मेघालय में 5 फरवरी को एक कोयला खदान में विस्फोट होने से 27 मजदूरों की मौत हो गयी। अभी भी कई मजदूर 100 मीटर गहरे गड्डे में फंसे हैं। यह खदान पूर्वी जयंतिया हिल्स में थांगस्कू क्षेत्र में उम्संगट गांव में स्थित है। यह खान एक रैट होल खान है। मृतकों में आस-पास के स्थानीय श्रमिकों के अलावा असम, मेघालय और नेपाल के रहने वाले थे।
बताया जा रहा है कि यह खदान अवैध रूप से चल रही थी। इस वजह से इसमें कितने मजदूर काम कर रहे थे यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। खदान में आग लगने का कारण विस्फोट था जो डायनामाइट के कारण हुआ। डायनामाइट से विस्फोट करने वाले दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। संभवतः ये ही इस कोयला खदान के मालिक भी हैं।
मेघालय में इससे पहले भी कई कोयला खदान विस्फोट हो चुके हैं। 2018 में पूर्वी जयंतिया हिल्स में एक बाढ़ग्रस्त खदान में 15 श्रमिकों की मौत हो गयी। 2021 में एक अन्य घटना में 5 खदान श्रमिकों की मौत हो गयी।
मेघालय में एन जी टी द्वारा 2014 से ही रैट होल खनन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद इस तरह खनन पर रोक लग ही नहीं पा रही है। दरअसल मेघालय में रोजगार के अवसर कम होने के चलते यहां खनन का काम रोजगार का प्रमुख साधन है। ऐसे में राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी थी कि वह रोजगार के साधन उपलब्ध करवाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। यही करण है कि पूर्वी जयंतिया हिल्स में अवैध खनन का काम बढ़ रहा है। और यह सामान्य बन गया है। जिससे कारण मजदूर अपनी जान गंवाते रहते हैं।