पुलिस कस्टडी में सैकुल खान की मौत

राजस्थान, जिला अलवर के गांव टिकरी गोविंदगढ़ का निवासी सैकुल खान अलवर में रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था। उसकी अभी लगभग 2 महीने पहले ही शादी हुई थी। सैकुल को साइबर थाना एनआईटी सेक्टर-19, फरीदाबाद की टीम ने 19 जुलाई 2023 देर रात को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस के चिडवाई गांव से साइबर क्राइम के आरोप में तब गिरफ्तार किया जब वह अलवर से अपने गांव जा रहा था। 23 जुलाई 2023 लगभग सुबह 10ः00 बजे पुलिस कस्टडी में सैकुल खान की मौत हो जाती है।
    
पुलिस ने इस पूरी घटना में एक कहानी बनाई जिस पर यकीन करना दिमाग पर पट्टी बांधने जैसा है। पुलिस का कहना है कि हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ने से सैकुल खान की मौत हो गई। सैकुल खान की तबीयत खराब होने पर पुलिस उसे कई बार अस्पताल ले गई जहां डॉक्टर प्राथमिक इलाज कर उसको छुट्टी दे दिया करता था और बाद में दिल का दौरा पड़ने से सैकुल खान की मौत हो गई। सैकुल खान के मृत शरीर को देखने वाले कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उसके शरीर में इतने गहरे चोट के निशान हैं जिससे साफ समझ में आता है कि पुलिस कस्टडी में काफी टार्चर का शिकार होने से उसकी मौत हुई है।
    
परिवार का कहना है कि उन्हें 21 जुलाई को यह पता चलता है कि सैकुल खान किसी आरोप में हरियाणा, फरीदाबाद जिले की साइबर पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए हैं। बाद में हमारे पास पुलिस से फोन भी आता है कि किसी गोविंद नाम के व्यक्ति के एवज में गलती से सैकुल खान को गिरफ्तार कर लिया गया है पर अब आप घर वाले कुछ पैसे से सेवा करें तो हम सैकुल खान का नाम आरोप से हटा देंगे और बरी कर देंगे। शायद परिवारजनों ने पुलिस में किसी को पैसा अदा भी किया, निश्चित तौर पर यह सोच कर कि आज जो मुस्लिम समुदाय के नौजवानों के साथ हो रहा है और एक नैरेटिव सेट किया जा रहा है कि यह अपराधी ही होते हैं। वैसे भी यह जगजाहिर है कि कई मुस्लिम नौजवानों की बगैर किसी वजह के पुलिस कस्टडी में या पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई। हिंदू फासीवादियों द्वारा तैयार की जा रही उन्मादी भीड़ ने मुस्लिम समुदाय के कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया है और कई संघी लम्पटों की केसों में नामजद होने पर भी सजा तो क्या गिरफ्तारी तक नहीं हुई है। नासिर और जुनैद को जिंदा जला देने वाला व्यक्ति मोनू मानेसर नामजद होने पर भी खुलेआम घूम रहा है।
    
24 जुलाई सोमवार को सुबह मेवात, नूंह, फरीदाबाद के कई न्याय पसंद लोग बड़ी संख्या में फरीदाबाद के बीके अस्पताल जहां सैकुल खान की बाडी का पोस्टमार्टम होना था, पहुंचे। परिवारजनों के साथ सभी लोगों की एक ही मांग थी कि पहले उन पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो जिन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया है। उसके बाद कहीं जाकर पोस्टमार्टम किया जाना चाहिए, पहले एफ आई आर दर्ज हो फिर पोस्टमार्टम हो।
    
काफी जन दबाव के चलते फरीदाबाद पुलिस के बड़े अधिकारियों ने हत्या का मामला दर्ज किया। जिसमें इंस्पेक्टर बसंत कुमार, सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार और कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया और मृतक सैकुल खान की डेड बाडी का मजिस्ट्रेट की निगरानी में वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम किया गया। सुनने में आता है कि सब इंस्पेक्टर राजेश कुमार पहले भी लगभग 5 मामले में आरोपी है कि इसने इसी तरह मुस्लिम नौजवानों की हत्या की है। अब आगे देखते हैं कि मृतक सैकुल खान को और उसके परिवारजनों को कितना न्याय मिलता है। वैसे सत्ता में बढ़ते जा रहे हिंदू फासीवादी असर को देखने से तो साफ नजर आ रहा है कि क्या न्याय मिलने वाला है क्योंकि पुलिस भी तो वर्दीधारी संघियों की भूमिका निभा रही है।

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