श्रीलंका : गारमेंट कम्पनी नेक्स्ट ने 1500 नौकरियों को खत्म किया

/srilanka-garment-company-nexst-ne-1500-naukariyon-ko-khatm-kiya

ब्रिटेन की गारमेंट कम्पनी नेक्स्ट ने श्रीलंका में स्थित एक प्लांट को बंद करने का फैसला किया है। इस प्लांट के बंद होने से लगभग 1500 मज़दूर बेरोजगार हो जाएंगे। यह प्लांट कटुनायके औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। इस प्लांट के अलावा नेक्स्ट कम्पनी के दो और प्लांट हैं जिनमें उत्पादन जारी रहेगा। 
     
जब मजदूर 19 मई को काम से अपने घर लौटे तो कम्पनी ने उनको व्हाट्सएप्प मैसेज भेजा जिसमें प्लांट के बंद होने और उनको इसके बदले में छंटनी पैकेज देने की बात की गयी थी। मजदूर एकदम से फैक्टरी बंद होने से भौचक्के रह गये। प्लांट के बंद होने से महिलाओं को विशेषकर ज्यादा धक्का लगा है। 
    
अगले दिन जब वे फैक्टरी पहुंचे तो फैक्टरी पर ताला पड़ा था और वहां कोई भी प्रबंधन का व्यक्ति मौजूद नहीं था। यहां तक कि यूनियन का भी कोई व्यक्ति वहां मौजूद नहीं था। मजदूर निराश होकर फिर श्रम विभाग गये। लेकिन वहां से भी उनको कोई खास सहायता नहीं मिली। प्लांट बंद करने की अनुमति न मिलने से पहले ही प्लांट को बंद कर देना दिखाता है कि विदेशी पूंजी के प्रति सरकार का नरम रुख है। 
    
फैक्टरी बंद करने के पीछे प्रबंधन का तर्क था कि ट्रम्प द्वारा टैरिफ बढ़ाये जाने के बाद से अमेरिका को श्रीलंका से गारमेंट का निर्यात कम हो जायेगा। इसके अलावा प्लांट का प्रबंधन भी सही तरीके से नहीं हो पा रहा था। 
    
प्लांट का प्रबंधन ठीक से न हो पाने के पीछे की असलियत क्या है? दरअसल यह प्लांट श्रीलंका में 47 साल पहले लगा था। यहां काम करने वाले मजदूर भी पुराने हो चुके हैं। उनकी तनख्वाह भी ज्यादा है (आज काम करने वाले मजदूरों के सापेक्ष)। और ज्यादा वेतन पूंजीपति के लिए फायदे का सौदा नहीं रह गया है।
    
कम्पनी ने निकाले गये श्रमिकों को उनके कानूनी देयों के अलावा 2 महीने की तनख्वाह देने की बात की है। साथ ही मजदूरों को धमकाया कि अगर वे श्रम विभाग गये तो उन्हें टेवा (TEWA - Termination of Employment of Workmen Act) के तहत ही मुआवाजा मिलेगा। 
    
फैक्टरी बंद होने के सम्बन्ध में संसद में जवाब देते हुए सरकारी मंत्री ने कहा कि कम्पनी को बंद करने का फैसला कम्पनी का व्यवसायिक निर्णय है। कि कम्पनी को 2019 से 1 करोड़ डालर का नुकसान हो चुका है। साथ ही उन्होंने कहा कि कम्पनी मजदूरों को टेवा के तहत कानूनी देय देने को तैयार है। 
    
वास्तविकता यह है कि नेक्स्ट यूके ब्रिटेन के प्रमुख फैशन रिटेलरों में से एक है जो विदेशी बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले बुने हुए कपड़ों की आपूर्ति करती है। पिछले वर्ष कंपनी के लाभ में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी। वर्ष 2024-25 में 25 जनवरी तक यह लगभग 1.31 अरब डालर का कर पूर्व लाभ कमा चुकी थी। 

आलेख

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।