सभ्यताएं न एक रात में पैदा होती हैं और न एक रात में मरती हैं

Published
Thu, 04/16/2026 - 15:50
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ईरान पर अमेरिकी इजरायली हमलों के खिलाफ दुनिया भर में तीखे हो रहे मजदूर मेहनतकश जनता के आक्रोश के बीच ईरान और अमेरिका दो सप्ताह के युद्ध विराम पर सहमत हुए हैं। अमेरिकी साम्राज्यवादी यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस युद्ध में उनकी जीत हुई है। अमेरिकी सरकार के अधिकारियों और मंत्रियों को इस युद्ध में अपनी असफलता को छिपाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन तमाम सवालों का जिनका वे जवाब नहीं दे पा रहे हैं, उनसे बचने के लिए उनके पास एक ही तर्क होता है कि यह युद्ध उन्होंने ऐसी ताकत के खिलाफ छेड़ा है, जो पिछले पचास सालों से अमेरिका का अंत करने की कसमें खा रहा था। वे ट्रंप से पहले के सभी राष्ट्रपतियों के बारे में ताने मार रहे हैं कि जिस काम को करने की वे सिर्फ बातें करते थे उसको ट्रंप ने कर के दिखाया है। यह विडंबना ही है कि अमेरिकी साम्राज्यवादियों के एक प्रतिनिधि को अपनी साख बचाने के लिए अपने पूर्ववर्तियों को जलील करना पड़ रहा है। 
    
युद्ध विराम के बावजूद ईरान इस युद्ध में हासिल हुई अपनी उपलब्धियों के प्रति मुतमईन नहीं हो सकता। जिस हद तक यह युद्ध विश्व व्यवस्था में बदलाव की गतिकी से जुड़ गया है, इसकी वजह से इस युद्ध का त्वरित निपटारा मुश्किल हो गया है। इस युद्ध में ईरान द्वारा हासिल की गयी उपलब्धियों को अगर अमेरिका और इजरायल मान्यता दे देते हैं तो इसका अर्थ होगा पश्चिम एशिया से अमेरिकी वर्चस्व का अंत। और अगर ईरान अपनी उपलब्धियों को छोड़ने को तैयार हो जाता है तो इस युद्ध में जो कीमतें उसने चुकाई है वह सब व्यर्थ जाएगा और कुछ समय बाद फिर से इतनी ही या इससे ज्यादा कीमत चुकाने के लिए उसे तैयार रहना होगा। 
    
यह युद्ध दुनिया के पैमाने पर मजदूर मेहनतकश जनता की पहले से ही खस्ता हालत को और खराब कर रहा है। दुनिया के पैमाने पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बिखराव पैदा हो रहा है। तेल, गैस, खाद की आपूर्ति बाधित हो रही है। महंगाई बढ़ रही है। तमाम देशों की अर्थव्यवस्था की गति धीमी होने की आशंकाएं अभी ही जताई जा रही है। अगर युद्ध आगे बढ़ता है तो स्थिति और भयावह होगी। 
    
भारत पर इस युद्ध का काफी बुरा असर पड़ रहा है। भारतीय रुपया किसी भी अन्य मुद्रा की तुलना में तेजी से गिर रहा है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है। कपड़ा उद्योग और कई अन्य उद्योगों में काम कम हो रहा है। सबसे कम आमदनी वाली आबादी जो कि वैसे ही अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा अपने भोजन पर खर्च करती है, रसोई गैस पर खर्च बढ़ने की वजह से अपनी गृहस्थी नहीं संभाल पा रही है। 
    
अमेरिकी साम्राज्यवादियों की काली करतूतों का खामियाजा पूरी दुनिया की मजदूर मेहनतकश जनता को उठाना पड़ रहा है। ट्रंप ने जो धमकी ईरान को दी थी कि उसकी पूरी सभ्यता नष्ट हो जाएगी, वह धमकी असल में पूरी दुनिया की सभ्यता के लिए लागू होती है। अमेरिकी साम्राज्यवादी अपने विश्व प्रभुत्व को बचाने के लिए पूरी दुनिया की सभ्यता को संकट में डालने से बाज नहीं आएंगे। आज ईरान की जनता अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अमेरिकी साम्राज्यवादियों के सामने सीना तानकर खड़ी है और तमाम कुर्बानी देकर अपने देश की आजादी की रक्षा कर रही है। पूरी दुनिया की मजदूर मेहनतकश जनता को इससे सीखने की जरूरत है। अपने ऊपर थोपी जा रही युद्ध की विभीषिकाओं से बचने के लिए पूरी दुनिया की मजदूर मेहनतकश जनता ईरानी जनता के जज्बे को हासिल करेगी। तभी ट्रंप को समझ में आएगा कि सभ्यताएं एक रात में न तो पैदा होती हैं और न एक रात में मरती हैं। 

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