किर्बी के मजदूर नेताओं पर लगाये फर्जी मुकदमों का विरोध करो

/kirbi-kae-majadauura-naetaaon-para-lagaayae-pharajai-maukadamaon-kaa-vairaodha-karao

हम किर्बी बिल्डिंग सिस्टम्स के सिडकुल हरिद्वार में काम करने वाले श्रमिक हैं। हम फैक्टरी में पिछले लगभग 20 सालों से कार्य कर रहे हैं। हमारी फैक्टरी में स्थायी एवं अस्थायी लगभग 700 मजदूर कार्य करते हैं। पिछले लम्बे समय से प्रबंधन द्वारा कम्पनी में श्रम कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा था और न ही कार्य परिस्थितियों में कोई सुधार किया जा रहा था। बुरी कार्य परिस्थितियों, लगातार बढ़ते कार्य के दबाव के कारण तथा सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण कई मजदूर दुर्घटना के शिकार हो रहे थे। जब मजदूर दुर्घटना के लिए जिम्मेदार, खराब परिस्थितियों, सुरक्षा मानकों को सही करने के लिए बोलते तो किर्बी प्रबंधन उल्टा मजदूरों को डराने-धमकाने लग जाता और नौकरी से निकाल देता।
    
प्रबंधन के इस तानाशाही पूर्ण रवैये के खिलाफ अपने कानूनी अधिकारों को हासिल करने के लिए हम मजदूर ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के तहत यूनियन का गठन करने की ओर बढ़े। 13 अप्रैल 2025 को 400 से अधिक मजदूरों ने अपनी किर्बी श्रमिक कमेटी का गठन किया। हमारी कमेटी द्वारा प्रबंधन को एवं श्रम विभाग में दिनांक 15 अप्रैल 2025 को अपनी कानूनी मांगों का सामूहिक मांग पत्र पेश किया गया। किर्बी प्रबंधन को हम मजदूरों की कमेटी बनाने व सामूहिक मांग पत्र की कार्रवाई रास नहीं आई। किर्बी प्रबंधन ने 18 अप्रैल 2025 को नेतृत्व के तीन मजदूरों समेत पांच मजदूरों को निलंबित कर दिया। हम मजदूरों ने  प्रतिरोध कर 10 दिनों तक हड़ताल की जिसमें स्थायी और अस्थायी श्रमिकों की शानदार भूमिका रही। जिसके दबाव में किर्बी प्रबंधन ने हम मजदूरों के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता संपन्न किया। समझौते में किर्बी प्रबंधन ने हम श्रमिकों के सामूहिक मांग पत्र का जल्द से जल्द निपटारा करने की बात कही थी। निलंबित कर्मकारों की जांच तीन महीने में पूरी करने एवं मजदूरों द्वारा गठित कमेटी को स्वीकारा गया था। हड़ताली सभी स्थायी एवं अस्थायी श्रमिकों को काम पर वापस लिये जाने आदि बिन्दुओं पर त्रिपक्षीय समझौता हुआ।
    
जब किर्बी प्रबंधन ने हम श्रमिकों को वर्ष 2005-2006 में भर्ती किया था तो हमें ठेकेदार के तहत भर्ती किया था। प्रबंधन ने हमारी कार्य कुशलता को देखते हुए हमें स्थाई किया था। हम आपको बता दें कि न तो प्रबंधन ने ठेके के समय भर्ती करते हुए कोई दस्तावेज मांगे थे और न ही जब स्थाई किया था तब कोई दस्तावेज मांगे गये थे। किर्बी प्रबंधन ने भर्ती के समय हम मजदूरों से कहा था कि जिस श्रमिक के पास शैक्षणिक योग्यता का जो भी दस्तावेज/सर्टिफिकेट है, वह जमा कर दे। इसके बाद किर्बी प्रबंधन ने हम मजदूरों से भर्ती के समय बहुत सारे कोरे कागजों/हलफनामों पर हस्ताक्षर भी करवाए थे। जब हमने किर्बी प्रबंधन से पूछा कि आप हमसे कोरे कागजातों/हलफनामों पर ऐसे हस्ताक्षर क्यों करवा रहे हो तब किर्बी प्रबंधन ने बोला था कि भर्ती के लिए यह जरूरी है हम इनका इस्तेमाल  भविष्य में तुम्हारे खिलाफ नहीं करेंगे। किर्बी प्रबंधन ने यह बात कह कर हम मजदूरों को आश्वस्त किया था।
    
लेकिन आज जब हम मजदूर अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यूनियन बना रहे हैं तथा श्रम कानून के अधिकार के तहत सामूहिक मांग पत्र दायर कर अपनी मांगें उठा रहे हैं तो यह बात किर्बी प्रबंधन को रास नहीं आ रही है। किर्बी प्रबंधन चाहता है कि हम सभी मजदूर पहले की तरह बिना मांग उठाए तथा बिना संगठन के चुपचाप गर्दन नीचे करके गुलामों की तरह कार्य करते रहें। आज किर्बी प्रबंधन हम मजदूरों से द्वेषपूर्ण एवं पूर्वाग्रहपूर्ण व्यवहार ही नहीं कर रहा है बल्कि एक आपराधिक साजिश रच कर हम मजदूरों का रोजगार छीनना चाहता है। भर्ती के समय कोरे कागजों/हलफनामों पर कराये गये हस्ताक्षरों को आज वह हमारे खिलाफ इस्तेमाल कर हमें फर्जी बता रहा है। हमारे नेतृत्व के साथियों पर लगातार दबाव बना रहा है कि अगर तुम किर्बी फैक्टरी में यूनियन बनाओगे और सामूहिक मांग पत्र को वापस नहीं लोगे तो किर्बी प्रबंधन ने तुम्हारे भर्ती के समय कोरे कागजों/हलफनामों पर हस्ताक्षर करवाये थे, को तुम्हारे खिलाफ इस्तेमाल करके तुम्हें जेल भिजवा देंगे।
    
हम मजदूर पिछले लगभग 20 वर्षों से उत्पादन कार्य कर रहे हैं। आपको यह भी बता दें कि किर्बी प्रबंधन के पास श्रमिकों की भर्ती का कोई क्राइटेरिया या मापदंड नहीं है जब किर्बी प्रबंधन के पास श्रमिकों की भर्ती का कोई क्राइटेरिया या मापदंड ही नहीं है तो फिर हम श्रमिक भला क्यों ऐसे दस्तावेज देंगे जो हमारे पास हैं ही नहीं। यह किर्बी प्रबंधन का स्वयं का किया गया फर्जीवाड़ा है जो उसने भरती के समय हम मजदूरों से कोरे कागजों/हलफनामों पर हस्ताक्षर करवा कर किया है।
    
किर्बी बिल्डिंग सिस्टम्स प्रबंधन द्वारा नौकरी/नियोजन प्राप्त करने के लिए आई टी आई व डिप्लोमा आदि की योग्यता की कोई भी न्यूनतम अनिवार्य पात्रता/अर्हता की आवश्यकता नहीं थी। मात्र 18 वर्ष मजदूर की आयु जरूरी थी। अनपढ़ और 5वीं, 8वीं, 10वीं पास कारखाने में फिटर, वेल्डर, कटर आदि अति कुशल पद पर नियोजित हैं तो फिर हम प्रार्थीगण रोजगार हासिल करने को आई टी आई, डिप्लोमा आदि का फर्जी प्रमाणपत्र क्यों लगाते जिसकी रोजगार प्राप्त करने के लिए कोई भी आवश्यकता नहीं थी। स्पष्ट है कि प्रबंधन उक्त किस्म का झूठा आरोप लगाकर, झूठी थ्प्त् दर्ज कराके हमें प्रताड़ित करना चाहता है।
    
प्रबंधन ने नियुक्ति के समय यह कहकर सभी मजदूरों से कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए, कि यदि आपने हस्ताक्षर नहीं किए तो आप स्थायी नहीं होंगे। आज जब मजदूर एकजुट होकर अपने हक की बात कर रहे हैं तो इसका दुरुपयोग किया जा रहा है व मजदूरों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। कमेटी सदस्यों को यह कहकर धमकाया जा रहा है कि ‘‘यदि आप हमारी बात नहीं मानोगे तो फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भिजवा देंगे।’’ चार मजदूरों को प्रबंधन द्वारा फर्जी प्रमाण पत्रों के नाम पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें से दो मजदूरों से डरा-धमका कर जबरन त्यागपत्र लिखवा लिया गया तथा दो मजदूर नेताओं पर कमेटी से हटने और सामूहिक मांग पत्र वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। 
    
हम मजदूर 15-20 वर्षों से कार्यरत हैं और हमारे द्वारा कार्य व्यवहार में कोई शिकायत नहीं रही है। केवल अपने वैधानिक हक की मांग करने पर पूर्वाग्रहपूर्ण भावना से व द्वेषपूर्ण भावना से हमें फर्जी मामलों में फंसाने की साजिश की जा रही है। किर्बी प्रबंधन के अधिकारियों के विरुद्ध मजदूरों के जीवन और आजीविका के साथ खिलवाड़ करने, कोरे कागजों पर हस्ताक्षर लेकर दुरुपयोग करने, डरा-धमका कर त्यागपत्र लेने, एवं श्रमिक नेताओं को द्वेषपूर्ण सोच व पूर्वाग्रहपूर्ण कार्यवाही से फर्जी मुकदमों में फंसाने के खिलाफ किर्बी कम्पनी के मजदूरों ने थाना सिडकुल में शिकायत की है। थाने में जब मजदूर प्रबंधन वर्ग की शिकायत करते हैं तो पुलिस अधिकारी एफ आई आर दर्ज करना तो दूर, रिसीविंग तक नहीं देते हैं। 
    
कम्पनियां रोज श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाती हैं, सेफ्टी कानूनों के अधिकारों से मजदूरों को महरूम रखा जाता है जिसकी वजह से आये दिन मजदूरों के हाथ-पैर कटने के साथ-साथ मजदूरों की जिन्दगियां भी खत्म होती रही हैं।
    
ठेका मजदूरों से मशीनों का संचालन कराना कानूनी रूप से अपराध है, लेकिन किर्बी प्रबंधन अकुशल-ठेका श्रमिकों से सारी मशीनें चलवाता है जिस पर श्रम विभाग भी मौन है।
    
किर्बी के मजदूरों को भर्ती के समय से वर्तमान समय तक कोई महंगाई भत्ता बढ़ाने का लाभ नहीं दिया गया है। जबकि सरकार द्वारा वर्ष में दो बार महंगाई भत्ता का लाभ मजदूरों को दिया जाता है। किर्बी प्रबंधन ने महंगाई भत्ता 20 साल से 300 रुपए फिक्स कर रखा है जबकि आज महंगाई आसमान छू रही है।
    
भर्ती के समय से मजदूरों से 8ः30 घंटे काम लिया जा रहा था। अब कुछ समय से 8ः15 घंटे काम लिया जा रहा है। इसके अलावा ट्रेनिंग या मीटिंग ड्यूटी के बाद के समय में की जाती है। ये अतिरिक्त घंटों का करोड़ों रुपए में ओवर टाइम बैठता है।  
    
उपरोक्त कानूनों का उल्लंघन करने पर सारा सरकारी तंत्र चुप रहता है। परन्तु 20 साल से काम कराने के बाद आज छंटनी के नाम पर चार मजदूरों को फर्जी प्रमाण पत्रों के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा गया। दो मजदूरों से पुलिस की धमकी देकर, डरा-धमका कर त्यागपत्र ले लिया गया। दो मजदूर नेताओं पर सिडकुल थाने में केस दर्ज कर दिया गया है परन्तु किर्बी के समस्त मजदूर इसका डटकर मुकाबला कर रहे हैं। क्योंकि सभी मजदूरों से भर्ती के समय कोरे कागजों/हलफनामों पर हस्ताक्षर लिये हैं। यदि कोई भी मजदूर अपने हक अधिकार की बात करेगा तो उस मजदूर द्वारा हस्ताक्षरित कोरे कागजों पर कुछ भी लिख कर बाहर करने के लिए प्रबंधन ने इंतजाम कर रखा है।
    
मजदूरों का स्पष्ट कहना है कि हमारे श्रम की चोरी प्रबंधन वर्ग करता है, श्रम कानून प्रबंधन वर्ग तोड़ता है। 20 साल काम करने पर जब मजदूर द्वारा बनाया गया उत्पाद फर्जी नहीं है तो मजदूर फर्जी कैसे हो सकता है? एक तरफ मोदी सरकार 3 महीने के अनुभव के बाद कुशलता का प्रमाण पत्र दे रही है वहीं 20 साल काम कर रहे मजदूरों को फर्जी बताया जा रहा है। यह मजदूरों पर अघोषित छंटनी का हमला है जो किर्बी से शुरू हो कर पूरे सिडकुल में फैलेगी। इसकी शिकार वे मजदूर यूनियनें होंगी या वे नेता होंगे जो मजदूरों की सामूहिक मांगों को उठायेंगे।
    
हरिद्वार में मजदूर यूनियनों के संयुक्त मोर्चे द्वारा किर्बी प्रबंधन के हमले के खिलाफ 1 सितंबर को डी एम कार्यालय तक जुलूस निकालकर प्रदर्शन करने का एलान किया गया है। मजदूरों पर ये हमला किर्बी में ही नहीं है, आज देशी-विदेशी पूंजीपतियों द्वारा भारत सहित पूरी दुनिया में मजदूरों के श्रम अधिकारों पर व मजदूरों के न्यायपूर्ण संघर्षों का दमन किया जा रहा है। इस दमन-उत्पीड़न का जवाब मजदूरों को अपनी वर्गीय एकता के दम पर ‘‘दुनिया के मजदूरों एक हो’’ नारे के साथ देना होगा। इस मुनाफे पर आधारित पूंजीवादी समाज व्यवस्था को दफन कर मजदूर राज समाजवाद को लाने के लिए संघर्ष को तेज करना होगा। 
        -एक मजदूर, हरिद्वार

आलेख

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि