वेनेजुएला और कोलम्बिया में हमले की तैयारी में अमरीकी साम्राज्यवाद

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वेनेजुएला की मादुरो सरकार ट्रम्प को बर्दाश्त नहीं है? क्यों? क्योंकि वह अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा दक्षिण अमरीका और कैरेबियाई देशों को अपने प्रभुत्व में रखने की योजनाओं की विरोधी है। क्योंकि वह बहुत बड़े तेल भण्डार की मालिक है, जिसका उनके पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज ने राष्ट्रीयकरण कर दिया था। क्योंकि वेनेजुएला की मादुरो सरकार अमरीकी धुनों पर नाचने से इंकार करती है। क्योंकि वह बोलीवर के विचारों के आधार पर अमरीकी साम्राज्यवाद का विरोध करती है। इसलिए ट्रम्प ने मादुरो की हत्या के लिए सीआईए को अधिकृत कर दिया। इसलिए उसने वेनेजुएला की सत्ता को ड्रग तस्करी करने का सरगना कहा। इसलिए उसने कैरेबियन सागर में निर्दोष लोगों की ड्रग तस्कर कहकर हत्यायें कीं। इसलिए उसने वेनेजुएला के नजदीक बमवर्षक विमानों को भेजा, इसलिए अब वह दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत जेराल्ड आर.फोर्ड को कैरेबियन सागर में तैनात कर रहा है। 
    
यह वेनेजुएला पर जमीनी हमला करने की तैयारी है। एक अमरीकी सांसद ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को यह सलाह दे डाली है कि वे समय रहते रूस या चीन चले जायें। यह ‘‘सत्ता परिवर्तन’’ की खुली धमकी है। इस पोत को ट्रिनिदाद और टोबैगो के किनारे तैनात किया है। यह वेनेजुएला की सीमा से बहुत नजदीक है। इस अमरीकी बेड़े में 70 लड़ाकू जेट और हमलावर हैलीकाप्टरों के साथ एक विमान वाहक पोत, 30 टिल्ट-रोटर विमानों और हमलावर हैलीकाप्टरों के साथ एक हैलीकाप्टर वाहक और लगभग 2000 मरीन, हमलावर लैडिंग बल का नेतृत्व, एक निर्देशित मिसाइल क्रूजर, छः या अधिक विध्वंसक और अन्य जहाज शामिल होंगे। 
    
ट्रम्प इसे नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान का नाम देते हैं। लेकिन इतनी बड़ी सैन्य उपस्थिति नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान के लिए महज नहीं हो सकती। 
    
यह राष्ट्रपति मादुरो की सत्ता को उलटने की एक तैयारी है। वैसे तो अमरीकी साम्राज्यवादी लम्बे समय से वेनेजुएला की सत्ता को पलटने की तैयारी करते रहे हैं। 2002 में इन्होंने ह्यूगो शावेज का तख्तापलट करा दिया था। लेकिन 48 घण्टे के अंदर ही व्यापक जन विद्रोह के बल पर ह्यूगो शावेज फिर से सत्तारूढ़ हो गये थे। इसके बाद अमरीकी साम्राज्यवादी लगातार प्रतिक्रियावादी तत्वों को लेकर बोलिवाई सत्ता को उखाड़ने की कोशिश करते रहे हैं। एक बार तो एक अज्ञात से व्यक्ति को अमरीकी साम्राज्यवादियों ने सत्ता पर बिठा कर उसे राष्ट्रपति घोषित कर दिया। उसे मान्यता भी दे दी। लेकिन वेनेजुएला के अंदर किसी भी सामाजिक वर्ग से उसे समर्थन नहीं मिला और वह फिर से अमरीका की शरण में चला गया। अभी जिस महिला को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है, वह भी बोलिविराई सत्ता को हटाने के लिए अमरीकी साम्राज्यवाद की सेवा में लगी रही थी। उसे भी सफलता नहीं मिली। 
    
अब डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमरीकी साम्राज्यवादी सीधे तौर पर सैनिक हमला करके मादुरो को सत्ता से हटाना चाहते हैं। लेकिन समूचा दक्षिण अमरीका जिस तरह दो खेमों में बंटा हुआ है, उससे इसके परिणाम भयंकर हो सकते हैं। अमरीकी साम्राज्यवादी समूचे लातिन अमरीका को अपने अधीन क्षेत्र के बतौर आचरण करते रहे हैं। जब चाहा, सत्ता पलट करा दिया। अपना कठपुतली शासक नियुक्त किया। लेकिन आज जहां कुछ देशों के शासक अमरीकी साम्राज्यवादियों के साथ खड़े हैं वहीं अन्य देशों के शासक अमरीकी साम्राज्यवादियों की प्रभुत्वकारी नीतियों का विरोध करते हैं। इनमें क्यूबा, निकारागुआ और इस समय कोलम्बिया के शासक हैं। ब्राजील दक्षिण अमरीका का सबसे बड़ा देश है और वह ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है। ब्राजील सहित ये देश और इनके क्षेत्रीय संगठन मादुरो को सत्ताच्युत करने की अमरीकी साम्राज्यवादियों की साजिशों के विरुद्ध हैं। 
    
यहां यह ध्यान देने की बात है कि अमरीकी साम्राज्यवादी सरगना डोनाल्ड ट्रम्प जहां शांति स्थापित करने वाले राष्ट्रपति होने का दावा करता है, वहीं वह कहीं भी वास्तविक शांति स्थापित नहीं कर पा रहा है। उल्टे वह संघर्ष के नये क्षेत्र और नये रूप गढ़ रहा है। न तो वह इजरायल की यहूदी नस्लवादी सत्ता द्वारा गाजा पट्टी और पश्चिमी किनारे पर हमलों को रोक पा रहा है और न ही वह यूक्रेन युद्ध को रोक पा रहा है। हालांकि उसने यह अपने चुनाव प्रचार में कहा था कि राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के 24 घण्टे के भीतर वह रूस-यूक्रेन युद्ध रोक देगा। लेकिन वह अभी तक इसे रोकने में कामयाब होना तो दूर, वह कभी यूक्रेन को तो कभी रूस को व्यापक तबाही की धमकी दे रहा है। अब ट्रम्प ने वेनेजुएला के साथ-साथ कोलम्बिया को भी अपने हमले के निशाने में लिया है। कोलम्बिया के राष्ट्रपति ने गाजापट्टी में इजरायली नरसंहार को लेकर अमरीका की निंदा की थी। उसने कैरेबियन सागर में नौकाओं पर गोलीबारी करके निर्दोष मछुवारों की हत्याओं पर अमरीकी साम्राज्यवाद की निंदा की थी। इसलिए कोलम्बिया के राष्ट्रपति भी ट्रम्प के निशाने पर आ गये। उसने कोलम्बिया पर भी नशीले पदार्थों की तस्करी में हिस्सेदार होने का आरोप लगाया। 
    
अमरीकी साम्राज्यवादियों को युद्ध की लगातार जरूरत है। यह अमरीका के सैनिक- औद्योगिक तंत्र की जरूरत है। यदि युद्ध नहीं होंगे तो हथियार और गोला बारूद की जरूरत नहीं होगी। यदि इनकी बिक्री बंद हो जायेगी तो अमरीका का औद्योगिक-सैनिक तंत्र का कारोबार ठप होने की ओर जायेगा। चूंकि सैनिक औद्योगिक तंत्र अमरीका का मजबूत एकाधिकारी तंत्र है, इसलिए इसकी जरूरत आम तौर पर अमरीकी साम्राज्यवाद की जरूरत बन जाती है। दूसरे, लम्बे समय से अमरीका अपनी जरूरत का ज्यादा सामान, माल आयात करता है। इसके यहां औद्योगिक उत्पादन बहुत कम हो गया था। इसने अपने भारी उद्योगों को देश के बाहर कर दिया था। आज अमरीका में वित्तीय पूंजी का बोलबाला है और यह समूची दुनिया में ज्यादा मुनाफे के लिए दौड़ लगाती है। इसका औद्योगिक उत्पादन में कोई योगदान नहीं है। यह सट्टेबाजी में लगी पूंजी है। सट्टेबाजी में लगी पूंजी कभी भी किसी देश से छूमंतर हो सकती है और देशों को संकट में डाल सकती है। संकटों में फंसे देशों के लिए राष्ट्रवाद की आंधी चलाकर युद्ध में उलझना जरूरत होती है और साम्राज्यवादी इसका फायदा उठाकर युद्ध भड़काते हैं। 
    
इस प्रकार, अमरीकी साम्राज्यवादियों और आम तौर पर साम्राज्यवादियों की जरूरत युद्ध है। 
    
इसलिए अमरीकी साम्राज्यवादी किसी न किसी बहाने युद्ध करके वेनेजुएला और कोलम्बिया में सत्ता परिवर्तन की मुहिम में लगे हैं। वे इसमें कामयाब होंगे या नहीं, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा।  

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