‘‘अंधराष्ट्रवाद और मीडिया’’ विषय पर सेमिनार का आयोजन

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लखनऊ/ नागरिक अखबार द्वारा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के करण भाई सभागार में ‘‘अंधराष्ट्रवाद और मीडिया’’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से जन संगठनों, पत्रकारों तथा प्रगतिशील व्यक्तियों ने भागीदारी की।
    
कामरेड नागेंद्र की स्मृति में आयोजित सेमिनार में आधार पत्र पर बात करते हुए नागरिक के संपादक रोहित ने कहा कि वैश्विक पूंजीवादी व्यवस्था के बढ़ते आर्थिक संकट के साथ दुनिया में अंधराष्ट्रवाद की राजनीति भी जोरों पर है। हमेशा ही आजाद देशों की सम्प्रभुताओं को कुचलने वाले अमेरिकी साम्राज्यवादी आज ट्रंप के नेतृत्व में राष्ट्रवाद का चोला ओढ़कर ‘‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’’ का नारा लगा रहे हैं तो वहीं आजादी के आंदोलन के दौरान ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के समक्ष नतमस्तक रहने वाले हिंदू फासीवादी सबसे बड़े राष्ट्रवादी होने का दम भर रहे हैं। इनका राष्ट्रवाद प्रगतिशील नहीं बल्कि प्रतिक्रियावादी है। यह असल में अंधराष्ट्रवाद है। यह राष्ट्रवाद उत्पीड़ित राष्ट्रीयताओं के मुक्ति संघर्षों को कुचलने वाला और दूसरे देशों पर कब्जे के मंसूबों से प्रेरित है। पश्चिम एशिया में इजराइल के जियनवादी शासकों की ग्रेटर इजराइल और दक्षिण एशिया में भारत के हिंदू फासीवादी शासकों के अखंड भारत की परियोजनाएं अंधराष्ट्रवादी परियोजनाएं हैं। आज इस अंधराष्ट्रवाद का मुकाबला मजदूर वर्ग के अंतर्राष्ट्रवाद से ही किया जा सकता है। 
    
उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान यह अंधराष्ट्रवाद अपने चरम पर होता है। पुलवामा हो या पहलगाम का आतंकी हमला, इन पर उठे सवालों पर सरकार द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया; उलटे सवाल पूछने वालों को राष्ट्रद्रोही करार दिया गया। लेकिन इनके बहाने पूरे देश में युद्धोन्माद और अंधराष्ट्रवादी उन्माद पैदा किया गया और इस माहौल को तैयार करने में मुख्यधारा के मीडिया चैनलों एवं अखबारों ने विशेष भूमिका निभाई। मुख्यधारा का यह मीडिया एकाधिकारी पूंजीपतियों द्वारा नियंत्रित है और आज इनका हिंदू फासीवादी संगठन आर एस एस के साथ गठजोड़ कायम है।
    
उन्होंने कहा कि इस अंधराष्ट्रवाद को हिंदू धर्म से जोड़कर और पाकिस्तान-कश्मीर-मुसलमान का एक समीकरण बनाकर हिंदू राष्ट्र की फासीवादी परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी तरह बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या के नाम पर विशेष गहन पुनरीक्षण करा मजदूर-मेहनतकश जनता से मतदान का अधिकार छीनने की साजिश हो रही है। इन्हीं तर्कों पर मजदूर बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है और इस सबका विरोध करने वालों को राष्ट्रद्रोही करार दिया जा रहा है। पूंजीवादी मीडिया इस अंधराष्ट्रवादी राजनीति का बढ़कर प्रसार कर रहा है। 
    
सेमिनार में भागीदार अन्य वक्ताओं ने कहा कि फासीवादी ताकतें आज केंद्र की सत्ता में मौजूद हैं। इन्हें अडानी-अम्बानी सरीखे एकाधिकारी पूंजीपतियों का संरक्षण प्राप्त है। ये ताकतें देश में भुखमरी, बेरोजगारी और बढ़ती हिंसा की मूल समस्याओं को ढंककर, जनता के समक्ष मुस्लिम समुदाय या पाकिस्तान या कश्मीर के नाम पर छद्म दुश्मन खड़ा करके, उनके बीच अंधराष्ट्रवादी उन्माद पैदा कर रही हैं और उनकी इस मुहिम में मुख्यधारा का मीडिया बढ़कर उनका सहयोग कर रहा है।
    
वक्ताओं ने कहा कि युद्ध के दौरान न्यूज चैनलों के स्टूडियों में युद्ध के दृश्य बनाए जाते हैं और न्यूज एंकर उन्मादी तरीके से युद्ध की झूठी-सच्ची खबरें परोसते हैं। यहां तक कि युद्ध की फर्जी तस्वीरें तक दिखाई जाती हैं। आपरेशन सिंदूर के दौरान इस्लामाबाद और रावलपिंडी तक कब्जे की झूठी खबरें मीडिया चैनलों द्वारा प्रसारित की गयीं। 
    
सेमिनार में वैकल्पिक जनपक्षधर मीडिया की जरूरतों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने मिल जुलकर काम करने और नई तकनीक व सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल की जरूरत पर भी बल दिया। साथ ही, संघर्षों के निर्णायक महत्व को रेखांकित करते हुये इस पर भी जोर दिया कि मजदूर-मेहनतकश जनता के संघर्षों को आगे बढ़ाते हुये ही जनपक्षधर मीडिया को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
    
सेमिनार की अध्यक्षता कुलदीप नाथ शुक्ल (भारत की सर्वहारा पार्टी), देवेन्द्र पाण्डेय (उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ), वंदना चौबे (प्रगतिशील लेखक संघ), डी.सी. मौर्य (इंकलाबी मजदूर केन्द्र) और रोहित (सम्पादक, नागरिक) ने की।
    
सेमिनार में मजदूर पत्रिका से गौरव सिंह, जनवादी किसान सभा से अजय असुर, इफ्टू सर्वहारा से राधेश्याम, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन से व्यास मुनि तिवारी, सत्यनारायण, लालू तिवारी, परिवर्तनकामी छात्र संगठन से कैलाश, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से सरिता, इंकलाबी मजदूर केंद्र से रामजी सिंह, सी पी आई से परमानंद जी, पटना विश्वविद्यालय की छात्रा मोनिका, क्रांतिकारी किसान यूनियन से राम रतन जी, भूमिहीन किसान संघर्ष समिति से राम नरेश तथा राष्ट्रीय मध्यान्ह भोजन रसोईयाकर्मी वेलफेयर एसोसिएशन से मृदुलेश, क्रांतिकारी किसान मंच से हिमांशु, राष्ट्रीय जनता लोक पार्टी से बृजपाल इत्यादि ने भी अपनी बात रखी।
    
सेमिनार में बरेली से आए प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच के साथियों ने क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किये।        -लखनऊ संवाददाता

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