली है। मुख्यमंत्री के ओएसडी जवाहर यादव जो वार्ताओं में सरकार की तरफ से हैं उन्होंने यह तक कह डाला कि अब जनता ही लिपिकों के विरोध में उतरेगी जो लिपिकों के हड़ताल पर जाने से काफी परेशानी उठा रही है जैसे सरकार की कोई जिम्मेदारी ही ना हो।
    
लिपिकों की राज्य स्तरीय अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। अब यह देखना होगा कि सरकार क्या रुख अख्तियार करती है। वैसे लिपिकों के संघ को भी समाज के अन्य शोषित-उत्पीड़ित जनता के प्रति सही रुख अख्तियार करते हुए अपने संघर्ष में साथ लेने के लिए प्रयास करने चाहिए। साथ ही लिपिकों को संघ-भाजपा से जुड़े भारतीय मजदूर संघ से संबद्धता पर भी सोचना चाहिए क्योंकि यह भारतीय मजदूर संघ ही है जो एक ओर मजदूरों में साम्प्रदायिक विभाजन फैला रहा है तो दूसरी ओर सरकार द्वारा थोपी जनविरोधी नीतियों से संघर्ष के मामलों में कोई भागीदारी नहीं कर मजदूरों की एकता को कमजोर कर रहा है। 

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