समझौता लागू किए जाने, धरना प्रदर्शन पर रोक हटाने की मांग

/samjhauta-laagoo-kiye-jaane-dharana-protest-par-rok-hatane-ki-maang

पंतनगर/ दिनांक 18 जून 2025 को ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर द्वारा कुलपति पंतनगर वि.वि. एवं निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण को पत्र देकर पूर्व में हुए समझौते को लागू करने की मांग की गयी। दिनांक 14 अप्रैल 2025 को ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा पंतनगर के प्रतिनिधियों एवं विश्व विद्यालय प्रशासन वार्ता समिति के बीच यह समझौता हुआ था। इसके साथ ही मजदूरों की जायज मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन, जुलूस जैसे संवैधानिक अधिकार पर लगाई गई रोक, निषेधाज्ञा वापस लिए जाने की मांग की गई है। पत्र की प्रति उप श्रमायुक्त ऊधम सिंह नगर उत्तराखंड को भी भेजी गई है।
    
मालूम हो  कि विगत माह मार्च एवं अप्रैल में विश्वविद्यालय में कार्यरत नियमित एवं बाह्य सेवादाता के माध्यम से कार्यरत मजदूरों-कर्मचारियों की जायज 28 सूत्रीय मांगों को लेकर ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा (घटक संगठन- पंतनगर कर्मचारी संगठन, विश्वविद्यालय श्रमिक कल्याण संघ, देव भूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ, राष्ट्रीय शोषित परिषद, ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर, राष्ट्रीय सफाई मजदूर कांग्रेस) द्वारा डेढ़ महीने तक विरोध प्रदर्शन-आंदोलन किया गया था जिसके बाद ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों एवं विश्वविद्यालय वार्ता समिति के बीच 14 अप्रैल 2025 को सम्पन्न वार्ता में 28 सूत्रीय मांगों पर सहमति बनी। इस समझौते के उपरांत आंदोलन समाप्त किया गया था। पर विडम्बना है कि दो माह बीत जाने बाद भी समझौता लागू नहीं किया गया है।
    
समझौता दो माह बाद भी लागू नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण पिछले कई महीने से खाली बैठे ठेका मजदूर सुरक्षाकर्मियों को काम पर नहीं रखा जा रहा है। इनके परिवार के भरण-पोषण, जीवन यापन के संकट को और बढ़ाया जा रहा है। निःशुल्क वर्दी-पंजीकरण की बात समझौते में तय थी पर वर्दी की राशि कम करने के बजाय ठेकेदार द्वारा मनमाने तरीके से बिना सहमति के गरीब ठेका मजदूरों के वेतन से तीन-तीन हजार रुपए पंजीकरण, वर्दी के नाम पर काट लिये गये। इसकी कोई रसीद भी नहीं दी जा रही है। और न ही सुरक्षाकर्मियों को वर्ष में 11 दिनों का सार्वजनिक सवैतनिक अवकाश ही दिया जा रहा है। चतुर्थ श्रेणी के मृतक आश्रितों को नौकरी, नियमितकर्मियों को स्वास्थ्य सेवा हेतु गोल्डन कार्ड दिए जाने के मामले पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई।
    
उच्च न्यायालय उत्तराखंड द्वारा करीब 500-600 मजदूरों को नियमितीकरण किए जाने का आदेश जारी किया गया है। इन्हें भी पंतनगर वि.वि. में नियमित नहीं किया जा रहा है। सरकारी संस्था में हर मामले में श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
    
मजदूर संघर्ष न कर सकें इसके लिए प्रशासन ने यूनियन प्रतिनिधियों का स्थानांतरण कर दिया। साथ ही प्रशासन ने मुकदमा दायर कर जिला न्यायालय से 15 अप्रैल 2025 से मजदूरों के सभा, जुलूस, धरना प्रदर्शन, ट्रेड यूनियन गतिविधियों पर रोक लगवा दी। इस तरह मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। सहमति के बाद भी मजदूर नेता के स्थानांतरण वापस लिए जाने पर कार्यवाही नहीं की जा रही है। प्रशासन आंदोलन के बाद बदले की भावना से कार्यवाही कर रहा है।         
    
आज शासन-प्रशासन मजदूरों के ट्रेड यूनियन  अधिकारों को छीन रहा है। मजदूरों को संगठन विहीन, निहत्था कर शोषण-उत्पीड़न को बढ़ाकर मजदूरों को गुलामी की ओर धकेल रहा है। शासन-प्रशासन अपनी दमनकारी नीति अपनाकर मजदूरों के जनसमूह को एक बड़े उथल-पुथल की ओर धकेल रहा है। मजदूरों के शोषण-उत्पीड़न को बढ़ाने में शासन-प्रशासन का क्रूर चेहरा ही उजागर हुआ है। जिला न्यायालय के कृत्य से साबित होता है कि मजदूरों के शोषण-उत्पीड़न, दमन में अदालतें भी पीछे नहीं हैं। शासन-प्रशासन के बढ़ते हमलों का सामना यूनियनों को अपनी संकीर्ण मानसिकता त्यागकर मजदूरों की इलाकाई आधार पर एकता कायम कर जुझारू साझे संघर्षों से करनी होगी।
           -पंतनगर संवाददाता 
 

आलेख

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

/amerika-aur-china-thyuusidaidsa-phaans

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

/hindu-fascist-chunav-aayog-and-vidhansabha-chunaav

हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

/imperialism-and-abhijat-workers-class

दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।